राष्ट्रीय | रक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 जुलाई 2026
भारतीय नौसेना ने एक बार फिर हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी त्वरित कार्रवाई और समुद्री सुरक्षा क्षमता का प्रदर्शन करते हुए गल्फ ऑफ एडन में समुद्री लुटेरों की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। नौसेना के स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड ने समय रहते हस्तक्षेप कर भारत के तूतीकोरिन (थूथुकुडी) की ओर जा रहे व्यापारी जहाज़ एमवी गोल्डन आर्सेनल को समुद्री डाकुओं के हमले से सुरक्षित बचा लिया। इस सफल अभियान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को रेखांकित किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गल्फ ऑफ एडन से गुजर रहे एमवी गोल्डन आर्सेनल पर समुद्री लुटेरों ने हमला करने की कोशिश की थी। खतरे का संकेत मिलते ही क्षेत्र में तैनात भारतीय युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड तत्काल सक्रिय हुआ। नौसेना ने तेज़ी से जवाबी कार्रवाई करते हुए जहाज़ को सुरक्षित अपने नियंत्रण में लिया और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित की। समय रहते की गई इस कार्रवाई से संभावित अपहरण और बड़े आर्थिक नुकसान को टाल दिया गया।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने सोमाली समुद्री डाकुओं के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आईएमओ ने बताया है कि अभी भी तीन व्यापारी जहाज़ समुद्री डाकुओं के कब्ज़े में हैं। इन जहाज़ों में सवार चालक दल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और एक जहाज़ पर मौजूद एक भारतीय नागरिक की मानवीय स्थिति अत्यंत गंभीर बताई गई है। इन तीन जहाज़ों के चालक दल में कुल पांच भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
आईएमओ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि बंधक बनाए गए नाविकों की सुरक्षित और शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं। संगठन का कहना है कि समुद्री डकैती केवल व्यापारिक गतिविधियों के लिए ही नहीं, बल्कि नाविकों के जीवन और वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लाल सागर, अरब सागर और गल्फ ऑफ एडन जैसे समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक कॉरिडोर हैं। भारत के ऊर्जा आयात और निर्यात का बड़ा हिस्सा इन्हीं समुद्री रास्तों से होकर गुजरता है। ऐसे में भारतीय नौसेना की लगातार मौजूदगी न केवल भारतीय जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को भी सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना ने समुद्री डकैती, हथियारों की तस्करी और आपातकालीन बचाव अभियानों में कई सफल ऑपरेशन अंजाम दिए हैं। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार के रूप में पहचान और मजबूत हुई है।
हालांकि एमवी गोल्डन आर्सेनल को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन सोमाली समुद्री डाकुओं के कब्ज़े में मौजूद अन्य जहाज़ों और उनके चालक दल की सुरक्षा अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और नौसेनाएं इन नाविकों की सुरक्षित रिहाई के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
भारतीय नौसेना की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि समुद्र में भारत केवल अपने हितों की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।



