Home » International » नेपाल में बाढ़ की तबाही: 3 हजार से ज्यादा लापता, 670 से अधिक मौतें; 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी भी गुम

नेपाल में बाढ़ की तबाही: 3 हजार से ज्यादा लापता, 670 से अधिक मौतें; 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी भी गुम

नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद चौथे दिन भी बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान जारी है। हजारों लोग अब भी लापता हैं, जबकि दूरदराज के इलाकों में फंसे हाइड्रोपावर कर्मचारियों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 अगस्त 2026

तबाही के चौथे दिन भी नहीं थमा संकट

नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। बचाव अभियान चौथे दिन भी जारी है, लेकिन हजारों लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार नेपाल में 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,498 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी कम से कम सात मौतों की जानकारी सामने आई है। हालात इतने गंभीर हैं कि नेपाल के अधिकारी बरामद हो रहे शवों की बढ़ती संख्या को संभालने में भी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। कई परिवार अस्पतालों और शवगृहों के बाहर अपने रिश्तेदारों की तलाश में लगातार इंतजार कर रहे हैं।

करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता

इस आपदा का सबसे चिंताजनक पहलू नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर पर पड़ा असर है। देश के स्वतंत्र बिजली उत्पादकों के संगठन से मिले आंकड़ों के मुताबिक करीब 898 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है जो नदी घाटियों में स्थित निर्माण स्थलों और सुरंगों में काम कर रहे थे। अचानक आई बाढ़ ने इन इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया और कई कर्मचारी सुरंगों तथा निर्माण स्थलों के भीतर फंस गए। अब नेपाल ने सुरंगों में बचाव अभियान के लिए भारत और चीन से विशेषज्ञ मदद मांगी है। दोनों देशों की टीमें नेपाल पहुंच चुकी हैं और फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

12 बिजली परियोजनाएं बंद, 15 निर्माणाधीन परियोजनाएं प्रभावित

बाढ़ ने नेपाल के तेजी से बढ़ते बिजली क्षेत्र को भी बड़ा झटका दिया है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार कम से कम 12 हाइड्रोपावर परियोजनाएं बंद हो गई हैं, जबकि निर्माणाधीन 15 परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें से कई परियोजनाएं नेपाल-चीन सीमा के पास दूरदराज की नदी घाटियों में स्थित हैं। इन इलाकों में सड़क और पुल भी बाढ़ तथा मलबे से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसका सीधा असर राहत और बचाव अभियान पर पड़ रहा है, क्योंकि कई स्थानों तक जमीन के रास्ते पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।

ALSO READ  नाइजीरिया में 11 भारतीय नाविक दोषी करार, जहाज पर 53 लाख डॉलर का जुर्माना; कोकीन तस्करी मामले में बड़ा फैसला

हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया

बचाव अभियान में नेपाल की सेना की बड़ी भूमिका है। नेपाल सेना के अनुसार अब तक 2,650 लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 216 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। करीब 200 लोगों को जमीन के रास्ते बचाया गया है। राहत, चिकित्सा और खोज अभियान के लिए लगभग 8,300 नेपाली सेना के जवान तैनात किए गए हैं। कई दूरदराज के इलाकों में हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत पहुंचाई जा रही है। हालांकि लगातार खराब मौसम और कुछ इलाकों में फिर से तेज बारिश की आशंका ने बचाव अभियान को और कठिन बना दिया है।

भारत और चीन ने बढ़ाया मदद का हाथ

नेपाल के लिए इस मुश्किल घड़ी में भारत और चीन दोनों ने सहायता बढ़ाई है। नेपाल सरकार के अनुरोध पर दोनों देशों से विशेषज्ञ और बचावकर्मी पहुंचे हैं। खासतौर पर सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत है। चीन की ओर से सुरंग बचाव में विशेषज्ञ टीम भेजी गई है, जबकि भारत की सहायता भी बचाव अभियान में शामिल है। नेपाल के विदेश मंत्री ने दोनों पड़ोसी देशों की मदद को मित्र देशों की ओर से मिली विशेष और जरूरी सहायता बताया है। ऐसे समय में सीमा से ऊपर उठकर मानवीय आधार पर किया जा रहा क्षेत्रीय सहयोग हजारों जिंदगियां बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

