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भारत की डेंगू वैक्सीन पर ब्राजील से उठे सवाल! टीकाकरण के बाद होती मौत ने बढ़ाई चिंता

स्वास्थ्य | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/ब्रासीलिया | 15 जून 2026

भारत की बहुप्रतीक्षित डेंगू वैक्सीन “डेंगीऑल (DengiAll)” के लॉन्च से पहले ब्राजील से आई एक खबर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नियामक एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ब्राजील में डेंगू टीकाकरण अभियान के दौरान दो लोगों की मौत और कई गंभीर प्रतिकूल प्रभावों (Severe Adverse Events) की रिपोर्ट के बाद वहां वैक्सीन अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

चिंता की वजह यह है कि ब्राजील में इस्तेमाल की जा रही Butantan-DV वैक्सीन और भारत में जल्द लॉन्च होने वाली DengiAll वैक्सीन की तकनीक और संरचना काफी हद तक एक जैसी बताई जा रही है। दोनों टीके चारों प्रकार के डेंगू वायरस के कमजोर (attenuated) रूपों से तैयार किए गए टेट्रावैलेंट वैक्सीन हैं।

ब्राजील के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार लगभग पांच लाख लोगों को वैक्सीन लगाए जाने के बाद 42 गंभीर प्रतिकूल घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें दो मौतें भी शामिल हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह दर केवल 0.008 प्रतिशत है और जनस्वास्थ्य के स्तर पर जोखिम बेहद कम माना जा सकता है।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आंकड़ों के स्तर पर जोखिम छोटा दिखने के बावजूद किसी भी वैक्सीन से जुड़े गंभीर दुष्प्रभावों की पूरी जांच आवश्यक होती है। खासकर तब जब वैक्सीन बड़े पैमाने पर बच्चों और युवाओं को दी जानी हो।

भारत में डेंगीऑल वैक्सीन को डेंगू के खिलाफ बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हर साल लाखों लोग डेंगू से प्रभावित होते हैं और हजारों गंभीर मामलों में अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ता है। ऐसे में प्रभावी वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राजील के अनुभव का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिए। यदि किसी विशेष आयु वर्ग, स्वास्थ्य स्थिति या प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से जुड़ा जोखिम सामने आता है तो भारत को वैक्सीन लॉन्च से पहले अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर विचार करना होगा।

विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि भारतीय वैक्सीन असुरक्षित है। लेकिन ब्राजील की घटनाओं ने यह संकेत जरूर दिया है कि बड़े पैमाने पर टीकाकरण से पहले निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा मूल्यांकन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

डेंगू के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन एक महत्वपूर्ण हथियार हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए सुरक्षा से जुड़े हर सवाल का पारदर्शी और वैज्ञानिक जवाब देना भी उतना ही जरूरी होगा। अब निगाहें भारत के स्वास्थ्य नियामकों और वैक्सीन निर्माताओं पर टिकी हैं कि वे ब्राजील के अनुभव से क्या सबक लेते हैं।

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