राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तिरुवनंतपुरम | 4 जून 2026
आखिरकार केरल पहुंचा दक्षिण – पश्चिम मानसून
देशभर में बेसब्री से प्रतीक्षित दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार, 4 जून 2026 को केरल में आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि मानसून अब केरल के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है और आगे तेजी से देश के अन्य क्षेत्रों की ओर बढ़ेगा। हालांकि इस बार मानसून का आगमन सामान्य तिथि 1 जून से तीन दिन और IMD के अपने पूर्वानुमान से चार दिन देर से हुआ है।
IMD का पूर्वानुमान पहली बार बड़ी चूक का शिकार
इस वर्ष 15 मई को IMD ने अनुमान लगाया था कि मानसून 26 मई के आसपास केरल पहुंचेगा। मौसम विभाग ने अपने मॉडल की संभावित त्रुटि सीमा प्लस-माइनस चार दिन बताई थी। इसका अर्थ था कि मानसून 22 मई से 30 मई के बीच कभी भी आ सकता था। लेकिन वास्तविक आगमन 4 जून को हुआ, जो विभाग की निर्धारित त्रुटि सीमा से भी चार दिन आगे निकल गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2015 के बाद यह पहला अवसर है जब IMD का मानसून आगमन संबंधी पूर्वानुमान अपनी घोषित त्रुटि सीमा से भी बाहर चला गया है।
किसानों और अर्थव्यवस्था की नजर मानसून पर
भारत की कृषि व्यवस्था का बड़ा हिस्सा अब भी मानसून पर निर्भर है। ऐसे में मानसून के आगमन में देरी ने किसानों, कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंताओं को बढ़ा दिया था। हालांकि अब मानसून केरल पहुंच चुका है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारियों को गति मिलने की उम्मीद है। देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि उत्पादन पर मानसून का सीधा प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसकी हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जाती है।
आगे बढ़ने के लिए अनुकूल बने मौसमीय हालात
IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, पूरे गोवा, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के शेष क्षेत्रों के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी के बड़े हिस्से में आगे बढ़ सकता है। इससे दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
देरी के बावजूद सामान्य वर्षा की उम्मीद बरकरार
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून के शुरुआती आगमन में कुछ दिनों की देरी का अर्थ यह नहीं है कि पूरे सीजन की वर्षा प्रभावित होगी। कई बार मानसून देर से शुरू होकर भी सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज कराता है। फिलहाल विशेषज्ञ मानसून की प्रगति, समुद्री तापमान, एल नीनो-ला नीना प्रभाव और अन्य वैश्विक मौसमीय कारकों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
मौसम विभाग के लिए आत्ममंथन का अवसर
मानसून के आगमन को लेकर इस बार हुई चूक मौसम विभाग के लिए भी समीक्षा का विषय बन सकती है। पिछले कई वर्षों में IMD ने अपनी पूर्वानुमान प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार किया है और अधिकांश मामलों में उसके अनुमान काफी सटीक साबित हुए हैं। लेकिन इस बार निर्धारित त्रुटि सीमा से बाहर जाकर मानसून का आगमन मौसम पूर्वानुमान मॉडल की सीमाओं और जटिलताओं को भी उजागर करता है।
देशभर में बढ़ेगी बारिश की गतिविधि
केरल में मानसून के प्रवेश के साथ ही अब देश के अन्य हिस्सों में भी वर्षा गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद बढ़ गई है। आने वाले दिनों में कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो सकती है। इससे भीषण गर्मी से राहत मिलने के साथ-साथ जलाशयों के भरने और कृषि कार्यों को गति मिलने की संभावना है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार 4 जून को केरल में प्रवेश कर लिया है। हालांकि यह सामान्य तिथि और IMD के पूर्वानुमान दोनों से देर से पहुंचा, लेकिन अब इसके तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। कृषि, अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की उम्मीदों से जुड़े इस मानसून पर पूरे देश की नजर बनी हुई है, क्योंकि आने वाले महीनों में यही बारिश भारत की आर्थिक और कृषि तस्वीर तय करेगी।