मलबे में बदल गए घर और गांव

बाढ़ का असर केवल बिजली परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा। नेपाल के कई गांवों और कस्बों में घर मलबे में बदल गए हैं। कुछ इलाकों में जमीन पर कई फीट तक कीचड़ जमा है। बिजली के तार टूटे पड़े हैं और सड़कें तथा पुल बह गए हैं। स्थानीय लोगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे दोबारा अपना जीवन कहां से शुरू करेंगे। एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि उसने घर की बालकनी से पानी को सुनामी की तरह गांव की ओर आते देखा और जान बचाने के लिए केवल चप्पल और एक टी-शर्ट लेकर भाग सका। उसके घर का निचला हिस्सा करीब दो फीट तक कठोर कीचड़ और मलबे से भर गया। उसके मुताबिक अब वहां दोबारा रहना संभव नहीं है और परिवार को सब कुछ शून्य से शुरू करना होगा।

ALSO READ  ईरान-अमेरिका वार्ता में प्रगति का दावा, लेकिन समझौते पर अभी भी सस्पेंस

परिवारों की आंखें अपनों की तलाश में

इस आपदा का सबसे दर्दनाक चेहरा उन परिवारों में दिखाई दे रहा है जो अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। काठमांडू के अस्पतालों और शवगृहों में लोग लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें और पहचान संबंधी जानकारी लेकर पहुंच रहे हैं। नेपाल के अलावा अमेरिका और दूसरे देशों में रहने वाले परिवार भी अपनों की जानकारी के लिए बेचैन हैं। अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में रहने वाले एक नेपाली परिवार ने बताया कि उनका एक रिश्तेदार बाढ़ में बह गया और अब तक उसका कोई पता नहीं है। दूसरी ओर अमेरिका के न्यू जर्सी से नेपाल धार्मिक यात्रा पर पहुंचे एक दंपति के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि उनका नौ साल का बच्चा भारत में सुरक्षित रिश्तेदारों के पास है।

एक छोटी-सी गुड़िया ने बयां की तबाही

नेपाल-चीन सीमा पर बचाव अभियान के दौरान कीचड़ में मिली एक छोटी खरगोश की गुड़िया ने इस आपदा की भयावहता को बेहद मार्मिक तरीके से सामने रखा है। चीनी सीमा क्षेत्र में मिले इस खिलौने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ अपने साथ लोगों के घरों और निजी सामान को कितनी दूर तक बहाकर ले गई। जहां कभी परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी थी, वहां अब कीचड़, मलबा और तेज बहता पानी दिखाई दे रहा है। यह छोटी-सी गुड़िया उन हजारों परिवारों की कहानी का प्रतीक बन गई है जिनकी जिंदगी कुछ घंटों में पूरी तरह बदल गई।

हिमालयी आपदा से बड़ा सवाल

नेपाल की यह त्रासदी केवल एक देश की आपदा नहीं है। हिमालय से निकलने वाली नदियां कई देशों की जिंदगी से जुड़ी हैं और एक देश में होने वाली बड़ी प्राकृतिक घटना का असर दूसरे देशों तक पहुंच सकता है। जलवायु परिवर्तन, भारी बारिश, ग्लेशियरों में बदलाव, भूस्खलन और संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में बढ़ते निर्माण ने जोखिम को और गंभीर बनाया है। इस आपदा ने एक बार फिर दिखाया है कि हिमालयी क्षेत्र में समय पर चेतावनी, साझा मौसम और नदी संबंधी डेटा, मजबूत आपदा प्रबंधन और भारत-नेपाल-चीन सहित पड़ोसी देशों के बीच बेहतर सहयोग कितना जरूरी है। अभी सबसे पहली प्राथमिकता हर संभव तरीके से लापता लोगों को खोजने और जीवित बचे लोगों तक राहत पहुंचाने की है, लेकिन इसके बाद पूरे हिमालयी क्षेत्र में भविष्य की ऐसी आपदाओं से निपटने की तैयारी पर भी गंभीरता से काम करना होगा।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted