राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 सितंबर 2026
SIR को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों का दबाव अब एक बड़े राजनीतिक मंच की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि INDIA ब्लॉक की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली के संविधान क्लब में होने की संभावना है। बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों, SIR की प्रक्रिया और विपक्ष की आगे की रणनीति पर चर्चा की जा सकती है।
हुगली के सेरामपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संदेश भेजा है और उनसे कहा है कि विपक्षी दलों को एक साथ बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। ममता के मुताबिक, उनकी राहुल गांधी से बातचीत के बाद INDIA ब्लॉक की बैठक बुलाने की तैयारी हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर विपक्ष अब अलग-अलग आवाजों के बजाय साझा मंच से अपनी बात रखने की तैयारी में है।
यह बैठक ऐसे समय प्रस्तावित है जब SIR को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक विरोध बढ़ रहा है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और SIR की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस समेत कई दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ विपक्षी दल उनके खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग तक पहुंच चुके हैं।
ममता बनर्जी खुद पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर सबसे मुखर नेताओं में शामिल रही हैं। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और उसके बाद लाखों अपीलें दाखिल हुईं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 27.16 लाख नाम हटाए गए और 22 लाख से अधिक लोगों ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की। कुल अपीलों की संख्या 38.31 लाख तक पहुंची। इन आंकड़ों को लेकर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रही हैं।
विपक्षी एकजुटता की यह कोशिश उस समय सामने आई है जब चुनाव आयोग ने भी SIR की प्रक्रिया में कई बदलावों की घोषणा की है। 26 सितंबर को आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR के दौरान Form 6 के साथ जुड़ी अतिरिक्त घोषणा केवल SIR की प्रक्रिया में लागू होगी, जबकि सामान्य परिस्थितियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए पहले वाला प्रारूप इस्तेमाल होगा।
इसी बीच चुनाव आयोग के भीतर 2 चुनाव आयुक्तों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर दर्ज लिखित आपत्तियों को लेकर भी विवाद जारी है। मतदाता सूची, Form 6, IT व्यवस्था, डाटाबेस तक पहुंच और पश्चिम बंगाल की अपील प्रक्रिया जैसे मामलों को लेकर सामने आई आपत्तियों ने विपक्ष को सरकार और आयोग पर हमला करने का नया आधार दिया है। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं और SIR सहित प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
दिल्ली में भी SIR को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के आधार पर भेजे गए नोटिसों की प्रक्रिया पर अदालत ने सवाल पूछे हैं और आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता सबसे जरूरी है, क्योंकि नाम हटने का सीधा संबंध मतदान के अधिकार से जुड़ता है।
सड़क पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए। TMC सांसद महुआ मोइत्रा भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं और उन्होंने पुलिस कार्रवाई तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाए।
अब ममता बनर्जी की ओर से 30 सितंबर की प्रस्तावित बैठक ने इस पूरे विवाद को राष्ट्रीय विपक्षी मंच पर पहुंचा दिया है। अगर बैठक होती है तो इसमें कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेता SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और आगे के राजनीतिक कदमों पर अपनी स्थिति रख सकते हैं। बैठक में साझा कार्यक्रम, विरोध प्रदर्शन और कानूनी विकल्पों पर भी चर्चा होने की संभावना है, हालांकि अंतिम एजेंडा अभी घोषित नहीं हुआ है।
SIR का विवाद अब केवल मतदाता सूची की तकनीकी प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है। यह चुनाव आयोग की पारदर्शिता, मतदाता के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसे का राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। 30 सितंबर की संभावित INDIA ब्लॉक बैठक इस बहस को एक साझा विपक्षी मंच दे सकती है। अब देखना होगा कि अलग-अलग दलों के सवाल बैठक की मेज पर कितनी साझा रणनीति में बदलते हैं।



