राष्ट्रीय/न्याय | ABC NATIONAL NEWS | प्रयागराज | 30 अक्टूबर 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट में 27 अक्टूबर को एक पुलिस अधीक्षक (एसपी) के बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद अगले दिन बड़े हंगामे में बदल गया। जस्टिस अजय भनोट की अदालत में हुई इस घटना के बाद अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। 28 अक्टूबर को कोर्ट रूम नंबर 49 में नारेबाजी हुई और वहां रखी कुर्सियों, मेजों तथा अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया गया। घटना के बाद हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यवाही बाधित हुई और मामले ने गंभीर रूप ले लिया। India Today +1
क्या था पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 27 अक्टूबर को जस्टिस अजय भनोट की अदालत में सुनवाई के दौरान एक एसपी अधिवक्ताओं के बैठने वाली पंक्ति में बैठे थे। इसी दौरान एक अधिवक्ता ने उनकी सीट को लेकर आपत्ति जताई और उन्हें पीछे बैठने के लिए कहा।
इस मामले को लेकर अदालत में मौजूद अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (एजीए) ने संबंधित वकील से बात की और बाद में न्यायाधीश के सामने मामला उठाया। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्य न्यायाधीश को भेजे पत्र में कहा कि इसके बाद संबंधित अधिवक्ता को फटकार लगाई गई और जेल भेजने की बात कही गई। बार एसोसिएशन के अनुसार, वकील से पुलिस अधिकारी से माफी भी मंगवाई गई।
बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव के साथ किए गए व्यवहार पर भी आपत्ति जताई। संगठन ने मुख्य न्यायाधीश से मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई की मांग की। Hindustan Times +1
अगले दिन कोर्ट रूम-49 में हंगामा
इस घटनाक्रम के बाद 28 अक्टूबर को अधिवक्ताओं ने जस्टिस अजय भनोट की अदालत के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। जब न्यायमूर्ति अजय भनोट अदालत पहुंचे, तो कुछ वकीलों ने विरोध में नारे लगाए। इसके बाद कोर्ट रूम-49 में हंगामा हुआ और फर्नीचर समेत अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया गया।
उस समय जस्टिस अजय भनोट न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत के साथ पीठ में बैठे थे। घटना के दौरान अदालत परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायाधीश को अदालत से बाहर निकाला गया। Bar and Bench – Indian Legal news +2
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
मामले में न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने दूसरे न्यायालय की कार्यवाही में बाधा पहुंचने पर गंभीर आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि किसी विशेष पीठ को लेकर असहमति होने पर वकीलों को नारेबाजी कर दूसरी अदालतों की कार्यवाही बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को सीसीटीवी फुटेज की जांच कर हंगामे और नारेबाजी में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान करने तथा रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। आदेश में यह भी कहा गया कि पहचान के बाद संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में अनुशासनात्मक कार्रवाई और अवमानना की कार्यवाही के लिए मामला भेजा जा सकता है। अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की गई। Bar and Bench – Indian Legal news +1
29 अक्टूबर को भी जारी रहा विरोध
29 अक्टूबर को भी हाईकोर्ट परिसर में विरोध जारी रहा। एक अन्य आदेश में अदालत ने दर्ज किया कि कुछ वकीलों को अदालत में प्रवेश करने से रोका गया और एक कोर्ट का गेट बाहर से बंद कर दिया गया था। न्यायालय ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से इस मामले को देखने और बार तथा बेंच की गरिमा बनाए रखने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया। Bar and Bench – Indian Legal news
बार और बेंच की गरिमा का सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय के बीच संबंधों, अदालतों में बैठने की व्यवस्था और आपसी सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर बार एसोसिएशन ने अधिवक्ता के साथ हुए व्यवहार पर कार्रवाई की मांग की है, वहीं अदालत ने न्यायिक कार्यवाही बाधित करने और कोर्ट परिसर में हंगामा करने वालों की पहचान कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।
अदालतों में न्यायिक गरिमा और अधिवक्ताओं के सम्मान—दोनों का संरक्षण जरूरी है। किसी शिकायत का समाधान उचित संस्थागत प्रक्रिया से होना चाहिए। विरोध के अधिकार के साथ अदालत की कार्यवाही और परिसर की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।



