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मुकुल रॉय अयोग्य—हाई कोर्ट के फैसले से बंगाल की सियासत में भूचाल”

अरिंदम चटर्जी | कोलकाता 13 नवंबर 2025

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा कानूनी झटका लगा, जब कोलकाता हाई कोर्ट की दो- जजों की बेंच ने वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय को विधेयक-विरोधी (Anti-Defection) कानून के तहत MLA पद से अयोग्य घोषित कर दिया। यह फैसला उस समय आया जब रॉय ने BJP छोड़कर TMC का दामन थाम लिया था—और इसी आधार पर उनके विरुद्ध दायर अयोग्यता याचिकाओं पर स्पीकर बिमान बनर्जी ने कोई निर्णय नहीं दिया था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्पीकर ने अपने संवैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन किया और मामले को अनावश्यक रूप से लंबा खींचा।

इस ऐतिहासिक आदेश में हाई कोर्ट की बेंच—जस्टिस देबांग्सु बसाक और जस्टिस शब्बार रशीदी—ने स्पीकर के उस निर्णय को रद्द कर दिया जिसमें उन्होंने मुकुल रॉय को अयोग्य ठहराने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) के तहत दलबदल कानून का पालन करना संसद और विधानसभा की गरिमा के लिए अत्यंत आवश्यक है। अदालत ने यह भी माना कि स्पीकर का रवैया इस मामले में पक्षपातपूर्ण और संवैधानिक जिम्मेदारियों के विपरीत था। फैसले के बाद मुकुल रॉय की कृष्णनगर उत्तर सीट अब खाली हो गई है, और यहाँ जल्द उपचुनाव की संभावना है।

यह फैसला एक ऐसे समय आया है जब बंगाल की राजनीति पहले ही TMC और BJP के टकराव से गरमाई हुई है। BJP के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी, जिन्होंने मुकुल रॉय के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की थी, ने इसे एक “ऐतिहासिक विजय” बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ कानून की जीत है बल्कि यह साबित करता है कि लोकतंत्र में अंततः **सत्य की ही जीत होती है, भले ही देर से हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर ने बेहद पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और उनकी याचिका पर फैसला जानबूझकर रोका गया। सुवेंदु ने ट्वीट में लिखा कि अदालत ने न सिर्फ मुकुल रॉय को अयोग्य ठहराया है बल्कि स्पीकर के व्यवहार को भी संवैधानिक नैतिकता के विपरीत बताया है।

अदालत के इस निर्णय ने राज्य में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है। उपचुनाव की संभावना और TMC की प्रतिक्रिया पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह फैसला 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले माहौल में नया मोड़ ला सकता है। साथ ही, यह दलबदल विरोधी कानून को लेकर एक मजबूत मिसाल भी स्थापित करता है, जिससे देशभर में विधायकों के दलबदल मामलों पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल अदालत के इस निर्णय के बाद बंगाल की राजनीति में तनाव और तेज होने की संभावना है। BJP ने इसे अपनी नैतिक जीत बताया है, जबकि TMC इस फैसले पर आगे कानूनी विकल्प तलाश सकती है। मुकुल रॉय की अयोग्यता ने बंगाल की सियासत में एक और बड़ा मोड़ जोड़ दिया है और आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल और बढ़ने के आसार हैं।

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