Home » National » विदेशी यात्रा पर टैक्स की खबरों को पीएम मोदी ने किया खारिज, बोले- “ऐसे किसी प्रतिबंध का सवाल ही नहीं”

विदेशी यात्रा पर टैक्स की खबरों को पीएम मोदी ने किया खारिज, बोले- “ऐसे किसी प्रतिबंध का सवाल ही नहीं”

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 मई 2026

देश में आर्थिक चुनौतियों, ईंधन संकट और सरकारी मितव्ययिता अभियान के बीच विदेशी यात्राओं पर टैक्स लगाए जाने की अटकलों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर पर खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की ओर से विदेशी यात्रा पर किसी तरह का टैक्स, सेस या अतिरिक्त शुल्क लगाने पर विचार नहीं किया जा रहा और “ऐसे किसी प्रतिबंध का सवाल ही नहीं उठता।” प्रधानमंत्री का यह बयान उस समय आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार विदेशी यात्राओं पर टैक्स लगाने या अतिरिक्त शुल्क वसूलने के विकल्पों पर विचार कर रही है।

हाल के दिनों में केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों की ओर से खर्चों में कटौती और मितव्ययिता अपनाने के संकेत दिए गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन की बचत, गैर-जरूरी खर्चों में कमी और आयातित वस्तुओं के इस्तेमाल को सीमित करने की अपील की थी। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि सरकार विदेशी पर्यटन और विदेश यात्रा पर अतिरिक्त टैक्स लगा सकती है ताकि विदेशी मुद्रा का दबाव कम किया जा सके और आर्थिक संसाधनों की बचत हो सके। लेकिन अब प्रधानमंत्री के बयान के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है।

दरअसल पश्चिम एशिया में जारी तनाव, तेल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है। भारत का बड़ा हिस्सा अभी भी कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर घरेलू महंगाई, परिवहन लागत और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि में हाल के दिनों में सरकार द्वारा मितव्ययिता के संकेत दिए जा रहे थे। कई राज्यों ने सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं और बड़े सरकारी आयोजनों पर रोक या सीमाएं लगाने की शुरुआत भी कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार विदेशी यात्राओं पर टैक्स या सेस लगाने जैसे विकल्पों पर आंतरिक स्तर पर चर्चा कर रही है, हालांकि कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई थी। विपक्ष ने सवाल उठाया था कि क्या सरकार आर्थिक दबाव को संभालने के लिए आम लोगों पर नए टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है। वहीं ट्रैवल और एविएशन सेक्टर से जुड़े लोगों ने भी चिंता जताई थी कि अगर ऐसा कदम उठाया जाता तो पर्यटन उद्योग और अंतरराष्ट्रीय यात्रा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता था।

प्रधानमंत्री मोदी के बयान को इस बहस पर सीधी प्रतिक्रिया माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार नागरिकों की विदेशी यात्रा पर किसी तरह की रोक या अतिरिक्त कर लगाने के पक्ष में नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार नहीं चाहती कि आर्थिक चुनौतियों और ईंधन संकट के बीच ऐसा संदेश जाए कि आम लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता या यात्रा अधिकारों पर कोई नई पाबंदी लगाई जा रही है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सरकार की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। भारत का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है और तेल कीमतों में तेजी से सरकारी वित्तीय संतुलन पर दबाव बढ़ रहा है। यही वजह है कि सरकार लगातार “आर्थिक अनुशासन” और “संसाधनों की बचत” पर जोर दे रही है। कई राज्यों ने सरकारी वाहनों के इस्तेमाल, बिजली खर्च और अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पहले ही सीमाएं लगानी शुरू कर दी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी ईंधन संकट को देखते हुए दो दिन वर्चुअल सुनवाई का फैसला किया है और जजों द्वारा कार-पूलिंग अपनाने की बात कही गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक प्रधानमंत्री का बयान फिलहाल राहत देने वाला जरूर है, लेकिन यह भी संकेत देता है कि सरकार आने वाले समय में आर्थिक चुनौतियों को लेकर बेहद सतर्क है। पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने की स्थिति में तेल कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ऐसे में सरकार सीधे टैक्स लगाने की बजाय बचत, संयम और सीमित खर्च के जरिए आर्थिक दबाव को नियंत्रित करने की रणनीति अपनाती दिखाई दे रही है।

विदेशी यात्रा पर किसी नए टैक्स की संभावना को प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से नकार दिया है। लेकिन इसके साथ ही यह बहस भी तेज हो गई है कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत को आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कितनी सख्त नीतियां अपनानी पड़ सकती हैं और पड़ रही हैं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments