राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 अगस्त 2026
सीमा पर संवाद बढ़ाने की कोशिश
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर बातचीत और जमीन पर सतर्कता दोनों जारी हैं। 25वीं Special Representatives वार्ता के बाद 26 अगस्त को जारी आठ सूत्रीय दस्तावेज में दोनों देशों ने दो अतिरिक्त बैठक बिंदु स्थापित करने पर सहमति जताई। इन स्थानों पर General-level या Senior Highest Military Commander-level बैठकें हो सकेंगी। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन की ओर से वांग यी ने वार्ता में हिस्सा लिया।
नए BPM प्वाइंट का मकसद सीमा पर किसी स्थानीय विवाद, आमने-सामने की स्थिति या गलतफहमी को बड़ा संकट बनने से पहले सीधे सैन्य संवाद के जरिए संभालना है।
अभी पांच BPM प्वाइंट मौजूद
फिलहाल भारत-चीन सीमा पर पांच Border Personnel Meeting प्वाइंट हैं। इनमें लद्दाख में Daulat Beg Oldie और Chushul, सिक्किम में Nathu La तथा अरुणाचल प्रदेश में Kibithu और Bum La शामिल हैं।
BPM व्यवस्था लंबे समय से दोनों देशों के स्थानीय सैन्य अधिकारियों के बीच संवाद का माध्यम रही है। रक्षा मंत्रालय भी इसे LAC पर स्थानीय मुद्दों के समाधान और सीमा सुरक्षा बलों के बीच विश्वास बढ़ाने का महत्वपूर्ण तंत्र मानता रहा है। संवेदनशील सीमा परिस्थितियों में ऐसे सीधे संपर्क के अतिरिक्त माध्यम काफी अहम हो जाते हैं।
Kepang La पर क्यों है खास नजर
नए BPM प्वाइंट के स्थानों की अंतिम घोषणा अभी बाकी है। हालांकि सरकारी सूत्रों के अनुसार अरुणाचल प्रदेश के Upper Siang जिले के Tuting क्षेत्र में स्थित Kepang La पर चर्चा हुई है।
सूत्रों के मुताबिक पिछले एक साल में यहां दोनों देशों के स्थानीय कमांडरों के बीच कम से कम दो बैठकें हो चुकी हैं। करीब एक साल पहले चीनी PLA की ओर से Kepang La को झंडा बैठकों और अन्य उच्चस्तरीय सैन्य संवाद के लिए आपसी सहमति वाले बैठक स्थल के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया गया था। हालांकि इसे औपचारिक BPM प्वाइंट बनाने पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाला इलाका
Kepang La का महत्व केवल सैन्य नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह क्षेत्र सीमा के दोनों ओर रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक महत्व रखता है। यहां Chorten नामक बौद्ध धार्मिक स्थल भी है, जहां स्थानीय लोगों को जाने की अनुमति है।
इतिहास में भी यह दर्रा संवेदनशील रहा है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीनी सैनिकों ने Kepang La का इस्तेमाल भारत में प्रवेश के लिए किया था। उस संघर्ष में कम से कम 11 भारतीय सैनिकों के मारे जाने का उल्लेख सामने आया है।
भारत-चीन के बीच 3,488 किमी की सीमा
भारत और चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी भूमि सीमा है, जो लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैली है। सीमा के कई हिस्सों पर दोनों देशों की धारणा अलग-अलग है और कई क्षेत्रों में वास्तविक सीमांकन अभी स्पष्ट नहीं है।
यही वजह है कि LAC पर गश्त और सीमा की धारणा को लेकर कई बार तनाव पैदा होता रहा है। ऐसे में स्थानीय कमांडरों के बीच सीधा संपर्क किसी छोटी घटना को बड़े टकराव में बदलने से रोकने में मदद कर सकता है। हालांकि BPM प्वाइंट बढ़ाना सीमा विवाद के समाधान के बराबर नहीं है। सीमा निर्धारण का मुद्दा इससे अलग और कहीं अधिक जटिल है।
अरुणाचल में चीनी गतिविधियों को लेकर चिंता
इसी बीच अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में चीनी गतिविधियों को लेकर नई चिंताएं भी सामने आई हैं। People’s Party of Arunachal (PPA) की एक तथ्य-जांच समिति ने Upper Subansiri जिले के Taksing क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के आरोप लगाए हैं।
समिति ने इन गतिविधियों को कथित तौर पर धीरे-धीरे और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने वाला बताया तथा LAC पर सालभर भारतीय गश्त की कमी को चिंता का विषय बनाया। हालांकि भारतीय सेना ने इन आरोपों से इनकार किया है। इसलिए इन दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
Taksing को लेकर समिति का दावा
पूर्व मंत्री और PPA के मुख्य सलाहकार Kahfa Bengia की अध्यक्षता वाली समिति ने 10 जुलाई को Taksing का दौरा किया था। समिति ने स्थानीय लोगों और वहां तैनात सेना के जवानों से बातचीत की।
रिपोर्ट में Shera-5 Point का भी उल्लेख है। स्थानीय लोगों के हवाले से समिति ने दावा किया कि 2023 में Arunachal Scouts और PLA के बीच हुई भिड़ंत के बाद भारतीय सैनिक पीछे हटे और इसके बाद भारतीय गश्ती दलों के लिए वहां पहुंचना मुश्किल हो गया। हालांकि Army sources ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ऐसे संवेदनशील दावों में वास्तविक स्थिति जानने के लिए लगातार निगरानी और आधिकारिक सत्यापन बेहद जरूरी है।
सालभर निगरानी बड़ी चुनौती
समिति ने मौसमी गश्त को भी चिंता का विषय बताया है। रिपोर्ट के अनुसार कठोर सर्दियों के कारण भारतीय गश्त मुख्य रूप से अप्रैल से अक्टूबर के बीच सीमित रहती है, जबकि चीनी गतिविधियां पूरे साल जारी रहने का दावा किया गया है।
संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में लंबे समय तक निगरानी कमजोर रहने से गतिविधियों पर नजर रखना कठिन हो सकता है। इसलिए सीमा पर सड़क, संचार, सैनिकों की पहुंच और निगरानी प्रणालियों को सालभर मजबूत रखना रणनीतिक जरूरत है।
संवाद भी, सतर्कता भी
भारत-चीन सीमा की मौजूदा स्थिति साफ संकेत देती है कि सिर्फ बातचीत या सिर्फ सैन्य ताकत—किसी एक के भरोसे सीमा पर स्थायी शांति संभव नहीं है। कूटनीतिक संवाद जारी रहना जरूरी है, लेकिन जमीन पर मजबूत निगरानी, बेहतर बुनियादी ढांचा और सैनिकों की त्वरित पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
दो नए BPM प्वाइंट की सहमति संवाद को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम है। लेकिन भारत को LAC पर अपनी निगरानी क्षमता और रणनीतिक तैयारियों को लगातार मजबूत रखना होगा।
सीमा पर शांति के लिए संवाद जरूरी है, लेकिन शांति की सबसे मजबूत नींव सतर्कता, तैयारी और स्पष्ट संचार से ही बनती है।




