अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 25 सितंबर 2026
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में AI यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता अहम मुद्दा बनकर सामने आई। ताजा जानकारी के मुताबिक, शी ने कहा है कि अमेरिका और चीन को AI के विकास के रास्ते में अनावश्यक बाधाएं नहीं खड़ी करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि AI का विकास इंसानी नियंत्रण में रहना चाहिए और इसका इस्तेमाल लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए।
शी ने कहा कि दोनों देश AI के क्षेत्र में अग्रणी हैं और उनके पास इस तकनीक को विकसित करने और नियंत्रित करने की क्षमता के साथ-साथ जिम्मेदारी भी है। उनका संदेश यह था कि AI को आगे बढ़ने से रोकने के बजाय उसके विकास को इस तरह संचालित किया जाए कि इसका नियंत्रण इंसानों के हाथ में बना रहे। हालांकि, अब तक सामने आई जानकारी में दोनों देशों के बीच AI को लेकर किसी अंतिम और विस्तृत साझा नियम या समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AI को लेकर अमेरिका और चीन के बीच एक तरफ जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है, तो दूसरी तरफ इसके जोखिमों को लेकर दोनों देशों के सामने समान चुनौतियां भी हैं। उन्नत AI मॉडल, सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग क्षमता और तकनीकी नियंत्रण अब सिर्फ कारोबार के मुद्दे नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से भी जुड़े हुए हैं। Reuters के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत में AI के साथ व्यापार, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
शी ने अमेरिका-चीन रिश्तों को स्थिर रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन इसे नियंत्रित और स्वस्थ रखना जरूरी है। उन्होंने दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित बातचीत तथा संकट के समय संपर्क और संकट रोकने की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही। शी ने यह भी कहा कि दोनों देशों को टकराव और संघर्ष से बचने के लिए रास्ता तलाशना चाहिए।
AI को लेकर ट्रंप का रुख कुछ अलग नजर आता है। बैठक से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि “सुपर इंटेलिजेंस” बातचीत का बड़ा विषय होगा और AI के मौजूदा शासन ढांचे को बदलने की जरूरत नहीं है। ऐसे में शी का “AI विकास में बाधाएं नहीं” और “मानव नियंत्रण” दोनों बातों पर जोर देना बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
AI सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर भी बहस तेज है। अमेरिका और चीन दोनों AI में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन साथ ही AI से जुड़े साइबर हमले, गलत सूचना, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर संभावित असर और अत्यधिक शक्तिशाली प्रणालियों पर नियंत्रण जैसे जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ी है। अमेरिका की तरफ से AI से जुड़े संभावित संकटों पर चीन के साथ सीधे संवाद की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई है।
चीन का संदेश हालांकि सिर्फ AI तक सीमित नहीं रहा। शी ने ट्रंप के साथ बातचीत में अमेरिका-चीन रिश्तों को स्थिर, स्वस्थ और टिकाऊ बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को संपर्क बढ़ाना चाहिए, सहयोग के क्षेत्र तलाशने चाहिए और मतभेदों को बातचीत के जरिए संभालना चाहिए। उन्होंने अगले 5 वर्षों में 100,000 अमेरिकी युवाओं को चीन आने और अध्ययन तथा आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
बैठक में ताइवान का मुद्दा भी उठा। शी ने अमेरिका से ताइवान के सवाल को सावधानी से संभालने और ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने वाली अपनी नीति पर कायम रहने की अपील की। इससे साफ है कि AI और व्यापार पर सहयोग की कोशिश के बावजूद अमेरिका-चीन संबंधों में ऐसे संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने व्यापक रूप से स्थिर रिश्तों की जरूरत पर जोर दिया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है। दोनों देशों के बीच व्यापार, उन्नत तकनीक, AI, ताइवान और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अलग-अलग हित और मतभेद अभी भी मौजूद हैं। विशेषज्ञ विश्लेषण भी इस बात पर जोर देते हैं कि चुनौती अब सिर्फ रिश्तों को स्थिर रखने की नहीं, बल्कि इन गहरे मतभेदों को बढ़ने से रोकने की है।
ट्रंप-शी मुलाकात से AI पर फिलहाल दो समानांतर संदेश सामने आए हैं—तकनीक के विकास को अनावश्यक रूप से रोकना नहीं और दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना कि AI इंसानी नियंत्रण से बाहर न जाए। लेकिन इन सिद्धांतों को व्यवहार में बदलने के लिए दोनों देशों को ठोस नियम, सुरक्षा व्यवस्था और संकट के समय सीधे संवाद की जरूरत होगी। अभी बातचीत ने दिशा जरूर दिखाई है, लेकिन AI के भविष्य को लेकर अंतिम ढांचा सामने आना बाकी है।


