कृषि/ राष्ट्रीय/ तमिलनाडु | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 17 अगस्त 2026
तमिलनाडु के किसानों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सहकारी बैंकों से लिए गए ₹75,000 तक के फसल ऋण को पूरी तरह माफ करने की घोषणा की है। सरकार के मुताबिक इस फैसले से राज्य के करीब 14.43 लाख किसान लाभान्वित होंगे। यह फैसला किसानों को कर्ज के दबाव से राहत देने और आगामी खेती के मौसम में उन्हें दोबारा संस्थागत ऋण लेने में मदद करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार के संशोधित कर्जमाफी पैकेज के तहत 1 मई 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच सहकारी बैंकों से लिए गए पात्र फसल ऋण पर राहत दी जाएगी। जिन किसानों का संबंधित फसल ऋण ₹75,000 या उससे कम है, उनके लिए पूरी राशि माफ करने का प्रावधान है। सरकार ने यह फैसला किसानों और किसान संगठनों की ओर से कर्जमाफी की सीमा बढ़ाने की मांग के बाद लिया।
इस फैसले की खास बात यह है कि राहत केवल सीमांत और छोटे किसानों तक सीमित नहीं रखी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार सीमांत, छोटे और अन्य श्रेणी के किसानों को भी पात्रता के आधार पर इसका लाभ मिलेगा। करीब 14,43,504 किसान इस संशोधित योजना के दायरे में आएंगे। इनमें बड़ी संख्या उन किसानों की है जिन्होंने सहकारी बैंकों के माध्यम से खेती के लिए फसल ऋण लिया था।
सरकार ने ₹75,000 से अधिक का फसल ऋण लेने वाले किसानों के लिए भी राहत का प्रावधान किया है। ऐसे किसानों को ₹35,000 की कर्ज राहत दी जाएगी। यानी सरकार ने केवल एक निश्चित सीमा तक का पूरा कर्ज माफ करने के बजाय अधिक ऋण लेने वाले किसानों को भी आंशिक राहत देने की व्यवस्था की है। इससे योजना का दायरा काफी व्यापक हो गया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस योजना का वित्तीय आकार भी बड़ा है। उपलब्ध सरकारी विवरण के मुताबिक कुल करीब ₹5,932.23 करोड़ के फसल ऋण पर राहत दी जाएगी। इनमें ₹75,000 तक के ऋण वाले किसानों के लगभग ₹3,058.06 करोड़ के ऋण पूरी तरह माफ किए जाएंगे, जबकि ₹75,000 से अधिक ऋण लेने वाले किसानों के लिए ₹35,000 की राहत का प्रावधान है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसानों के लिए खेती की लागत लगातार एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों की लागत के बीच फसल ऋण किसानों के लिए खेती जारी रखने का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में कर्ज के एक हिस्से या पूरी राशि से राहत मिलने पर किसानों के पास अगली फसल के लिए संसाधन जुटाने की बेहतर गुंजाइश बन सकती है।
सरकार के अनुसार इस राहत का एक उद्देश्य यह भी है कि कर्जमाफी का लाभ पाने वाले किसान आगामी खेती के मौसम के लिए फिर से संस्थागत ऋण प्राप्त कर सकें। यानी सरकार इसे केवल तत्काल आर्थिक राहत के तौर पर नहीं बल्कि किसानों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़े रखने के उपाय के रूप में भी देख रही है।
यह योजना पहले घोषित व्यवस्था का विस्तारित रूप है। इससे पहले सरकार ने सहकारी बैंकों से लिए गए ₹50,000 तक के कुछ फसल ऋण के लिए राहत का ऐलान किया था। किसानों और विभिन्न संगठनों की मांग के बाद सरकार ने इसकी समीक्षा की और पूरी कर्जमाफी की सीमा बढ़ाकर ₹75,000 कर दी। संशोधित योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ी है और राज्य के खजाने पर वित्तीय भार भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है।
हालांकि, इतनी बड़ी कर्जमाफी का राज्य के वित्त पर असर भी महत्वपूर्ण होगा। करीब ₹5,932 करोड़ की देनदारी को राज्य सरकार को वहन करना होगा। इसलिए इस फैसले का राजनीतिक महत्व जितना है, उतना ही आर्थिक महत्व भी है। सरकार को एक तरफ किसानों को राहत देनी है, तो दूसरी तरफ राज्य के वित्तीय संसाधनों और भविष्य के बजट पर इसके प्रभाव को भी संभालना होगा।
किसानों के लिए संदेश साफ है—₹75,000 तक के पात्र सहकारी फसल ऋण पर पूरी राहत और उससे अधिक ऋण पर ₹35,000 तक की राहत। सरकार के इस फैसले से लाखों किसानों को तत्काल आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि कर्जमाफी की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और पात्र किसानों तक इसका लाभ कब तक पहुंचता है।




