राष्ट्रीय / अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026
नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को हिला दिया है। बाढ़ और भूस्खलन के करीब एक सप्ताह बाद भी राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन तबाही का पैमाना हर गुजरते दिन के साथ और भयावह होता जा रहा है। नेपाल पुलिस के अनुसार बुधवार, 2 सितंबर को मृतकों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि 4,858 लोग अब भी लापता हैं। सुरक्षा बलों ने अब तक प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है और हजारों लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
बाढ़ के बाद कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था टूट गई है, सड़कें और पुल बह गए हैं और बड़ी संख्या में गांवों तक पहुंचना अभी भी बेहद मुश्किल बना हुआ है। राहत दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। लगातार बदलते मौसम, नदी का तेज बहाव और भूस्खलन बचाव कार्य को और मुश्किल बना रहे हैं।
चार जिलों से बरामद हुईं सबसे ज्यादा लाशें
नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि आपदा का असर कई जिलों में बेहद व्यापक रहा है।
बचाव अभियान में नेपाल के सुरक्षा बल बड़ी संख्या में जुटे हुए हैं। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है, लेकिन हजारों परिवार अभी भी अपने प्रियजनों की तलाश में हैं। कई लोगों के बारे में जानकारी इसलिए भी नहीं मिल पा रही है क्योंकि बाढ़ ने संचार और सड़क संपर्क को बुरी तरह प्रभावित किया है।
प्रधानमंत्री बोले—जलवायु परिवर्तन से जुड़ी है तबाही
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रासुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी के रास्ते आई विनाशकारी बाढ़ को जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हुए कहा है कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान बढ़ने का असर अब ऐसी आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी एक देश की समस्या नहीं है और आपदा से निपटने की जिम्मेदारी भी वैश्विक है। प्रधानमंत्री के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में तापमान में लगभग 1.8 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इस बदलाव को गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी इस आपदा को जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाले बढ़ते खतरे का “चेतावनी संकेत” बताया है। पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने भी जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय मुद्दों को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की जरूरत बताई है।
क्या आने वाले वर्षों में हिमालय और बड़ी तबाही देखेगा?
संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी कन्नी विग्नाराजा ने हिमालयी क्षेत्र में भविष्य में ग्लेशियल बाढ़ के गंभीर खतरे की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि ग्लेशियरों और हिमनद झीलों से जुड़ी ऐसी घटनाएं आने वाले समय में बड़े नदी तंत्रों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
इसका असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहेगा। हिमालय से निकलने वाली नदियां भारत समेत कई देशों के करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका से जुड़ी हैं। ऐसे में नेपाल की यह त्रासदी पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बन गई है।
भारत ने 163 नागरिकों को सुरक्षित निकाला
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए भारत भी लगातार राहत और बचाव अभियान चला रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 163 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
भारत ने काठमांडू में एक 19 सदस्यीय विशेष फॉरेंसिक टीम भी तैनात की है, जो आपदा में मारे गए लोगों की पहचान की प्रक्रिया में मदद कर रही है। इसके साथ ही भारत की विशेष सुरंग बचाव टीम भी नेपाल के जलविद्युत परियोजना क्षेत्रों में काम कर रही है।
चिलिमे और लांगटांग में भारतीय टीम की बड़ी प्रगति
भारतीय विशेष सुरंग बचाव दल ने चिलिमे और लांगटांग की जलविद्युत परियोजनाओं में महत्वपूर्ण प्रगति की है। चिलिमे में टीम सुरंग के भीतर एक सुरक्षित आधार बनाने में सफल हुई है, जबकि लांगटांग में टीम 185 मीटर तक अंदर पहुंचकर जांच कर चुकी है।
मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों, बेहद संकरे रास्तों, कीचड़ और विशेष उपकरणों के इस्तेमाल में आ रही दिक्कतों के बावजूद भारतीय टीम नेपाल की सेना के साथ मिलकर अभियान चला रही है।
तिब्बत में भी राहत अभियान तेज
नेपाल से लगी तिब्बत सीमा पर भी बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। चीन ने ग्यिरोंग सीमा चौकी तक पहुंचने वाली मुख्य सड़क को फिर से खोल दिया है। बाढ़ के कारण यह सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।
सड़क खुलने के बाद भारी मशीनों को आपदा प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाना संभव हुआ है। चीन की ओर से सैनिक और बचाव दल जीवन का पता लगाने वाले उपकरणों और खोजी कुत्तों की मदद से नदी किनारे, घाटियों और क्षतिग्रस्त सड़क क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। चीन के अनुसार झीलों से जुड़े तत्काल खतरे कम हुए हैं, लेकिन भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है।
करीब 590 विदेशी नागरिक अभी भी लापता
नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 324 विदेशी नागरिकों को बचाया गया है, जबकि 39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि पहले लापता बताए गए कुछ विदेशी पर्यटकों ने हाल के दिनों में फोन या ईमेल के जरिए अधिकारियों से संपर्क किया है।
इससे यह उम्मीद भी जगी है कि लापता लोगों की वास्तविक संख्या आगे की जांच और संपर्क बहाल होने के साथ बदल सकती है।
बिहार में अजीब मछलियों को लेकर भी चेतावनी
नेपाल की बाढ़ का असर भारत के बिहार तक भी पहुंचा है। बिहार सरकार ने नेपाल से आने वाले बाढ़ के पानी में पकड़ी गई अनजान और असामान्य दिखने वाली मछलियों को नहीं खाने और न खरीदने-बेचने की सलाह दी है।
पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, बगहा और सारण से बड़ी और अलग दिखने वाली मछलियां मिलने की जानकारी सामने आई है। कुछ लोगों ने इन्हें खाने के बाद तबीयत खराब होने की बात कही है, हालांकि इसका सीधा संबंध मछली से अभी स्थापित नहीं हुआ है। बाढ़ के पानी में इंसानों और जानवरों के सड़े हुए शव दिखाई देने की बातें भी सामने आई हैं, इसलिए प्रशासन ने अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है।
नेपाल के अरबपति ने भारत की तारीफ की
नेपाल के अरबपति और समाजसेवी बिनोद चौधरी ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आपदा के दौरान तेज प्रतिक्रिया की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस आपदा का पैमाना उनकी कल्पना से भी कहीं बड़ा है।
उनके अनुसार गांव, बाजार, स्कूल और पुल तक बह गए हैं और 500 मेगावाट से ज्यादा बिजली उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है। उन्होंने पुनर्निर्माण के काम को बेहद बड़ा और चुनौतीपूर्ण बताया।
एक सप्ताह बाद भी खत्म नहीं हुई त्रासदी
नेपाल की यह आपदा अब केवल राहत और बचाव का मामला नहीं रह गई है। 1,127 मौतें, 4,858 लोग लापता और हजारों लोग विस्थापित—ये आंकड़े हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक जोखिम की गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या यह त्रासदी आने वाले वर्षों के लिए एक बड़ी चेतावनी है? अगर हिमालय में तापमान लगातार बढ़ता रहा, ग्लेशियर और हिमनद झीलें अस्थिर होती रहीं और नदी घाटियों में आबादी तथा बुनियादी ढांचा बढ़ता रहा, तो क्या नेपाल के साथ भारत के हिमालयी और मैदानी इलाकों को भी ऐसी आपदाओं के लिए अपनी तैयारी पूरी तरह बदलनी होगी?
नेपाल में बचाव अभियान जारी है, लेकिन इस जलप्रलय ने पूरे हिमालय के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—क्या अब आपदा आने का इंतजार करने के बजाय उससे पहले तैयारी करने का समय आ गया है?




