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आरजी कर मामले में फिर जांच का ऐलान, सुबेंदु अधिकारी ने पुलिस पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने बैरकपुर पुलिस आयुक्त को जांच के निर्देश दिए; पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार को लेकर उठे गंभीर सवाल

राष्ट्रीय/पश्चिम बंगाल/कोलकाता | ABC NATIONAL NEWS | 10 अगस्त 2026

कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति और न्याय व्यवस्था के केंद्र में दस्तक दी है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी ने रविवार को मामले में नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुई डॉक्टर की दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने बैरकपुर के पुलिस आयुक्त को विशेष रूप से यह जांच करने का निर्देश दिया है कि पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कथित तौर पर परिवार की मंजूरी के बिना किस परिस्थितियों में किया गया।

दो साल बाद फिर उठे पुलिस की भूमिका पर सवाल

मामले में नई जांच की घोषणा ऐसे समय हुई है जब आरजी कर कांड को लेकर पहले से ही पुलिस जांच, सबूतों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही। अब नई जांच का केंद्र केवल अपराध की परिस्थितियां नहीं, बल्कि घटना के बाद पुलिस और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम भी होंगे।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी और परिवार की भूमिका उसमें क्या थी। यदि जांच में यह सामने आता है कि परिवार की सहमति या जानकारी के बिना अंतिम संस्कार कराया गया, तो यह बेहद गंभीर प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

आरजी कर मामला फिर क्यों गर्माया?

9 अगस्त 2024 को आरजी कर अस्पताल में एक महिला डॉक्टर का शव मिलने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। घटना ने डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पतालों में महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस जांच की निष्पक्षता को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल सहित देश के कई हिस्सों में डॉक्टरों और नागरिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए।

मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंची और अदालत में भी इसकी सुनवाई हुई। अब राज्य सरकार की ओर से एक बार फिर पुलिस स्तर पर जांच के आदेश ने इस मामले को नई राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के बीच ला दिया है।

‘पुलिस ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया’—मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इस मामले में पुलिस अपने कर्तव्य का उचित तरीके से निर्वहन करने में विफल रही। इसी आधार पर उन्होंने बैरकपुर पुलिस आयुक्त को नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया है।

इस जांच का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मामला पहले ही कई स्तरों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से गुजर चुका है। ऐसे में नई जांच को लेकर यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि वह किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा न बने, बल्कि दस्तावेजों, पुलिस रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार से जुड़े रिकॉर्ड तथा संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर तथ्य सामने लाए।

परिवार की सहमति का सवाल सबसे अहम

मामले में सबसे संवेदनशील मुद्दा शव के अंतिम संस्कार से जुड़ा है। किसी भी गंभीर अपराध के मामले में पीड़ित परिवार की भावनाओं और अधिकारों का सम्मान बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि परिवार की अनुमति के संबंध में कोई विवाद है, तो जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अंतिम संस्कार का निर्णय किसने लिया, उस समय कौन-कौन से अधिकारी मौजूद थे और पुलिस रिकॉर्ड में इसकी क्या जानकारी दर्ज है।

यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि क्या परिवार को प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी और यदि नहीं, तो ऐसा क्यों हुआ। इन सवालों के जवाब केवल राजनीतिक बयान से नहीं, बल्कि आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच से मिलने चाहिए।

जांच हो, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी हो

आरजी कर मामला पहले ही लोगों के भरोसे की बड़ी परीक्षा बन चुका है। ऐसे में नई जांच की सबसे बड़ी कसौटी उसकी निष्पक्षता होगी। सरकार यदि पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रही है तो उसे जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। जांच में सामने आने वाले तथ्यों को राजनीतिक सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि कानून और साक्ष्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

पीड़िता को न्याय दिलाना किसी राजनीतिक दल की जीत या हार का विषय नहीं है। यह एक महिला की जिंदगी, उसके परिवार के अधिकार और देश की न्याय व्यवस्था पर जनता के भरोसे का सवाल है।

दो साल बाद भी सवाल बाकी

आरजी कर कांड को दो साल होने जा रहे हैं, लेकिन इस मामले से जुड़े सवाल आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। अब नई जांच उन सवालों को फिर सामने ला रही है। खासकर पुलिस की भूमिका और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब तथ्य और दस्तावेजों से मिलना जरूरी है।

आरजी कर मामले में अब सबसे जरूरी सवाल यही है—क्या नई जांच पुराने सवालों का ठोस जवाब दे पाएगी? परिवार को न्याय, जांच में पारदर्शिता और दोषियों की जवाबदेही—इन तीनों के बिना इस मामले पर उठे सवाल पूरी तरह खत्म नहीं होंगे।

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