राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अगस्त 2026
भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए नई टीम का ऐलान कर दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से जारी नियुक्तियों की सूची में पार्टी के कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। नई टीम में पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री, संगठन के अनुभवी चेहरे, राज्यों में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले नेता और विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने वाले पदाधिकारी शामिल हैं। पार्टी के अनुसार, ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। नई सूची सामने आने के बाद बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे और आने वाले राजनीतिक अभियानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, दिल्ली से राम माधव, ओडिशा से बैजयंत जय पांडा और आंध्र प्रदेश से डी. पुरंदेश्वरी को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश से रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर, गुजरात से वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, महाराष्ट्र से डॉ. भारती प्रवीन पवार, पंजाब से सरदार मनप्रीत सिंह बादल, मध्य प्रदेश से लाल सिंह आर्य, कर्नाटक से प्रो. एम. नागराजा और पश्चिम बंगाल से डॉ. मधुचंद्रा कर को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इस तरह राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की सूची में कुल 13 नेताओं को जगह मिली है।
राष्ट्रीय महासचिवों की टीम में भी कई महत्वपूर्ण चेहरे शामिल किए गए हैं। पार्टी की सूची के मुताबिक विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, स्मृति ईरानी, डॉ. सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इन नेताओं के पास संगठन, चुनावी प्रबंधन, राज्य स्तर की राजनीति और राष्ट्रीय अभियानों का लंबा अनुभव रहा है। राष्ट्रीय महासचिवों की भूमिका पार्टी के राज्यों में संगठन के विस्तार, प्रदेश इकाइयों के साथ समन्वय, कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करने और राजनीतिक अभियानों को जमीन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण होगी।
बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष की जिम्मेदारी जारी रखी गई है। वहीं शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन से जुड़े ये पद पार्टी के आंतरिक ढांचे में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। राज्यों की संगठनात्मक गतिविधियों, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय, पार्टी के कार्यक्रमों को लागू करने और केंद्रीय नेतृत्व तथा प्रदेश इकाइयों के बीच तालमेल कायम रखने में इन पदों की अहम भूमिका रहती है।
नई नियुक्तियों में वसुंधरा राजे सिंधिया का नाम खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजस्थान की राजनीति में लंबे समय तक बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहीं राजे अब राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर उनका दायरा राजस्थान से आगे बढ़कर पार्टी की राष्ट्रीय राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों तक पहुंच सकता है। इसी तरह राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया जाना भी संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय राजनीति और संगठनात्मक रणनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। बैजयंत जय पांडा को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने ओडिशा समेत पूर्वी भारत में उनके अनुभव को राष्ट्रीय संगठन से जोड़ा है।
स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने से भी नई टीम में उनका संगठनात्मक महत्व बढ़ा है। केंद्र की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहीं ईरानी बीजेपी की प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल रही हैं। वहीं विनोद तावड़े और सुनील बंसल जैसे संगठन के अनुभवी चेहरों को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलने से पार्टी के चुनावी और संगठनात्मक प्रबंधन में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को भी राष्ट्रीय महासचिवों की टीम में शामिल किया गया है, जिससे अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों को राष्ट्रीय संगठन में प्रतिनिधित्व मिला है।
पार्टी की नई व्यवस्था में पियूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके गोयल आर्थिक और कारोबारी मामलों के जानकार नेताओं में गिने जाते हैं। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी पार्टी के वित्तीय प्रबंधन, संसाधनों और संगठनात्मक आर्थिक व्यवस्था से जुड़ी होती है। ऐसे में इस पद पर गोयल की नियुक्ति को संगठन के वित्तीय ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
