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चीन की सख्ती से हिले बाजार: Futu और Tiger Brokers के शेयरों में भारी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय / व्यापार | एजेंसी ABC NATIONAL NEWS | 23 मई 2026

चीन सरकार की नई कार्रवाई ने वैश्विक शेयर बाजार में हलचल मचा दी है। चीन के ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती की खबर के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध चीनी कंपनियों Futu Holdings और UP Fintech (Tiger Brokers) के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सिक्योरिटी रेगुलेटर ने उन विदेशी ब्रोकरेज कंपनियों पर कार्रवाई शुरू की है जो बिना आधिकारिक घरेलू लाइसेंस के चीन में निवेश सेवाएं दे रही थीं। इसी कार्रवाई के बाद Futu Holdings के शेयर करीब 37 प्रतिशत तक टूट गए, जबकि UP Fintech के शेयरों में लगभग 35 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

चीन सिक्योरिटीज रेगुलेटरी कमीशन (CSRC) ने कहा है कि Tiger Brokers, Futu और Longbridge जैसी कंपनियां चीन के भीतर बिना वैध ऑनशोर लाइसेंस के कारोबार कर रही थीं और घरेलू निवेशकों को विदेशी बाजारों में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रही थीं। अब इन कंपनियों और उनके स्थानीय साझेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

चीन ने इन कंपनियों को अपने “गैरकानूनी सीमा-पार निवेश कारोबार” को बंद करने के लिए दो साल की मोहलत दी है। माना जा रहा है कि बीजिंग का उद्देश्य देश से बाहर जाने वाले निवेश और पूंजी प्रवाह पर अधिक नियंत्रण स्थापित करना है।

इस कार्रवाई का असर केवल ब्रोकरेज कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। चीन से जुड़ी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों Alibaba, JD.com और PDD Holdings के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। चीन टेक सेक्टर से जुड़े ETF फंड्स में भी कमजोरी देखने को मिली।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सरकार लगातार टेक और फाइनेंशियल सेक्टर पर नियंत्रण बढ़ा रही है। बीते कुछ वर्षों में बीजिंग ने टेक कंपनियों, ऑनलाइन एजुकेशन, गेमिंग और फिनटेक कंपनियों पर कई बड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अब यह कार्रवाई विदेशी निवेश प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच गई है।

विश्लेषकों के अनुसार, चीन की यह सख्ती विदेशी निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकती है। खासतौर पर वे निवेशक जो अमेरिकी बाजार में सूचीबद्ध चीनी कंपनियों में पैसा लगाते हैं, उनके बीच अनिश्चितता बढ़ सकती है।

हालांकि चीन का तर्क है कि यह कदम घरेलू वित्तीय सुरक्षा और पूंजी नियंत्रण को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। सरकार का कहना है कि बिना लाइसेंस विदेशी निवेश सेवाएं देने से निवेशकों और वित्तीय प्रणाली दोनों को जोखिम हो सकता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में चीन की नियामक नीतियों पर वैश्विक निवेशकों की नजर बनी रहेगी, क्योंकि इन फैसलों का असर एशियाई और अमेरिकी बाजारों दोनों पर पड़ सकता है।

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