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CEC नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा—निष्पक्षता सिर्फ होनी नहीं, दिखनी भी चाहिए

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 जुलाई 2026

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान निष्पक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांत पर जोर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला प्रधानमंत्री पर भरोसे का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि नियुक्ति प्रक्रिया न्यायसंगत दिखाई भी दे।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत से पूछा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में प्रधानमंत्री के निर्णय पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो क्या फिर मंत्रियों की नियुक्ति में भी किसी बाहरी व्यक्ति या पूर्व न्यायाधीश को शामिल किया जाना चाहिए?

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रश्न “प्रधानमंत्री पर अविश्वास” का नहीं है, बल्कि न्याय और निष्पक्षता के उस संवैधानिक सिद्धांत का है, जिसके तहत महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं की नियुक्तियां निष्पक्ष और पारदर्शी प्रतीत होनी चाहिए।

यह सुनवाई मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हो रही है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नियुक्ति समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर केवल कार्यपालिका-प्रधान व्यवस्था बनाने से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

मामले की सुनवाई जारी है और इस पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला देश में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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