राष्ट्रीय/कानून | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अगस्त 2026
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को कथित आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन आदेशों को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिनमें CBI और प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को उनके खिलाफ लगाए गए संपत्ति संबंधी आरोपों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए थे। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने फिलहाल CBI और ED को हाईकोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने का निर्देश दिया है।
राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी गई है, जिनके तहत उनके खिलाफ लगाए गए कथित आय से अधिक संपत्ति के आरोपों के सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया था। इसके साथ ही राहुल गांधी ने एक अलग ट्रांसफर याचिका भी दाखिल की है, जिसमें इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए जांच एजेंसियों को फिलहाल हाईकोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट दाखिल करने से रोक दिया। इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की चुनौती पर आगे सुनवाई होने तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष CBI और ED की रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया पर फिलहाल विराम रहेगा।
कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह मामला कर्नाटक के रहने वाले BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की शिकायत से शुरू हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में कथित तौर पर अधिक संपत्ति है। शिकायतकर्ता ने संबंधित जांच एजेंसियों से इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
इसी शिकायत से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई में निर्देश दिया था कि यदि शिकायत प्राप्त हुई है तो उसमें लगाए गए आरोपों का कानून के अनुसार सत्यापन किया जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि सत्यापन के परिणाम के आधार पर CBI या ED कानून के तहत उचित कदम उठा सकती हैं। जांच की प्रगति से हाईकोर्ट को अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए थे।
हालांकि, बाद की सुनवाई में हाईकोर्ट ने CBI की ओर से दाखिल जवाब पर असंतोष जताया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि CBI के जवाब से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि मामले में जांच के स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने CBI को नया जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि इसमें जांच की प्रगति को स्पष्ट रूप से बताया जाए।
CBI के जवाब पर हाईकोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?
इलाहाबाद हाईकोर्ट में CBI की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट की समीक्षा के दौरान अदालत ने पाया कि जवाब उसके पहले के निर्देशों के अनुरूप स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा था। अदालत के अनुसार, दाखिल जवाब से जांच की वास्तविक स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों को समझना मुश्किल था।
इसके बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि CBI की ओर से नया हलफनामा ज्वाइंट डायरेक्टर या ACHQ जोन, नई दिल्ली के हेड ऑफ जोन के स्तर के अधिकारी द्वारा दाखिल किया जाए। इसमें जांच में अब तक हुई प्रगति और उठाए गए कदमों का स्पष्ट विवरण देने को कहा गया था।
ED के जवाब पर हाईकोर्ट का रुख अलग रहा
CBI के जवाब पर सवाल उठाने के विपरीत हाईकोर्ट ने ED की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट को लेकर अलग रुख अपनाया था। अदालत ने माना था कि ED ने शिकायत से संबंधित आवश्यक कदम उठाए हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि जांच के दौरान ED को कोई ऐसी सामग्री या दस्तावेज मिलते हैं, जिनसे किसी गलत काम या गैरकानूनी गतिविधि का संकेत मिलता है, तो एजेंसी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है। यानी ED को केवल शिकायत के स्तर तक सीमित रहने के बजाय जांच में सामने आने वाली सामग्री के आधार पर वैधानिक कार्रवाई का अधिकार बरकरार रखा गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश के बाद फिलहाल मामले की दिशा बदल गई है। CBI और ED को हाईकोर्ट के समक्ष रिपोर्ट दाखिल करने से रोक दिया गया है और राहुल गांधी की चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट अब आगे सुनवाई करेगा। साथ ही राहुल गांधी की उस अलग याचिका पर भी आगे प्रक्रिया होगी, जिसमें उन्होंने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी करना या फिलहाल रिपोर्ट दाखिल करने पर रोक लगाना राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही या गलत साबित करने वाला अंतिम फैसला नहीं है। इसी तरह, कथित आय से अधिक संपत्ति के आरोप भी अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। मामले में आगे की सुनवाई और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राहुल गांधी को एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत जरूर मिली है। अब मामला सीधे देश की सर्वोच्च अदालत के सामने है और अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है तथा जांच एजेंसियों की कार्रवाई किस सीमा तक आगे बढ़ेगी।
यानी फिलहाल सवाल सिर्फ CBI और ED की जांच का नहीं, बल्कि यह भी है कि राहुल गांधी के खिलाफ शुरू हुई इस न्यायिक प्रक्रिया की अगली दिशा क्या होगी। सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश ने हाईकोर्ट के सामने चल रही प्रक्रिया को फिलहाल थाम दिया है और अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है।