इसके अलावा संबित पात्रा को नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेटर और तरुण चुघ को केंद्रीय कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी है। पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी के संगठनात्मक विस्तार, स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय और पार्टी की गतिविधियों को मजबूत करने के लिहाज से नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेटर की भूमिका अहम होगी। वहीं केंद्रीय कार्यालय प्रभारी के रूप में तरुण चुघ की जिम्मेदारी राष्ट्रीय मुख्यालय के कामकाज, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल और संगठनात्मक गतिविधियों के प्रभावी संचालन से जुड़ी होगी।
बीजेपी ने केवल राष्ट्रीय पदाधिकारियों तक ही बदलाव सीमित नहीं रखा है, बल्कि पार्टी के विभिन्न मोर्चों के लिए भी नए अध्यक्षों की घोषणा की है। युवा मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. हेमांग जोशी को बनाया गया है, जो गुजरात से आते हैं। महिला मोर्चा की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ की रूप कुमारी चौधरी को दी गई है। ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अमरपाल मौर्य होंगे, जबकि किसान मोर्चा की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश के बंसीलाल गुर्जर को दी गई है। एससी मोर्चा के अध्यक्ष बिहार के शिवेश कुमार राम, एसटी मोर्चा के अध्यक्ष राजस्थान के डॉ. मन्नालाल रावत और अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के कुंवर बासित अली बनाए गए हैं। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने अपने अलग-अलग सामाजिक और संगठनात्मक वर्गों तक पहुंच को मजबूत करने की कोशिश की है।
पार्टी ने मीडिया और सोशल मीडिया के मोर्चे पर भी नई जिम्मेदारियां तय की हैं। अनिल बलूनी को मीडिया कन्वेनर बनाया गया है। मीडिया कोऑर्डिनेशन में आशीष उषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को को-कन्वेनर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सोशल मीडिया की कमान दीपक म्हास्के को सोशल मीडिया कन्वेनर के रूप में दी गई है। सोशल मीडिया को-कन्वेनर के तौर पर प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को जिम्मेदारी दी गई है। डिजिटल दौर में पार्टी के संदेश को तेजी से कार्यकर्ताओं और आम जनता तक पहुंचाने के लिहाज से यह टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नई टीम में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर भी विशेष जोर दिखाई देता है। राष्ट्रीय उपाध्यक्षों और महासचिवों की सूची में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा और अन्य क्षेत्रों के नेताओं को जगह मिली है। वहीं मोर्चों की जिम्मेदारियों में भी गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन तैयार करते समय अलग-अलग राज्यों और सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बीजेपी की नई टीम को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी उत्सुकता थी। अब राष्ट्रीय पदाधिकारियों, मोर्चा अध्यक्षों, मीडिया और सोशल मीडिया टीम की घोषणा के साथ पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की नई तस्वीर सामने आ गई है। नई टीम में जहां पुराने और अनुभवी संगठनकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं, वहीं कई ऐसे नेताओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका मिली है जो अपने-अपने राज्यों में राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव रखते हैं। ऐसे में आने वाले समय में पार्टी के कार्यक्रमों, चुनावी तैयारियों और संगठन विस्तार में इस टीम की सक्रियता पर नजर रहेगी।
इस पूरी सूची को देखें तो बीजेपी ने संगठन के अलग-अलग स्तरों पर जिम्मेदारियों का व्यापक बंटवारा किया है। शीर्ष संगठन में बी.एल. संतोष, शिवप्रकाश और सौदान सिंह जैसे अनुभवी संगठनकर्ताओं की भूमिका बनी हुई है। राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में वसुंधरा राजे, राम माधव और बैजयंत पांडा जैसे बड़े नाम हैं। राष्ट्रीय महासचिवों में स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, सुनील बंसल और बिप्लब कुमार देब जैसे चेहरे हैं। वहीं मीडिया, सोशल मीडिया और विभिन्न मोर्चों के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने संगठन के राजनीतिक, सामाजिक और संचार तंत्र को एक साथ सक्रिय करने का प्रयास किया है।
नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम बीजेपी के संगठनात्मक पुनर्गठन का एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इस टीम में अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक सक्रियता को एक साथ साधने की कोशिश दिखाई देती है। अब चुनौती इन नियुक्तियों को प्रभावी संगठनात्मक काम में बदलने की होगी। आने वाले महीनों में नई टीम किस तरह राज्यों के संगठन को मजबूत करती है, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करती है, विपक्षी दलों के मुकाबले पार्टी की रणनीति तैयार करती है और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए बीजेपी को तैयार करती है—यह इस बड़े संगठनात्मक फेरबदल की वास्तविक परीक्षा होगी।




