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तारापीठ के होटल में भीषण आग, 7 की मौत; 22 लोगों को बचाया गया, शॉर्ट सर्किट से आग लगने का प्रारंभिक अनुमान

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तारापीठ (पश्चिम बंगाल) | 17 अगस्त 2026

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल तारापीठ में सोमवार तड़के एक निजी होटल में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा कर दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। आग इतनी तेजी से फैली कि होटल में सो रहे लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। दमकलकर्मियों और पुलिस की टीम ने अभियान चलाकर करीब 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह बिजली के शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा है, हालांकि अंतिम कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

सुबह करीब पांच बजे होटल में मची अफरा-तफरी

हादसा सोमवार सुबह करीब 5 बजे हुआ, जब होटल की अधिकांश मंजिलों पर लोग सो रहे थे। शुरुआती आकलन के अनुसार आग होटल के ग्राउंड फ्लोर से शुरू हुई और देखते ही देखते आसपास के हिस्सों में फैल गई। होटल तारापीठ पुलिस स्टेशन के पास स्थित बताया गया है। आग की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस तथा दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं।

सुबह का समय होने के कारण होटल में मौजूद अधिकांश लोग नींद में थे। ऐसे में आग और धुएं के तेजी से फैलने ने बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। दमकलकर्मियों ने अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया और करीब 22 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।

सात लोगों की मौत, कई की हालत गंभीर

इस अग्निकांड में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। अधिकारियों की ओर से मृतकों और घायलों की विस्तृत पहचान तथा उनकी स्थिति को लेकर आगे की जानकारी जुटाई जा रही है।

हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। तारापीठ एक प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में तीर्थयात्रियों के ठहरने वाले होटलों में सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन मानकों को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

शॉर्ट सर्किट से आग लगने का प्रारंभिक अनुमान

फायर विभाग के शुरुआती आकलन के मुताबिक आग इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट के कारण लगी हो सकती है। हालांकि इसे अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। आग के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए घटनास्थल की जांच, विद्युत व्यवस्था, वायरिंग और होटल में मौजूद अग्नि सुरक्षा उपकरणों की स्थिति की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

यह भी जांच का विषय होगा कि होटल में अग्निशमन की पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं, आपातकालीन निकास की स्थिति कैसी थी और आग लगने की स्थिति में होटल प्रबंधन ने निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया या नहीं।

पुलिस और दमकल की टीमों ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने के साथ-साथ होटल में फंसे लोगों को बाहर निकालने पर प्राथमिकता दी। करीब 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतकों और घायलों की सही संख्या तथा पहचान की पुष्टि करने के साथ-साथ आग के कारणों की विस्तृत जांच करना है। होटल की इमारत और सुरक्षा व्यवस्था का भी परीक्षण किया जा सकता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे को रोकने या उसके प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक इंतजाम मौजूद थे या नहीं।

तीर्थस्थल के होटलों की सुरक्षा पर फिर सवाल

तारापीठ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर होटल में हुआ यह हादसा केवल एक इमारत में लगी आग का मामला नहीं है। यह तीर्थस्थलों पर होटल, धर्मशाला और अन्य ठहरने वाली जगहों में फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकासी व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा की जरूरत भी सामने लाता है।

अब सवाल यह है कि होटल में अग्निशमन उपकरण कितने प्रभावी थे, आपातकालीन निकास कितने सुलभ थे और विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच की जाती थी या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा केवल विद्युत खराबी का परिणाम था या सुरक्षा व्यवस्था में भी कोई गंभीर कमी रही।

प्रशासन और बचाव एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। सात लोगों की मौत ने पूरे तारापीठ को झकझोर दिया है। हादसे की विस्तृत जांच के बाद ही आग की वास्तविक वजह और संभावित लापरवाही की तस्वीर पूरी तरह सामने आ सकेगी।

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