राजनीति/ पश्चिम बंगाल | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 1 सितंबर 2026
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दफ्तर को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार, 31 अगस्त को कोलकाता पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम कैमक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पहुंची। अधिकारियों ने वहां फायर सेफ्टी ऑडिट किया और इमारत के भवन-नक्शे तथा उससे जुड़े सुरक्षा पहलुओं की जांच की। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब महज चार दिन पहले ही कोलकाता नगर निगम और पुलिस की टीम इसी परिसर में पहुंची थी और वहां लगे एक इलेक्ट्रिक बिलबोर्ड को हटाने की कार्रवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के बीच टकराव हो गया था।
31 अगस्त की कार्रवाई का केंद्र हालांकि आग से सुरक्षा और भवन संबंधी नियमों की जांच रहा। पुलिस तथा अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्यालय परिसर का निरीक्षण किया और यह देखने की कोशिश की कि भवन में अग्नि सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही अधिकारियों ने भवन के प्लान की भी जांच की। इस तरह कुछ ही दिनों के भीतर एक ही कार्यालय परिसर में सरकारी एजेंसियों की दूसरी बड़ी मौजूदगी ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ा दी है।
यह पूरा घटनाक्रम 27 अगस्त को हुई कार्रवाई के बाद सामने आया है। उस दिन कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों और पुलिस की टीम कैमक स्ट्रीट स्थित परिसर में लगे इलेक्ट्रिक बिलबोर्ड को हटाने पहुंची थी। रिपोर्ट के अनुसार इस कार्रवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के बीच झड़प की स्थिति पैदा हो गई थी। घटना के बाद अब चार दिन के भीतर दो अलग-अलग सरकारी टीमों का कार्यालय पहुंचना इस मामले को और चर्चा में ले आया है।
सोमवार की टीम का दौरा सीधे तौर पर फायर सेफ्टी और भवन योजना की जांच से जुड़ा बताया गया है। इसलिए इसे पिछले सप्ताह बिलबोर्ड हटाने की कार्रवाई से अलग प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि दोनों घटनाएं एक ही परिसर से जुड़ी होने के कारण राजनीतिक हलकों में स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं कि कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय को लेकर प्रशासनिक जांच का दायरा आगे कितना बढ़ेगा।
अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के महासचिव होने के साथ पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में उनके कार्यालय से जुड़ी किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है। खासकर तब, जब कुछ ही दिन पहले उसी परिसर में कार्रवाई के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों के बीच टकराव हुआ हो। हालांकि उपलब्ध जानकारी में सोमवार की संयुक्त टीम की कार्रवाई को अग्नि सुरक्षा ऑडिट और भवन योजना की जांच तक ही सीमित बताया गया है।
फायर सेफ्टी ऑडिट सामान्य तौर पर किसी भवन में आग लगने की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था, निकासी व्यवस्था और अग्निशमन संबंधी इंतजामों की जांच से जुड़ा होता है। व्यावसायिक और कार्यालय परिसरों में ऐसी जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि भवन में मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं। कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय में भी अधिकारियों ने इसी संदर्भ में निरीक्षण किया और भवन के प्लान की जांच की।
लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले में घटनाओं का क्रम खासा महत्वपूर्ण है—पहले इलेक्ट्रिक बिलबोर्ड हटाने को लेकर कार्रवाई, फिर अधिकारियों और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच टकराव और उसके महज चार दिन बाद पुलिस तथा अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम का फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए पहुंचना। यही वजह है कि अभिषेक बनर्जी के कार्यालय से जुड़ी प्रशासनिक गतिविधियां अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गई हैं।
फिलहाल सोमवार की कार्रवाई को लेकर उपलब्ध जानकारी में किसी नए राजनीतिक टकराव या किसी दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। अधिकारियों ने कार्यालय का निरीक्षण किया और फायर सेफ्टी तथा भवन योजना से संबंधित पहलुओं की जांच की। आगे इस निरीक्षण के आधार पर क्या निष्कर्ष निकलता है और प्रशासन की ओर से कोई अगला कदम उठाया जाता है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
इतना जरूर है कि चार दिनों के भीतर अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट कार्यालय में दूसरी प्रशासनिक टीम की दस्तक ने पूरे घटनाक्रम को फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि फायर सेफ्टी ऑडिट और भवन योजना की जांच के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होती है।




