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नेपाल ने भारतियों पर नए यात्रा प्रतिबंध की खबरों को बताया झूठा, कहा- खुली सीमा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/काठमांडू | 14 मई 2026

नेपाल सरकार ने भारतीय पर्यटकों पर नए यात्रा प्रतिबंध लगाए जाने की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर पहचान पत्र अनिवार्य करने, 30 दिन की सीमा तय करने और ओवरस्टे पर वाहनों की जब्ती जैसी खबरें “पूरी तरह गलत, भ्रामक और निराधार” हैं। नेपाल सरकार की यह सफाई उस समय आई जब सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि नेपाल ने भारतीय नागरिकों के लिए नई सख्त यात्रा व्यवस्था लागू कर दी है। इन खबरों के बाद सीमा क्षेत्रों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने स्पष्ट कहा कि भारत और नेपाल के बीच दशकों पुरानी खुली सीमा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जनसंपर्क, सांस्कृतिक रिश्ते और पर्यटन सहयोग पहले की तरह मजबूत और कायम हैं।

नेपाल सरकार ने साथ ही एक नई ऑनलाइन सुविधा प्रणाली शुरू करने की घोषणा की है, जिससे भारतीय और अन्य विदेशी पर्यटक निजी वाहनों से नेपाल में प्रवेश करते समय अस्थायी परमिट और शुल्क भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य यात्रा को आसान और पारदर्शी बनाना है, न कि किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाना।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने मीडिया संस्थानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आम लोगों से अपील की कि वे बिना पुष्टि वाली खबरें प्रसारित न करें और पर्यटन तथा यात्रा नियमों से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों से ही लें।

इसी बीच भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। नेपाल ने भारत और चीन द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित लिपुलेख मार्ग के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। काठमांडू का दावा है कि यह क्षेत्र नेपाली सीमा का हिस्सा है और यात्रा व्यवस्था तय करने से पहले उससे कोई परामर्श नहीं किया गया।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने नेपाल की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा विवादों को कूटनीतिक संवाद के जरिए सुलझाने की पुरानी परंपरा रही है।

लिपुलेख विवाद वर्ष 2020 में तब और बढ़ गया था जब नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी कर लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताया था। भारत ने उस समय नेपाल के इस कदम को “ऐतिहासिक तथ्यों और द्विपक्षीय समझ के विपरीत” बताते हुए सख्त आपत्ति दर्ज कराई थी।

नेपाल का कहना है कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार ये इलाके उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि भारत इस दावे को स्वीकार नहीं करता। दोनों देशों के बीच यह सीमा विवाद लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

हालांकि हालिया तनाव के बावजूद भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक संवाद जारी है। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि नेपाल की ओर से विदेश सचिव Vikram Misri को काठमांडू आने का निमंत्रण मिला है और दोनों देशों की सहमति से जल्द तारीख तय की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नेपाल के रिश्ते केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी बेहद गहरे हैं। ऐसे में दोनों देश किसी भी विवाद को बातचीत और आपसी सहयोग के जरिए हल करने की कोशिश करेंगे।

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