अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/तेहरान | 14 मई 2026
Iran ने BRICS समूह के भीतर बढ़ते कूटनीतिक तनाव के संकेत देते हुए बिना नाम लिए एक सदस्य देश पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के उपविदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि BRICS का एक सदस्य देश दूसरे देशों पर तेहरान की कड़ी आलोचना करने के लिए दबाव बना रहा है। माना जा रहा है कि उनका इशारा United Arab Emirates की ओर था।
गरीबाबादी ने कहा कि दुनिया के सामने यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि BRICS समूह अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत की अध्यक्षता में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन सफल रहेगा और सदस्य देशों के बीच साझा घोषणापत्र पर सहमति बनेगी।
ईरानी उपविदेश मंत्री ने UAE और Saudi Arabia का नाम लिए बिना कहा कि ईरान ने उन दोनों देशों से जुड़े हमलों और गतिविधियों का दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार किया है और उन्हें संबंधित पक्षों के साथ साझा भी किया गया है। उन्होंने कहा कि तेहरान इस मुद्दे पर “उचित फैसला” करेगा।
ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की। उनका कहना था कि पहले इस प्रक्रिया में Oman मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, जबकि अब Pakistan यह भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थ केवल प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम करता है, उसका किसी पक्ष से सीधा संबंध नहीं होता।
गरीबाबादी ने यह भी बताया कि ईरान ने India से पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए पहल करने का अनुरोध किया है। उन्होंने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि नई दिल्ली हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की पक्षधर रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने संकेत दिया कि वह एक नई “सर्विस फीस” व्यवस्था पर काम कर रहा है। गरीबाबादी ने कहा कि यह तंत्र अंतरराष्ट्रीय कानून और पारदर्शिता के आधार पर तैयार किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा समुद्री कानूनों के तहत जहाजों से ट्रांजिट फीस नहीं ली जा सकती।
उन्होंने दावा किया कि युद्ध की परिस्थितियों के बावजूद ईरान ने अब तक 11 भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। उनके अनुसार यह व्यवस्था “मित्र देशों” के लिए प्राथमिकता के आधार पर लागू की जा रही है।
चाबहार पोर्ट परियोजना पर बोलते हुए ईरानी उपविदेश मंत्री ने कहा कि यह भारत और ईरान दोनों के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट है और तेहरान भारत के साथ सहयोग जारी रखने को तैयार है। उन्होंने कहा कि अब यह भारत पर निर्भर करता है कि वह इस मुद्दे को अमेरिका के साथ किस तरह उठाता है।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल अस्थायी सीजफायर नहीं बल्कि पूरे युद्ध के स्थायी अंत के पक्ष में है। गरीबाबादी ने कहा कि तेहरान चाहता है कि उस पर लगा नौसैनिक प्रतिबंध हटे, उसकी फ्रीज संपत्तियां जारी की जाएं और सभी मुद्दों पर व्यापक समझौता हो। इसके लिए ईरान ने 30 दिन की वार्ता अवधि का प्रस्ताव रखा है।
विश्लेषकों का मानना है कि BRICS के भीतर ईरान, UAE और सऊदी अरब जैसे देशों की मौजूदगी ने समूह को आर्थिक रूप से मजबूत जरूर किया है, लेकिन पश्चिम एशिया की पुरानी क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विताएं अब संगठन के भीतर भी दिखाई देने लगी हैं। ऐसे में भारत की अध्यक्षता वाला आगामी BRICS सम्मेलन कूटनीतिक संतुलन की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।



