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राहुल गांधी को कसाब से ज्यादा खतरनाक बताने पर बवाल, अनूप वर्मा के खिलाफ साइबर शिकायत

राष्ट्रीय/राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 सितंबर 2026

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 26/11 आतंकी अजमल कसाब से भी ज्यादा खतरनाक बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट अब सीधे कानूनी कार्रवाई के घेरे में आ गई है। पूर्व फ्लाइट लेफ्टिनेंट अनूप वर्मा के खिलाफ कांग्रेस सेवादल लीगल सेल ने साइबर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि X पर पोस्ट के जरिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तुलना एक दोषसिद्ध आतंकवादी से की गई और उन्हें देश के लिए उससे भी बड़ा खतरा बताया गया। शिकायतकर्ता ने इस पोस्ट को केवल राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि एक संवैधानिक पद पर बैठे विपक्ष के नेता की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बयान बताया है।

साइबर शिकायत के दस्तावेज के मुताबिक मामला “Online and Social Media Related Crime” की श्रेणी में दर्ज किया गया है, जबकि उप-श्रेणी में “Provocative Speech for unlawful acts” दर्ज है। शिकायत में संबंधित X पोस्ट का लिंक और उसके स्क्रीनशॉट भी बतौर साक्ष्य लगाए गए हैं। शिकायत में पोस्ट की तारीख 28 सितंबर 2026 बताई गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस और साइबर क्राइम विभाग से पोस्ट को संरक्षित करने, उससे जुड़े मेटाडाटा को सुरक्षित रखने, FIR दर्ज करने और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

विवाद की जड़ अनूप वर्मा के X पोस्ट में है। शिकायत के अनुसार पोस्ट में राहुल गांधी की तस्वीर को अजमल कसाब की तस्वीर के साथ रखते हुए लिखा गया कि “With all conviction, I can tell you guys, the person on left is far more dangerous for Bharat.” इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस सेवादल लीगल सेल ने कड़ा ऐतराज जताया है। उसका कहना है कि लोकतांत्रिक असहमति और राजनीतिक आलोचना अपनी जगह है, लेकिन किसी संवैधानिक पद पर बैठे नेता को आतंकवादी से जोड़ने वाली भाषा को कानूनी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

कांग्रेस सेवादल लीगल सेल ने अपने आधिकारिक X पोस्ट में कहा है कि संबंधित पोस्ट के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज की गई है और मामले को उचित कानूनी माध्यमों से आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन ने यह भी कहा कि वह कांग्रेस और उसके नेताओं या सदस्यों को निशाना बनाने वाले किसी भी ऐसे कृत्य को स्वीकार नहीं करेगा, जिसे वह गैरकानूनी या दुर्भावनापूर्ण मानता है। संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अधिकार कानूनी प्रतिबंधों और संवैधानिक जिम्मेदारियों के अधीन है।

शिकायत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 196, 353 और 356 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कुछ धाराओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी पोस्ट पर कौन-सी धाराएं वास्तव में लागू होती हैं, यह पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल शिकायत में इन धाराओं का हवाला शिकायतकर्ता की ओर से की गई कानूनी मांग के रूप में दिया गया है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर राजनीतिक नेताओं को लेकर बेहद तीखी और व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। एक ओर राजनीतिक दल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आलोचना के अधिकार की बात करते हैं, तो दूसरी ओर आपत्तिजनक या मानहानिकारक सामग्री पर कानूनी कार्रवाई की मांग भी लगातार सामने आती रही है। ऐसे मामलों में अंतिम जिम्मेदारी जांच एजेंसियों और अदालतों की होती है कि किसी पोस्ट की भाषा कानून की सीमा का उल्लंघन करती है या वह राजनीतिक अभिव्यक्ति के दायरे में आती है।

अनूप वर्मा की सार्वजनिक सोशल मीडिया गतिविधियों में राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर तीखी टिप्पणियां पहले भी दिखाई देती रही हैं। वे स्वयं को पूर्व सैन्य अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर इससे पहले भी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर बहस होती रही है। हालांकि मौजूदा मामले में विवाद का केंद्र विशेष रूप से राहुल गांधी और अजमल कसाब की तुलना वाली पोस्ट है।

कांग्रेस सेवादल लीगल सेल ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मामले को केवल सोशल मीडिया विवाद तक सीमित नहीं रखना चाहता। शिकायत में FIR, डिजिटल साक्ष्यों और मेटाडाटा के संरक्षण तथा समयबद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। यानी अब गेंद पुलिस और साइबर अपराध जांच तंत्र के पाले में है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी राजनीतिक नेता की तीखी आलोचना और उसे एक आतंकवादी से अधिक खतरनाक बताने के बीच की सीमा पार हुई है? इसका फैसला राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि कानून और न्यायिक प्रक्रिया से होगा। फिलहाल एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक बयानबाजी को सीधे साइबर शिकायत और संभावित कानूनी कार्रवाई के मोर्चे पर पहुंचा दिया है।

कांग्रेस की ओर से इसे लोकतांत्रिक असहमति को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि शिकायत में संबंधित पोस्ट को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती है और जांच के दौरान पोस्ट की भाषा, संदर्भ तथा उसके संभावित कानूनी प्रभाव को किस तरह परखा जाता है।

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