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फरक्का बैराज के असर को कम करने की तैयारी? पद्मा नदी पर नया बांध बनाएगा बांग्लादेश, भारत से मंजूरी की जरूरत से किया इनकार

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ढाका/नई दिल्ली | 14 मई 2026

Bangladesh की सरकार ने पद्मा नदी पर एक बड़े बैराज निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी है। बांग्लादेश का दावा है कि इस परियोजना का उद्देश्य भारत के Farakka Barrage के “नकारात्मक प्रभाव” को कम करना और अपने हिस्से के पानी का बेहतर भंडारण करना है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि इसी वर्ष दिसंबर में समाप्त होने जा रही है।

बांग्लादेश की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद कार्यकारी समिति (ECNEC) ने प्रधानमंत्री Tarique Rahman की अध्यक्षता में इस परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दी। परियोजना की अनुमानित लागत 34,497.25 करोड़ टका बताई गई है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री Shahiduddin Chowdhury Annie ने कहा कि इस बांध का मुख्य उद्देश्य पद्मा नदी में पानी का संग्रह बढ़ाकर फरक्का बैराज के प्रभाव को संतुलित करना है।

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह परियोजना पूरी तरह बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित से जुड़ी है और इसके लिए भारत से किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि साझा नदियों से जुड़े मुद्दे अपनी जगह हैं, लेकिन पद्मा बैराज परियोजना को लेकर किसी अलग द्विपक्षीय चर्चा की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि गंगा जल बंटवारे को लेकर भारत के साथ बातचीत जारी है।

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। Farakka Barrage का निर्माण पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में गंगा नदी पर किया गया था। इसे वर्ष 1975 में चालू किया गया था ताकि हुगली नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखा जा सके और कोलकाता बंदरगाह में गाद जमने की समस्या कम हो। लेकिन बांग्लादेश लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि फरक्का बैराज की वजह से उसके हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित हुआ है, जिससे कृषि, मत्स्य पालन और पर्यावरण पर असर पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पद्मा नदी पर प्रस्तावित नया बैराज केवल जल प्रबंधन परियोजना नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की जल राजनीति से भी जुड़ा कदम है। 54 साझा नदियों वाले भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में जल बंटवारा हमेशा अहम विषय रहा है। ऐसे में संधि की अवधि समाप्त होने से पहले यह परियोजना नई रणनीतिक बहस को जन्म दे सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश अपनी जल सुरक्षा को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन, सूखा और नदी प्रवाह में बदलाव ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। वहीं भारत भी गंगा और उसकी सहायक नदियों के प्रबंधन को अपने आर्थिक और सामरिक हितों से जोड़कर देखता है।

हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों ने अब तक किसी टकराव जैसी स्थिति से इनकार किया है, लेकिन आने वाले महीनों में गंगा जल संधि के नवीनीकरण और पद्मा बैराज परियोजना को लेकर नई कूटनीतिक बातचीत तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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