ओपिनियन | प्रणव प्रियदर्शी | ABC NATIONAL NEWS | 23 मई 2026
दिल्ली-NCR आज केवल ट्रैफिक, जनसंख्या और अव्यवस्थित शहरीकरण की समस्या से नहीं जूझ रहा, बल्कि भीषण गर्मी, जहरीले प्रदूषण और बढ़ती स्वास्थ्य आपदाओं की संयुक्त मार झेल रहा है। हर साल तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है, सड़कें आग उगलती नजर आती हैं और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली को खड़ा कर देता है। इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, सांस की बीमारियों, एलर्जी, अस्थमा और डिहाइड्रेशन के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अब केवल चेतावनियों और एडवाइजरी से काम नहीं चलेगा, बल्कि बड़े और आधुनिक शहरी समाधान अपनाने होंगे।
उत्तर प्रदेश के औरैया में सऊदी अरब की तर्ज पर पानी की फुहार छोड़ने वाले हाई-वेलोसिटी पंखे लगाने की योजना इस दिशा में एक नई सोच पेश करती है। यह केवल सौंदर्यीकरण का प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य के “क्लाइमेट-रेजिलिएंट शहर” की झलक हो सकता है। यदि दिल्ली-NCR की प्रमुख सड़कों, बाजारों, बस अड्डों, मेट्रो स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी व्यवस्था लागू की जाए, तो इससे गर्मी और प्रदूषण दोनों को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिल सकती है।
दुनिया के कई गर्म देशों—खासकर सऊदी अरब, यूएई और कतर—ने “कूलिंग कॉरिडोर” मॉडल अपनाया है। मक्का, मदीना, रियाद और दुबई जैसे शहरों में हाई-वेलोसिटी मिस्ट फैन, वाटर स्प्रे सिस्टम और शहरी हरियाली का इस्तेमाल किया जाता है। इससे स्थानीय तापमान 5 से 10 डिग्री तक कम महसूस होता है और हीट स्ट्रोक जैसी स्थितियों में उल्लेखनीय कमी आती है।
दिल्ली-NCR में यदि इसी मॉडल को वैज्ञानिक ढंग से लागू किया जाए, तो इसके कई बड़े फायदे सामने आ सकते हैं—
1. हीटवेव और शहरी गर्मी से राहत
दिल्ली की सड़कें और कंक्रीट संरचनाएं दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात तक “अर्बन हीट आइलैंड” बना देती हैं। मिस्ट सिस्टम और हरियाली सड़क के आसपास का तापमान कम कर सकते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि शहरी हरियाली और माइक्रो-कूलिंग तकनीक स्थानीय तापमान को औसतन 3 से 7 डिग्री तक घटा सकती है।
2. प्रदूषण कम करने में मदद
वॉटर मिस्ट तकनीक हवा में मौजूद धूल और सूक्ष्म प्रदूषक कणों (PM2.5 और PM10) को नीचे बैठाने में सहायक होती है। चीन, सिंगापुर और यूएई में इस तकनीक का इस्तेमाल प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी किया गया है। दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या उड़ती धूल, निर्माण कार्य और वाहन प्रदूषण है, जिसे यह तकनीक आंशिक रूप से नियंत्रित कर सकती है।
3. अस्पतालों में मरीजों की संख्या घट सकती है
गर्मी और प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों, मजदूरों और बाहर काम करने वाले लोगों पर पड़ता है। हर साल दिल्ली के अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, सांस की तकलीफ, एलर्जी और डिहाइड्रेशन के मामलों में भारी वृद्धि दर्ज होती है। यदि सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर तापमान नियंत्रित रखने वाली व्यवस्था हो, तो स्वास्थ्य संकट का बोझ काफी कम किया जा सकता है। इससे अस्पतालों पर दबाव भी घटेगा और लोगों का स्वास्थ्य खर्च भी कम होगा।
4. सोलर एनर्जी बने सबसे बड़ा आधार
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी व्यवस्था को पारंपरिक बिजली पर नहीं, बल्कि “सुपर पावर सोलर एनर्जी” मॉडल पर आधारित किया जाना चाहिए। दिल्ली-NCR में साल के अधिकांश दिनों में पर्याप्त धूप रहती है। यदि सड़क किनारे सोलर पैनल लगाए जाएं और उन्हीं से मिस्ट फैन, स्ट्रीट लाइट और पानी पंप संचालित हों, तो बिजली की खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों में भारी कमी लाई जा सकती है।
भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों की रिपोर्टें बताती हैं कि सोलर ऊर्जा अब सबसे सस्ते ऊर्जा स्रोतों में शामिल हो चुकी है। एक बार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद इसका संचालन और रखरखाव भी अपेक्षाकृत कम खर्चीला होता है।
5. पैदल यात्रियों और श्रमिकों को सबसे ज्यादा राहत
दिल्ली-NCR की सड़कों का ढांचा मुख्यतः वाहनों के लिए तैयार किया गया है। पैदल चलने वाले, डिलीवरी बॉय, ट्रैफिक पुलिसकर्मी, रिक्शा चालक और मजदूर सबसे ज्यादा गर्मी झेलते हैं। यदि प्रमुख सड़कों पर “कूलिंग जोन” बनाए जाएं, तो लाखों लोगों को प्रत्यक्ष राहत मिल सकती है।
6. दुनिया के सामने नई पहचान
दुबई, रियाद और सिंगापुर जैसे शहर आधुनिक शहरी तकनीकों के कारण दुनिया में अलग पहचान रखते हैं। यदि दिल्ली-NCR पर्यावरण-अनुकूल “स्मार्ट कूलिंग सिटी” मॉडल अपनाता है, तो यह भारत की वैश्विक छवि को भी नई ताकत देगा।
आज जरूरत केवल फ्लाईओवर और कंक्रीट बढ़ाने की नहीं, बल्कि इंसानों के लिए रहने योग्य शहर बनाने की है। तेजी से बढ़ते तापमान और प्रदूषण के दौर में सऊदी मॉडल जैसी तकनीक अब विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता बनती जा रही है।
यदि सरकारें चाहें तो पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कनॉट प्लेस, इंडिया गेट, नोएडा एक्सप्रेसवे, गुरुग्राम साइबर सिटी, करोल बाग, चांदनी चौक और बड़े मेट्रो कॉरिडोर पर इसकी शुरुआत की जा सकती है। यह केवल शहरी सौंदर्यीकरण नहीं होगा, बल्कि आने वाले भारत के “स्वस्थ, हरित और क्लाइमेट-स्मार्ट शहरों” की नींव साबित हो सकता है।




