अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 14 मई 2026
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest पर चढ़ाई के लिए 2026 के स्प्रिंग सीजन का रास्ता आधिकारिक रूप से खोल दिया गया है। नेपाल की 11 सदस्यीय शेरपा टीम ने बुधवार सुबह करीब 10:25 बजे 8,848.86 मीटर ऊंची एवरेस्ट चोटी पर पहुंचकर रोप-फिक्सिंग अभियान पूरा किया। इसके साथ ही दुनिया भर से आए पर्वतारोहियों के लिए समिट अभियान शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। नेपाल की Expedition Operators’ Association Nepal ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अनुभवी शेरपा पर्वतारोही मिंगमा दोरची शेरपा के नेतृत्व में टीम ने कठिन मौसम और जोखिम भरी परिस्थितियों के बावजूद सफलतापूर्वक अभियान पूरा किया।
एसोसिएशन के महासचिव Rishi Bhandari ने कहा कि बेहद खराब मौसम, ऊंचाई से जुड़े खतरों और कठिन पर्वतीय हालात के बावजूद नेपाली शेरपा समुदाय ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी बहादुरी, पेशेवर क्षमता और समर्पण साबित किया है। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट अभियान की सफलता में शेरपा समुदाय की भूमिका सबसे अहम होती है।
रोप-फिक्सिंग टीम में मिंगमा दोरची शेरपा, पाम दोर्जी शेरपा, पासांग ताशी शेरपा, लोपसांग भूटिया, मिंग नुर्बू शेरपा, छोम्बा तेंजिंग शेरपा, गुरु भोते, मिंगमा तेंज शेरपा, मिंग तेम्बा शेरपा, डेंडी शेरपा और पासांग नुर्बू शेरपा शामिल थे। टीम ने शिखर पर नेपाल सरकार, पर्यटन विभाग और EOAN के झंडे फहराकर अभियान पूरा होने की घोषणा की।
विशेषज्ञों के अनुसार एवरेस्ट पर रोप-फिक्सिंग अभियान सबसे चुनौतीपूर्ण चरणों में से एक माना जाता है। शेरपा टीम को खुम्बू आइसफॉल, बर्फीले तूफानों, ऑक्सीजन की कमी और खतरनाक दरारों के बीच रास्ता बनाना पड़ता है। यही तय करता है कि बाकी पर्वतारोही सुरक्षित तरीके से शिखर तक पहुंच सकेंगे या नहीं।
बताया गया है कि इस सीजन में दुनिया भर से करीब 490 पर्वतारोही नेपाल पहुंच चुके हैं और पिछले एक महीने से खुम्बू क्षेत्र में अनुकूल मौसम का इंतजार कर रहे थे। अब रास्ता खुलने के बाद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अभियान दल अगले कुछ दिनों में शिखर फतह की कोशिश करेंगे।
नेपाल की अर्थव्यवस्था में पर्वतारोहण और एडवेंचर टूरिज्म की बड़ी भूमिका है। हर साल एवरेस्ट सीजन के दौरान हजारों विदेशी पर्यटक और पर्वतारोही नेपाल पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन उद्योग को बड़ा सहारा मिलता है। शेरपा समुदाय के लिए भी यह सीजन आजीविका का प्रमुख स्रोत माना जाता है।
हालांकि विशेषज्ञ लगातार यह भी चेतावनी देते रहे हैं कि एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़, जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने जैसी चुनौतियां भविष्य में पर्वतारोहण को और अधिक जोखिम भरा बना सकती हैं। इसके बावजूद दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का जुनून हर साल सैकड़ों पर्वतारोहियों को हिमालय की ओर खींच लाता है।




