राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 अक्टूबर 2026
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी के ओखला विधानसभा क्षेत्र के दो मतदान केंद्रों में 100 से अधिक मतदाताओं को गलत तरीके से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि वाला दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। नागरिक संगठनों की ओर से किए गए सार्वजनिक ऑडिट में यह जानकारी सामने आई।
सात दिनों तक 258 घरों में किए गए सर्वेक्षण के दौरान इन मतदाताओं से जुड़ी गड़बड़ियों का पता चला। संबंधित लोगों का कहना है कि वे वर्षों से अपने मौजूदा पते पर रह रहे हैं, इसके बावजूद मसौदा मतदाता सूची में उनके नाम नहीं मिले।
रविवार, 18 अक्टूबर को दिल्ली के बाटला हाउस इलाके में आयोजित जनसुनवाई में ऐसे कई मतदाता पहुंचे। उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुए मतदाता सूची से नाम गायब होने और उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित दर्ज किए जाने पर नाराजगी जताई।
वर्षों से एक ही पते पर रहने वालों के नाम गायब
जनसुनवाई में पहुंचे लोगों ने बताया कि वे कई दशकों से एक ही पते पर रह रहे हैं। इसके बावजूद मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान उन्हें अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित या मृत के रूप में दर्ज कर दिया गया।
इस तरह की प्रविष्टियों के कारण प्रभावित मतदाताओं के सामने अपने नाम को दोबारा सूची में शामिल कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों के नाम मसौदा सूची से गायब हैं, उन्हें नए सिरे से नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरने का विकल्प दिया गया है।
इस प्रक्रिया को लेकर लोगों में नाराजगी है। उनका सवाल है कि जब वे अपने पते पर मौजूद हैं और वर्षों से वहीं रह रहे हैं, तो उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित दर्ज कैसे किया गया।
सात दिन में 258 घरों का ऑडिट
यह सार्वजनिक ऑडिट ओखला विधानसभा क्षेत्र के दो मतदान केंद्रों के अंतर्गत आने वाले 258 घरों में किया गया। सात दिनों तक चले इस सर्वेक्षण में कम से कम 100 मतदाताओं के नाम गलत श्रेणियों में दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई।
जनसुनवाई का आयोजन जन सरोकार, मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS), वोटर अधिकार मंच और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (NFIW) सहित कई नागरिक संगठनों ने किया था।
इन संगठनों का उद्देश्य मतदाता सूची से नाम गायब होने की शिकायतों को सामने लाना और प्रभावित लोगों की समस्याओं को सार्वजनिक मंच पर उठाना था।
ओखला में मतदाता सूची से नाम कटने की ऊंची दर
SIR की गणना प्रक्रिया के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में ओखला विधानसभा क्षेत्र में नाम कटने की दर दिल्ली में दूसरी सबसे अधिक बताई गई है। इस पृष्ठभूमि में दो मतदान केंद्रों के ऑडिट में सामने आए मामले मतदाता सूची की शुद्धता और पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं।
हालांकि, सार्वजनिक ऑडिट में सामने आए निष्कर्षों की आधिकारिक जांच और निर्वाचन अधिकारियों की प्रतिक्रिया से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने मामलों में वास्तव में गलत वर्गीकरण हुआ है और कितने मतदाताओं के नाम बहाल किए जाने की जरूरत है।
मतदाता अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
मतदाता सूची में नाम दर्ज होना चुनाव में भाग लेने के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत जानकारी के आधार पर सूची से बाहर हो जाता है, तो उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
ओखला में सामने आई शिकायतें इस बात की जरूरत को रेखांकित करती हैं कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान प्रत्येक मामले की सावधानीपूर्वक जांच हो। जिन लोगों को गलत तरीके से अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत दर्ज किया गया है, उनकी शिकायतों का समय पर समाधान किया जाना चाहिए।
अब निगाहें निर्वाचन अधिकारियों की प्रतिक्रिया और प्रभावित मतदाताओं के नामों की जांच पर हैं। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि किसी भी पात्र नागरिक को प्रशासनिक या रिकॉर्ड संबंधी गलती के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।



