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प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट: एक महीने में ही 14 रुपये महंगा, सालभर में 74% उछला भाव

देश में प्याज की औसत कीमत ₹49.59 प्रति किलो पहुंची, कोलकाता और चेन्नई में ₹60 किलो तक दाम; उत्तर भारत के कुछ बाजारों में ₹70 के पार

एग्रीकल्चर/ बिजनेस / महंगाई | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026

रसोई में सब्जियों का स्वाद बढ़ाने वाला प्याज एक बार फिर आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने लगा है। पिछले कुछ दिनों में प्याज की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी ने सरकार से लेकर उपभोक्ताओं तक की चिंता बढ़ा दी है। हालत यह है कि 1 सितंबर 2026 को देशभर में प्याज की औसत खुदरा कीमत ₹49.59 प्रति किलो पहुंच गई, जबकि ठीक एक साल पहले इसी दिन प्याज का औसत भाव ₹28.48 प्रति किलो था। यानी एक साल में प्याज करीब 74 प्रतिशत महंगा हो चुका है।

सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी धीरे-धीरे नहीं, बल्कि पिछले कुछ सप्ताह में अचानक तेज हुई है। 1 अगस्त को देश में प्याज का औसत भाव ₹35.47 प्रति किलो था, जो एक महीने के भीतर बढ़कर लगभग ₹50 प्रति किलो तक पहुंच गया। यानी सिर्फ एक महीने में औसत कीमत में करीब ₹14 प्रति किलो की बढ़ोतरी हो गई।

कोलकाता और चेन्नई में ₹60 किलो, कहीं ₹70 के पार

प्याज की महंगाई का असर अलग-अलग शहरों में अलग-अलग दिखाई दे रहा है। कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में प्याज की कीमत ₹60 प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। वहीं उत्तर भारत के कुछ खुदरा बाजारों में पिछले दो सप्ताह के दौरान प्याज का भाव ₹70 प्रति किलो से भी ऊपर चला गया।

यही अचानक हुई तेज बढ़ोतरी सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है। प्याज रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु है और इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। खासकर कम और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए प्याज की कीमत में लगातार बढ़ोतरी का मतलब है कि महीने के राशन और सब्जियों के बजट में अतिरिक्त दबाव।

आखिर अचानक क्यों महंगा हुआ प्याज?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्याज की कीमतों में सामान्य तौर पर मौसम और फसल के हिसाब से उतार-चढ़ाव होता रहता है, तो इस बार अचानक इतनी तेज बढ़ोतरी क्यों दिखाई दे रही है?

प्याज की कीमत मुख्य रूप से आपूर्ति, मंडियों में आवक, भंडारण और अलग-अलग राज्यों में मांग पर निर्भर करती है। जब बाजार में पर्याप्त प्याज पहुंचता है तो कीमतों पर दबाव कम होता है, लेकिन आवक में कमी आते ही खुदरा बाजार में कीमत बढ़ने लगती है।

इस समय सरकार के सामने चुनौती यह समझने की है कि क्या बाजार में प्याज की वास्तविक कमी पैदा हुई है या फिर आपूर्ति श्रृंखला के किसी हिस्से में रुकावट के कारण कीमत अचानक ऊपर गई है। क्योंकि एक महीने में देश की औसत कीमत का ₹35 से बढ़कर लगभग ₹50 प्रति किलो पहुंचना सामान्य उतार-चढ़ाव से कहीं ज्यादा तेज बदलाव है।

चीनी के बाद प्याज ने बढ़ाई सरकार की चिंता

दिलचस्प बात यह है कि प्याज की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब चीनी की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई है। यानी एक साथ दो रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के महंगे होने से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सरकार के सामने अब यह सवाल है कि कीमतों में यह तेजी आखिर कहां से पैदा हो रही है। अधिकारियों के स्तर पर भी प्याज और चीनी की कीमतों में एक साथ आई तेजी को लेकर कारण तलाशे जा रहे हैं।

प्याज ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसका इस्तेमाल देश के लगभग हर हिस्से में होता है। इसलिए इसकी कीमत में बदलाव केवल किसी एक राज्य या शहर की समस्या नहीं रहता। प्याज महंगा होते ही इसका असर घर की रसोई से लेकर होटल, ढाबे और खाद्य कारोबार तक दिखाई देने लगता है।

क्या सरकार के पास कीमत रोकने का रास्ता है?

प्याज की कीमतों में तेजी के बीच सरकार के सामने सबसे अहम विकल्प बाजार में अतिरिक्त प्याज पहुंचाना और आपूर्ति बढ़ाना होता है। केंद्र के पास बफर स्टॉक भी रहता है, जिसका इस्तेमाल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।

दरअसल, आने वाले दिनों में सरकार के फैसले पर काफी कुछ निर्भर करेगा। अगर बाजार में अतिरिक्त प्याज पहुंचता है और मंडियों में आवक बढ़ती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन अगर आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो खुदरा बाजार में महंगाई और बढ़ सकती है।

सबसे बड़ा सवाल—आम आदमी को राहत कब?

प्याज की कीमतों में 74 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि जिस परिवार को पिछले साल एक किलो प्याज के लिए करीब ₹28 देने पड़ रहे थे, उसे अब वही प्याज औसतन करीब ₹50 में खरीदना पड़ रहा है।

और जहां खुदरा बाजार में कीमत ₹60 या ₹70 के पार जा रही है, वहां स्थिति और गंभीर है।

चीनी के बाद प्याज की कीमत में अचानक उछाल ने महंगाई की चिंता फिर सामने ला दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या आने वाले दिनों में सरकार प्याज की बढ़ती कीमत पर ब्रेक लगा पाएगी, या आम आदमी की रसोई पर महंगाई का बोझ अभी और बढ़ेगा?

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