राष्ट्रीय / बिजनेस | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | 11 मई 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुए संकट का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता दिखाई दे रहा है। सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिसके चलते आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। भारत के लिए आने वाला बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। लेकिन ईरान और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण इस समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान झेल रही हैं। इसी नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियों के पूरे नुकसान की भरपाई करनी हो तो कीमतों में 15 से 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, लेकिन सरकार आम जनता पर बोझ बढ़ाने से बचना चाहती है। ऐसे में सीमित बढ़ोतरी का रास्ता अपनाया जा सकता है।
इसी बीच केंद्र सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर पेट्रोल, डीजल या एलपीजी का अतिरिक्त भंडारण न करें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में बताया गया कि देश के पास फिलहाल लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है, जबकि करीब 45 दिनों की एलपीजी उपलब्ध है।
सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि फिलहाल देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार भी 703 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर बताए जा रहे हैं, जिससे आयात संबंधी दबाव को संभालने में मदद मिल रही है।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने, कार पूलिंग अपनाने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि ईंधन बचत केवल आर्थिक जरूरत नहीं बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
सरकार अब लंबी अवधि की ऊर्जा रणनीति पर भी तेजी से काम कर रही है। इसमें सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी, पीएनजी और एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की योजना शामिल है ताकि विदेशी तेल पर निर्भरता कम की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा संकट भारत के लिए एक बड़ा संकेत है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आत्मनिर्भरता बढ़ाना अब अनिवार्य हो गया है। फिलहाल राहत की बात यह है कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।




