अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026
दुनिया में जब कोई आम इंसान विदेश यात्रा की योजना बनाता है, तो सबसे पहले पासपोर्ट और वीजा की जरूरत पड़ती है। एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन की प्रक्रिया से गुजरना होता है और दूसरे देश में प्रवेश के लिए जरूरी दस्तावेज दिखाने पड़ते हैं। लेकिन दुनिया में तीन ऐसे शाही व्यक्तित्व हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए व्यक्तिगत पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती। इनमें ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय और जापान के सम्राट नारुहितो तथा महारानी मसाको शामिल हैं।
यह कोई विशेष यात्रा छूट भर नहीं, बल्कि दोनों देशों की संवैधानिक परंपराओं और आधिकारिक कूटनीतिक व्यवस्थाओं से जुड़ा अनोखा मामला है।
ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय को क्यों नहीं चाहिए पासपोर्ट?
ब्रिटेन में पासपोर्ट राजा के नाम पर जारी किए जाते हैं। ब्रिटिश पासपोर्ट में संबंधित अधिकारियों से उसके धारक को स्वतंत्र रूप से यात्रा करने देने और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाता है। यह अनुरोध राजा के नाम से होता है।
इसी व्यवस्था के कारण राजा चार्ल्स तृतीय को खुद ब्रिटिश पासपोर्ट रखने की आवश्यकता नहीं होती। यानी जिस राजकीय पद के नाम पर दूसरे नागरिकों के पासपोर्ट जारी किए जाते हैं, उस पद पर बैठे राजा को अपनी विदेश यात्राओं के लिए व्यक्तिगत पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती।
हालांकि, ब्रिटिश शाही परिवार के दूसरे सदस्यों को पासपोर्ट की आवश्यकता होती है। यह विशेष व्यवस्था राजा के लिए है, पूरे शाही परिवार के लिए नहीं।
जापान के सम्राट और महारानी के लिए अलग नियम
जापान में सम्राट नारुहितो और महारानी मसाको के लिए भी व्यक्तिगत पासपोर्ट जारी नहीं किए जाते। प्रकाशित विवरणों के अनुसार, जापान के विदेश मंत्रालय ने 1971 में यह निर्णय लिया था कि सम्राट और महारानी को पासपोर्ट जारी करना उचित नहीं होगा।
इसके पीछे उनकी संवैधानिक स्थिति और आधिकारिक यात्राओं की विशिष्ट प्रकृति को ध्यान में रखा गया। जापान के सम्राट और महारानी की विदेश यात्राएं सामान्य पर्यटकों की तरह नहीं होतीं, बल्कि राजकीय प्रोटोकॉल और कूटनीतिक समन्वय के तहत आयोजित की जाती हैं।
इस तरह जापान के शाही दंपती को भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए आम नागरिकों की तरह व्यक्तिगत पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती।
क्या तीनों दुनिया में कहीं भी बिना वीजा जा सकते हैं?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। पासपोर्ट की आवश्यकता न होना और किसी भी देश में बिना किसी औपचारिकता के प्रवेश मिल जाना एक ही बात नहीं है।
इन शाही व्यक्तित्वों की विदेश यात्राएं विशेष राजकीय और कूटनीतिक व्यवस्थाओं के तहत होती हैं। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि दुनिया का हर देश उन्हें हर परिस्थिति में बिना किसी शर्त के प्रवेश देने के लिए बाध्य है। यात्रा की व्यवस्था, मेजबान देश के साथ समन्वय और आधिकारिक प्रोटोकॉल अपनी जगह महत्वपूर्ण रहते हैं।
बाकी शाही परिवार के सदस्यों को रखना पड़ता है पासपोर्ट
ब्रिटेन में राजा चार्ल्स तृतीय को मिलने वाली यह विशेष सुविधा दूसरे शाही सदस्यों पर लागू नहीं होती। उन्हें विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट की आवश्यकता होती है। जापान में भी सम्राट और महारानी की विशेष व्यवस्था को पूरे शाही परिवार के लिए सामान्य नियम नहीं माना जा सकता।
नियम अलग, लेकिन वजह है राजकीय पद
ब्रिटेन और जापान की व्यवस्थाएं अलग-अलग हैं। ब्रिटेन में पासपोर्ट राजा के नाम पर जारी होने की परंपरा इस विशेषाधिकार का आधार है, जबकि जापान में सम्राट और महारानी की संवैधानिक स्थिति तथा आधिकारिक यात्राओं की व्यवस्था इसके पीछे है।
दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए पासपोर्ट विदेश यात्रा का अनिवार्य दस्तावेज है, लेकिन इन तीन शाही व्यक्तित्वों के मामले में राजकीय परंपराएं और कूटनीतिक प्रोटोकॉल व्यवस्था को अलग रूप देते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय और जापान के सम्राट नारुहितो व महारानी मसाको का नाम इस अनोखी सूची में शामिल है।



