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होर्मुज संकट का असर! देश में 60 दिन का तेल और 45 दिन की LPG मौजूद, फिर भी महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

राष्ट्रीय / बिजनेस | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | 11 मई 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुए संकट का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। एक तरफ केंद्र सरकार यह भरोसा दिला रही है कि देश में कच्चे तेल, गैस और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के पास फिलहाल लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है, जबकि करीब 45 दिनों की एलपीजी उपलब्ध है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने सरकार और तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। देश में आने वाले कच्चे तेल का बड़ा भाग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। लेकिन ईरान और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ गया है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है।

बताया जा रहा है कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल प्रतिदिन भारी नुकसान झेल रही हैं। इसी वजह से आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए जा सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियों के पूरे नुकसान की भरपाई करनी हो तो इससे कहीं ज्यादा बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन सरकार फिलहाल जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचना चाहती है।

इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें देश की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन आपूर्ति की समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि फिलहाल देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है तथा आपूर्ति व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। इसके अलावा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में बताया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा कम करने, सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने और पेट्रोल-डीजल का सीमित इस्तेमाल करने को कहा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ऊर्जा बचत केवल आर्थिक मजबूरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

सरकार अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी तेजी से फोकस कर रही है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी, पीएनजी और एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने की दिशा में कई योजनाओं पर काम चल रहा है ताकि भविष्य में विदेशी तेल पर निर्भरता कम की जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा संकट भारत के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। यदि पश्चिम एशिया का तनाव लंबा खिंचता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। फिलहाल राहत की बात यही है कि देश के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है और सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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