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संसद का शीतकालीन सत्र खत्म: लोकसभा–राज्यसभा में कितना हुआ काम, क्या रह गया अधूरा?

महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 19 दिसंबर 2025

नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस सत्र से सरकार को कई अहम विधेयकों को पारित कराने की उम्मीद थी, लेकिन हंगामे, बहस और टकराव के बीच कामकाज उम्मीद के मुताबिक नहीं हो सका। लोकसभा और राज्यसभा—दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित रही, जिसका सीधा असर उत्पादकता पर पड़ा।

लोकसभा की बात करें तो यहां कामकाज का प्रतिशत अपेक्षाकृत बेहतर रहा, लेकिन फिर भी पूरे सत्र का समय पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो सका। कुछ अहम विधेयक पारित हुए, लेकिन कई मुद्दों पर विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण सदन को बार-बार स्थगित करना पड़ा। कई दिन ऐसे भी रहे जब प्रश्नकाल ठीक से नहीं चल पाया।

राज्यसभा में हालात और ज्यादा मुश्किल भरे रहे। यहां कामकाज का स्तर लोकसभा से कम रहा। विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, वहीं सत्ता पक्ष ने भी जवाबी तेवर दिखाए। नतीजा यह हुआ कि बहस से ज्यादा समय हंगामे की भेंट चढ़ गया। कई अहम चर्चाएं अधूरी रह गईं।

सरकार का कहना है कि उसने सत्र के दौरान जरूरी विधायी काम निपटाने की कोशिश की और कुछ महत्वपूर्ण बिल पास भी कराए। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार चर्चा से बचती रही और असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश की गई। दोनों पक्षों के आरोप–प्रत्यारोप के बीच संसद का समय लगातार बर्बाद होता रहा।

इस सत्र में आम जनता से जुड़े कई मुद्दों—महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की परेशानी और संघीय ढांचे से जुड़े सवालों—पर लंबी और ठोस चर्चा की उम्मीद थी, लेकिन अधिकतर मुद्दे हंगामे की वजह से ठीक से उठ ही नहीं पाए। इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या संसद अपनी असली भूमिका निभा पा रही है?

कुल मिलाकर, शीतकालीन सत्र खत्म तो हो गया, लेकिन यह सत्र काम से ज्यादा शोर के लिए याद किया जाएगा। अब निगाहें अगले सत्र पर हैं—क्या तब संसद में ज्यादा संवाद होगा, ज्यादा बहस होगी और जनता के मुद्दों पर गंभीरता से काम हो पाएगा, या फिर वही पुराना हाल दोहराया जाएगा

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