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ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: DOJ (Department of Justice) ने बनाया 1.7 अरब डॉलर का ‘एंटी-वेपनाइजेशन फंड’, मचा राजनीतिक तूफान

अमेरिका / राजनीति / न्याय व्यवस्था | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 19 मई 2026

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने अमेरिकी राजनीति, न्याय व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी न्याय विभाग यानी DOJ (Department of Justice) ने 1.776 अरब डॉलर का एक विशाल “Anti-Weaponization Fund” बनाने की घोषणा की है। यह कदम उस समय सामने आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने IRS के खिलाफ दायर अपना 10 अरब डॉलर का मुकदमा वापस लेने पर सहमति दी। ट्रंप ने आरोप लगाया था कि उनकी टैक्स रिटर्न लीक कर उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया। DOJ के अनुसार यह फंड उन लोगों के दावों की सुनवाई और मुआवजे के लिए बनाया गया है, जो खुद को “सरकारी एजेंसियों द्वारा राजनीतिक या वैचारिक उत्पीड़न” का शिकार मानते हैं। इस फैसले ने अमेरिकी राजनीति में भूचाल ला दिया है, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि यह फंड ट्रंप समर्थकों, खासकर 6 जनवरी कैपिटल हिंसा मामले के आरोपियों और दोषियों को सरकारी धन से राहत देने का रास्ता बन सकता है।

अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि यह फंड “सरकारी शक्तियों के दुरुपयोग” के खिलाफ एक संस्थागत तंत्र के रूप में काम करेगा। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि “सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किसी भी अमेरिकी नागरिक के खिलाफ राजनीतिक हथियार की तरह नहीं होना चाहिए।” DOJ के मुताबिक इस फंड के जरिए पीड़ितों को आर्थिक सहायता, कानूनी राहत और यहां तक कि “औपचारिक माफी” भी दी जा सकेगी।

लेकिन विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने इस कदम को “टैक्सपेयर्स के पैसों से बनाया गया राजनीतिक फंड” बताया है। कांग्रेस सदस्य जेमी रास्किन और जो नेगूज़ सहित कई नेताओं ने आरोप लगाया कि यह फंड ट्रंप के राजनीतिक सहयोगियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है। डेमोक्रेट सांसदों ने इसे “1.7 अरब डॉलर का स्लश फंड” बताते हुए अदालत में इसे रोकने की कोशिश शुरू कर दी है।

दरअसल ट्रंप, उनके बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप तथा ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन ने IRS और ट्रेजरी डिपार्टमेंट पर मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि एक पूर्व IRS कर्मचारी ने उनकी टैक्स जानकारी अवैध रूप से लीक की और सरकारी एजेंसियों ने उनकी सुरक्षा करने में विफलता दिखाई। लेकिन अदालत में सवाल उठने लगे थे कि जब ट्रंप खुद सरकार और DOJ को नियंत्रित कर रहे हैं, तो क्या यह मुकदमा वास्तव में निष्पक्ष कानूनी विवाद माना जा सकता है?

कानूनी विशेषज्ञों ने पहले ही इस मामले को “अभूतपूर्व” बताया था। उनका कहना था कि किसी मौजूदा राष्ट्रपति द्वारा अपनी ही सरकार की एजेंसियों के खिलाफ हर्जाने का मुकदमा चलाना संवैधानिक और न्यायिक जटिलताएं पैदा करता है। अदालत ने भी ट्रंप प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा था कि इस मामले में वास्तविक कानूनी विवाद बचा भी है या नहीं।

अब मुकदमा वापस लेने और उसके बदले विशाल सरकारी फंड बनाने के फैसले ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचक पूछ रहे हैं कि क्या यह वास्तव में न्याय सुधार का प्रयास है या फिर राजनीतिक समर्थन को मजबूत करने की रणनीति? खासकर इसलिए क्योंकि इस फंड के जरिए 6 जनवरी कैपिटल हिंसा में शामिल और बाद में ट्रंप द्वारा माफ किए गए लोगों को भी मुआवजा मांगने का अवसर मिल सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ट्रंप की उस व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वे खुद को “सिस्टम के खिलाफ लड़ने वाले नेता” के रूप में पेश करते हैं। ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि FBI, DOJ और IRS जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल उनके खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में किया गया। अब इस फंड के जरिए वे अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार “पुराने अन्याय” को ठीक कर रही है।

फिलहाल अमेरिका में यह मुद्दा केवल कानूनी नहीं बल्कि गहरे राजनीतिक और संवैधानिक विवाद का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में अदालतों, कांग्रेस और मीडिया में इस “Anti-Weaponization Fund” को लेकर तीखी लड़ाई देखने को मिल सकती है।

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