न्यायपालिका/ राजस्थान/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | जयपुर/नई दिल्ली | 1 सितंबर 2026
राजस्थान हाईकोर्ट में सोमवार को बड़ा प्रशासनिक और न्यायिक घटनाक्रम सामने आया। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय प्रकाश शर्मा को लेकर वकीलों के विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं और एक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा को लेकर सवाल उठाए थे।
कॉलेजियम के फैसले का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा राजस्थान हाईकोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी का तबादला है। उन्हें जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालने के लिए स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। इस तरह एक ही फैसले में राजस्थान हाईकोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश और मौजूदा वरिष्ठ न्यायाधीश के दूसरे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बनने का रास्ता साफ किया गया है।
घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉलेजियम की सिफारिश से कुछ घंटे पहले ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय प्रकाश शर्मा छुट्टी पर चले गए। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच के लिए जारी संशोधित रोस्टर के मुताबिक 1 सितंबर से 5 सितंबर तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश किसी भी न्यायिक पीठ में सुनवाई नहीं करेंगे। यानी जिस समय अदालत के भीतर उनके खिलाफ वकीलों का विरोध चल रहा था, उसी दौरान उनकी अनुपस्थिति और नए मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश ने घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया।
राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों के विरोध का मुद्दा पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश की ओर से मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की इंटीग्रिटी यानी सत्यनिष्ठा को लेकर संदेह व्यक्त किए जाने की बात सामने आई। हालांकि इन आरोपों और संदेहों के संबंध में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में कोई निर्णय नहीं बताया गया है। इसलिए पूरे घटनाक्रम को आरोपों और प्रशासनिक निर्णयों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
कॉलेजियम की ओर से जस्टिस संजय के. अग्रवाल के नाम की सिफारिश इस पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखती है। यदि नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती है और केंद्र सरकार तथा राष्ट्रपति की निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, तो वह राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभालेंगे। इस नियुक्ति से अदालत के प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव आएगा और मौजूदा विवाद के बीच न्यायिक व्यवस्था को नए नेतृत्व के तहत आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
वहीं जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी का जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में प्रस्तावित तबादला भी महत्वपूर्ण है। राजस्थान हाईकोर्ट में वरिष्ठता के लिहाज से उनका स्थान महत्वपूर्ण रहा है और अब उन्हें एक अन्य हाईकोर्ट की शीर्ष न्यायिक जिम्मेदारी देने की सिफारिश की गई है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायिक प्रशासन और वरिष्ठता संरचना दोनों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
पूरे घटनाक्रम को अगर एक साथ देखा जाए तो तस्वीर बेहद स्पष्ट है—राजस्थान हाईकोर्ट में एक तरफ कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ वकीलों का विरोध, दूसरी तरफ उनकी छुट्टी और उसी दिन नए मुख्य न्यायाधीश के नाम की कॉलेजियम सिफारिश। इसके साथ ही दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश का भी दूसरे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए तबादला प्रस्तावित किया गया है। यही वजह है कि सोमवार का दिन राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक इतिहास में खासा महत्वपूर्ण बन गया।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि कॉलेजियम की सिफारिश अंतिम नियुक्ति नहीं होती। मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया में आगे के चरण पूरे होने बाकी होते हैं। इसलिए जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश कहने के बजाय फिलहाल यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश की है।
अब निगाहें आगे की प्रक्रिया पर रहेंगी। राजस्थान हाईकोर्ट में नए नेतृत्व की नियुक्ति कब पूरी होती है, जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी का जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में कार्यभार कब शुरू होता है और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़े विवाद पर आगे क्या प्रशासनिक या न्यायिक घटनाक्रम सामने आता है—इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे।




