ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 अक्टूबर 2026
सीरीज बराबर, लेकिन भारत की कमजोरियां उजागर
वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज भले ही 2-2 से बराबर रही, लेकिन इस मुकाबले ने भारतीय टीम की कई कमजोरियों को उजागर कर दिया है। सीरीज शुरू होने से पहले आईसीसी रैंकिंग में दूसरे स्थान पर मौजूद भारत को सातवें स्थान की वेस्टइंडीज टीम के मुकाबले मजबूत दावेदार माना जा रहा था। इसके बावजूद शाई होप की कप्तानी वाली टीम ने भारतीय खिलाड़ियों को लगातार चुनौती दी।
बेंगलुरु में शनिवार को खेला गया आखिरी मुकाबला बारिश के कारण पूरा नहीं हो सका। नौ-नौ ओवर के मैच में भारत ने 7.4 ओवर में पांच विकेट पर 118 रन बनाए। इससे पहले सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाजी और मध्यक्रम की कुछ कमियां सामने आईं, जिन पर टीम प्रबंधन को न्यूजीलैंड दौरे से पहले ध्यान देना होगा।
तेज गेंदबाजी के विकल्पों की कमी
सीरीज के अंतिम मुकाबले में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को टीम में वापस लाना पड़ा। 36 वर्षीय गेंदबाज की वापसी को उनके व्यक्तिगत करियर के लिहाज से अच्छी कहानी माना जा सकता है, लेकिन इससे भारतीय तेज गेंदबाजी के विकल्पों पर भी सवाल उठते हैं।
मयंक यादव ने अपनी रफ्तार से प्रभावित किया, लेकिन अभी उन्हें अनुभव और निरंतरता हासिल करनी है। हैदराबाद में चौथे टी-20 मुकाबले में उन्होंने 52 रन देकर कोई विकेट नहीं लिया। इसके बाद निर्णायक मुकाबले में उन्हें मौका नहीं मिला। बेंगलुरु के छोटे मैदान पर टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा नहीं जताया।
कप्तान श्रेयस अय्यर ने सीरीज का विश्लेषण करते हुए कहा कि दूसरे और चौथे मुकाबले में बेहतर गेंदबाजी की जा सकती थी। उन्होंने भारतीय बल्लेबाजों के प्रदर्शन को शानदार बताया, लेकिन गेंदबाजी में योजनाओं को सही तरीके से लागू न कर पाने को कमी माना।
न्यूजीलैंड में ऑलराउंडरों की भूमिका अहम
भारतीय टीम अब न्यूजीलैंड के दौरे पर टी-20 सीरीज खेलेगी। वहां की परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त मदद मिल सकती है। ऐसे में टीम के लिए ऐसे ऑलराउंडरों की जरूरत होगी, जो बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी भरोसेमंद योगदान दे सकें।
शिवम दुबे और नीतीश कुमार रेड्डी को इसी भूमिका के लिए टीम में चुना गया है। हालांकि, दोनों की गेंदबाजी क्षमता सीमित है और उनसे नियमित रूप से विकेट लेने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। टीम को उनसे मुख्य रूप से कुछ ओवरों के साथ आक्रामक बल्लेबाजी की उम्मीद है।
दुबे वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मुकाबलों में खेले, लेकिन उन्हें बल्लेबाजी और गेंदबाजी का अवसर केवल रांची में मिला। वहां उन्होंने 10 गेंदों पर सात रन बनाए, जबकि गेंदबाजी में दो ओवर में 20 रन देकर दो विकेट लिए।
रेड्डी ने दो मुकाबले खेले। इंदौर में उन्होंने 14 गेंदों पर 21 रन बनाए और दो ओवर में 19 रन देकर एक विकेट लिया। हैदराबाद में वह तीन ओवर में 39 रन दे बैठे, हालांकि बल्लेबाजी में 20 गेंदों पर 41 रन बनाए।
न्यूजीलैंड में इन दोनों खिलाड़ियों की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे दबाव की स्थिति में बल्ले और गेंद से कितना प्रभावी प्रदर्शन कर पाते हैं।
फिनिशर की भूमिका में चाहिए पहली गेंद से आक्रामकता
दुबे और रेड्डी के सामने सबसे बड़ी चुनौती फिनिशर की भूमिका निभाने की होगी। इस जिम्मेदारी में बल्लेबाज को पारी जमाने के लिए ज्यादा समय नहीं मिलता। उसे पहली गेंद से ही रन गति बढ़ानी होती है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ अंतिम मुकाबले में नमन धीर ने छह गेंदों पर नाबाद 24 रन बनाकर इस भूमिका की उपयोगिता दिखाई। उन्होंने पहली ही गेंद पर छक्का लगाया और अपनी छोटी पारी में तीन छक्के तथा एक चौका जड़ा।
इसके विपरीत, हैदराबाद में रेड्डी की तेज पारी के बावजूद भारत 248 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए पीछे रह गया। जब टीम को अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाने थे, तब साझेदारी और रन गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। न्यूजीलैंड में ऐसी परिस्थितियों में बेहतर फैसले और अधिक प्रभावी हिटिंग की जरूरत होगी।
तिलक वर्मा के सामने नई चुनौती
तिलक वर्मा के लिए भी न्यूजीलैंड सीरीज अहम होगी। शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करने के आदी तिलक को अब पांचवें या छठे नंबर पर उतरकर पारी खत्म करने की जिम्मेदारी निभानी है।
बारिश से प्रभावित अंतिम टी-20 मुकाबले में पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए वह सात गेंदों पर छह रन ही बना सके। इससे निचले मध्यक्रम में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठे।
तिलक ने स्वीकार किया कि शीर्ष क्रम से पांचवें या छठे नंबर पर बल्लेबाजी करना चुनौतीपूर्ण रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह टीम की जरूरत के अनुसार इस भूमिका को निभाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं।
उनके मुताबिक, तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करना व्यक्तिगत तौर पर आसान हो सकता है, लेकिन ईशान किशन उस स्थान पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसलिए टीम के संयोजन को देखते हुए उन्हें मध्यक्रम में ही अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
लगातार सीरीज और बदलती परिस्थितियों की परीक्षा
वेस्टइंडीज सीरीज के तुरंत बाद न्यूजीलैंड में खेलने से भारतीय खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुरूप ढलने के लिए ज्यादा समय नहीं मिलेगा। वहां की पिचों पर गेंद को अतिरिक्त मूवमेंट मिल सकता है, जो भारतीय बल्लेबाजों के लिए चुनौती बनेगा।
तिलक वर्मा ने माना कि लगातार सीरीज और अलग-अलग समय क्षेत्रों में खेलने से चुनौतियां आती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
भारत के लिए न्यूजीलैंड दौरा केवल सीरीज जीतने का मौका नहीं होगा, बल्कि तेज गेंदबाजी के विकल्पों, मध्यक्रम की मजबूती और फिनिशर की भूमिका को परखने की परीक्षा भी होगा। वेस्टइंडीज के खिलाफ सामने आई कमियों को दूर किए बिना भारतीय टीम के लिए न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में सफल होना आसान नहीं होगा।



