[the_ad id="179"]
Home » Business » कोयले की परतों से प्राकृतिक गैस निकालने की तैयारी में रिलायंस, मध्य प्रदेश में बड़े विस्तार की योजना

कोयले की परतों से प्राकृतिक गैस निकालने की तैयारी में रिलायंस, मध्य प्रदेश में बड़े विस्तार की योजना

बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 जुलाई 2026

देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) अब मध्य प्रदेश में कोयले की परतों में छिपी प्राकृतिक गैस यानी कोल बेड मीथेन (Coal Bed Methane-CBM) के उत्पादन का विस्तार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी ने मध्य प्रदेश के पूर्वी सोहागपुर ब्लॉक में नए सिरे से गैस की खोज और उत्पादन बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस परियोजना के शुरुआती परीक्षण चरण में लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है।

कोल बेड मीथेन वह प्राकृतिक गैस होती है जो लाखों वर्षों से कोयले की परतों के भीतर फंसी रहती है। इसे विशेष तकनीक के जरिए गहरे कुएं खोदकर निकाला जाता है। इस गैस का उपयोग घरेलू रसोई गैस, औद्योगिक ईंधन और संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) के रूप में किया जाता है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यह अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रिलायंस के पास मध्य प्रदेश के सोहागपुर क्षेत्र में लगभग 1,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला कोल बेड मीथेन ब्लॉक है, जो दो हिस्सों—सोहागपुर वेस्ट और सोहागपुर ईस्ट—में विभाजित है। दोनों ब्लॉकों का क्षेत्रफल लगभग 500-500 वर्ग किलोमीटर है। कंपनी ने अब तक मुख्य रूप से पश्चिमी ब्लॉक पर ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि भूवैज्ञानिक दृष्टि से वहां गैस उत्पादन की संभावना अधिक मानी गई थी। अब कंपनी पूर्वी ब्लॉक में भी संभावनाओं का आकलन कर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

रिलायंस पहले ही इस क्षेत्र में 320 से अधिक गैस कुएं विकसित कर चुकी है। इन कुओं के माध्यम से व्यावसायिक स्तर पर गैस उत्पादन किया जा रहा है। कंपनी का मानना है कि नए अन्वेषण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से गैस के अतिरिक्त भंडार खोजे जा सकते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारत अपनी प्राकृतिक गैस की आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर गैस उत्पादन बढ़ाना सरकार और उद्योग दोनों की प्राथमिकताओं में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और सीएनजी नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोहागपुर परियोजना अपेक्षित परिणाम देती है तो इससे न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे आयातित गैस पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और औद्योगिक क्षेत्रों को स्थिर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

हालांकि, कोल बेड मीथेन परियोजनाओं के साथ पर्यावरणीय पहलू भी जुड़े होते हैं। गैस निकालने के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बाहर आता है, जिसके सुरक्षित निस्तारण और भूजल पर संभावित प्रभाव को लेकर विशेषज्ञ लगातार निगरानी की आवश्यकता बताते हैं। इसलिए ऐसी परियोजनाओं में पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन करना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने के लिए पारंपरिक तेल और गैस स्रोतों के साथ-साथ कोल बेड मीथेन जैसे वैकल्पिक संसाधनों का दोहन भविष्य की आवश्यकता है। रिलायंस की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यदि पूर्वी सोहागपुर ब्लॉक में गैस के नए भंडार सफलतापूर्वक विकसित होते हैं, तो इससे देश के गैस उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत की स्वदेशी ऊर्जा क्षमता को भी नई मजबूती मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *