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ब्रिक्स में गुटेरेस की एंट्री, दिल्ली बनेगी दुनिया की कूटनीतिक राजधानी!

12-13 सितंबर को भारत में होगा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन; पुतिन, पेज़ेश्कियान और शी जिनपिंग समेत कई बड़े नेताओं के पहुंचने की उम्मीद

अंतरराष्ट्रीय / कूटनीति/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026

भारत में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दुनिया की नजरें अब नई दिल्ली पर टिक गई हैं। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ-साथ आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों के भी शामिल होने की उम्मीद है। अब इस सम्मेलन की अहमियत और बढ़ गई है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें हिस्सा लेने वाले हैं।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने 1 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गुटेरेस के ब्रिक्स बैठक में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। हालांकि उन्होंने यह जानकारी ऐसे समय दी है, जब गुटेरेस हाल ही में किर्गिस्तान में हुए शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे नेताओं से संभावित मुलाकातों को लेकर सवालों के घेरे में थे।

12-13 सितंबर को दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता

भारत की अध्यक्षता में होने वाला यह सम्मेलन केवल ब्रिक्स देशों की बैठक नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए दुनिया के कई बड़े मुद्दों पर बातचीत का मंच तैयार होगा। ब्रिक्स में राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक और वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क को तीन प्रमुख आधार माना गया है।

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए देश के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए हैं। सरकार का कहना है कि इन बैठकों का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना तथा व्यावहारिक और विकास आधारित परिणाम हासिल करना है।

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भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का संदेश क्या है?

भारत ने इस साल 1 जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। इस साल ब्रिक्स की स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं, इसलिए 2026 का सम्मेलन संगठन के लिए विशेष महत्व रखता है।

भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए थीम रखी है—‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊपन के लिए निर्माण।’ इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक विकास, तकनीक, पर्यावरण, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना है।

पुतिन और पेज़ेश्कियान भी पहुंचेंगे दिल्ली

ब्रिक्स सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के भी नई दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। यदि ये सभी नेता एक साथ दिल्ली में मौजूद रहते हैं, तो सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व और बढ़ जाएगा।

खास बात यह है कि शी जिनपिंग के ब्रिक्स सम्मेलन के बाद अमेरिका यात्रा करने की भी उम्मीद है, जहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिखर बैठक प्रस्तावित है। ऐसे में दिल्ली में होने वाली बातचीत का असर केवल ब्रिक्स देशों तक सीमित नहीं रह सकता।

गुटेरेस की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होना ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया कई गंभीर संकटों से गुजर रही है। युद्ध, व्यापार तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं।

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गुटेरेस ने हाल ही में किर्गिस्तान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से भी मुलाकात की थी। उन्होंने ईरान और पूरे क्षेत्र में संघर्ष के मानवीय और आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताई तथा संवाद और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात भी कही।

दिल्ली में होने वाली बैठक पर पूरी दुनिया की नजर

ब्रिक्स पिछले दो दशकों में एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में उभरा है। इसके विस्तार के साथ संगठन का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ा है। भारत की अध्यक्षता में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच रिश्ते तेजी से बदल रहे हैं।

ऐसे में दिल्ली में मोदी, पुतिन, शी जिनपिंग, पेज़ेश्कियान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस जैसे नेताओं की मौजूदगी भारत को वैश्विक कूटनीति के केंद्र में ला सकती है।

12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन इसलिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं होगा। यह उस समय दुनिया की बड़ी ताकतों के एक मंच पर आने का मौका होगा, जब वैश्विक राजनीति नए समीकरणों से गुजर रही है। अब देखना होगा कि दिल्ली में होने वाली बातचीत दुनिया को सहयोग, संवाद और नई वैश्विक साझेदारी की दिशा में कितना आगे ले जाती है।

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