राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 अगस्त 2026
E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज होता जा रहा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 4 अगस्त को दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास की ओर मार्च करने का ऐलान किया है। केजरीवाल का कहना है कि वह E20 नीति में बदलाव की मांग वाली याचिका प्रधानमंत्री को सौंपेंगे, जिस पर दो लाख से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने साफ कहा कि इस मार्च में बड़ी भीड़ नहीं ले जाएंगे, बल्कि केवल ऐसे 100 लोगों को साथ लेकर चलेंगे जो “पुलिस की लाठी और जेल जाने से नहीं डरते।”
‘दो लाख लोगों ने हस्ताक्षर किए, अब याचिका लेकर खुद PM आवास जाऊंगा’
नई दिल्ली में संविधान क्लब के बाहर आयोजित ‘नेशनल टाउन हॉल अगेंस्ट E20’ को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने पहले लोगों से प्रधानमंत्री के नाम याचिका पर हस्ताक्षर करने की अपील की थी और अब दो लाख से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं। केजरीवाल के मुताबिक इन डिजिटल हस्ताक्षरों के प्रिंटआउट तैयार कर लिए गए हैं। उन्होंने घोषणा की कि 4 अगस्त को दोपहर 12 बजे वह खुद प्रधानमंत्री आवास की ओर जाएंगे और याचिका सौंपने की कोशिश करेंगे।
‘मुझे भीड़ नहीं, सिर्फ 100 निडर लोग चाहिए’
केजरीवाल ने मार्च के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों को दिल्ली बुलाने के बजाय केवल 100 स्वयंसेवकों को साथ लेने की बात कही। उन्होंने कहा, “मैं अपने साथ 100 ऐसे लोगों को ले जाऊंगा जिन्हें पुलिस की लाठी से डर नहीं लगता और जिन्हें जेल जाने का डर नहीं है।” उन्होंने इच्छुक लोगों से सोशल मीडिया के जरिए उनसे संपर्क करने को कहा। केजरीवाल के मुताबिक ये 100 लोग उनके साथ प्रधानमंत्री आवास की तरफ मार्च करेंगे और उसके बाद “देखेंगे कि क्या होता है।”
पहली मांग: पेट्रोल पंप पर E20 के साथ शुद्ध पेट्रोल का भी विकल्प मिले
केजरीवाल की सबसे प्रमुख मांग उपभोक्ता की पसंद से जुड़ी है। उनका कहना है कि पेट्रोल पंपों पर केवल E20 देने के बजाय वाहन मालिकों को E20 और बिना एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल में से चुनने का विकल्प मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि सरकार E20 को बेहतर ईंधन मानती है तो भी ग्राहक को यह तय करने का अधिकार मिलना चाहिए कि वह अपने वाहन में कौन-सा पेट्रोल इस्तेमाल करना चाहता है।
दूसरी मांग: E20 पेट्रोल है तो शुद्ध पेट्रोल से सस्ता भी हो
AAP की दूसरी मांग E20 की कीमत को लेकर है। केजरीवाल का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को सामान्य पेट्रोल के बराबर कीमत पर बेचने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि E20 को शुद्ध पेट्रोल से कम कीमत पर बेचा जाए। वाहन मालिकों के एक वर्ग की शिकायत है कि E20 के इस्तेमाल से माइलेज प्रभावित हो रहा है। हालांकि केंद्र सरकार ने व्यापक इंजन क्षति से जुड़े दावों को भ्रामक बताते हुए कहा है कि ऐसी समस्या का कोई सत्यापित व्यापक प्रमाण सामने नहीं आया है।
तीसरी मांग: पेट्रोल ₹84 प्रति लीटर से नीचे लाया जाए
केजरीवाल ने अपनी तीसरी मांग में पेट्रोल की कीमत ₹84 प्रति लीटर से नीचे लाने की बात कही है। उनका कहना है कि एथेनॉल मिलाने से यदि आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता और लागत कम होती है तो उसका आर्थिक फायदा उपभोक्ताओं तक भी पहुंचना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने लोगों से फिलहाल नए पेट्रोल और डीजल वाहन खरीदने से बचने की अपील करते हुए कहा कि देश में E100 के अनुकूल वाहन आने तक उपभोक्ताओं को सोच-समझकर फैसला करना चाहिए।
केजरीवाल का सवाल—‘अगर E20 इतना अच्छा है तो लोगों को चुनने का अधिकार क्यों नहीं?’
केजरीवाल ने सरकार के अलग-अलग बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि E20 से माइलेज और वाहनों पर पड़ने वाले असर को लेकर स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्तर पर माइलेज में गिरावट के अलग आंकड़े बताए जा रहे हैं। उनका सवाल है कि जब वाहन मालिक माइलेज घटने और तकनीकी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं तो सरकार उन्हें अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प क्यों नहीं देती।
सरकार ने इंजन खराब होने के दावों को किया खारिज
दूसरी ओर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि E20 को लेकर कई भ्रामक दावे किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार वैज्ञानिक परीक्षण और बड़े स्तर पर इस्तेमाल के बाद भी E20 से व्यापक रूप से इंजन खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण नहीं मिला है। केंद्र का कहना है कि E15 से अधिक मिश्रण वाला पेट्रोल साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि E19-E20 भी ढाई साल से अधिक समय से बाजार में है। सरकार ने करोड़ों दोपहिया और पेट्रोल कारों के इस तरह के ईंधन पर चलने का हवाला देते हुए व्यापक तकनीकी विफलता के दावों को खारिज किया है।
E20 अब तकनीकी नहीं, बड़ा राजनीतिक मुद्दा
एथेनॉल मिश्रण की नीति मूल रूप से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों के लिए एथेनॉल की मांग बढ़ाने और स्वच्छ ईंधन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाई गई थी। लेकिन अब बहस का केंद्र उपभोक्ता की जेब, माइलेज, पुराने वाहनों की अनुकूलता और पेट्रोल पंप पर विकल्प देने के सवाल पर पहुंच गया है। AAP लगातार इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठा रही है, जबकि केंद्र अपनी नीति को वैज्ञानिक परीक्षणों और लंबे समय के आर्थिक हितों के आधार पर सही बता रहा है।
अब नजर 4 अगस्त, दोपहर 12 बजे पर होगी। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास की ओर 100 लोगों के साथ मार्च करने का ऐलान कर E20 विवाद को सड़क तक ले जाने की तैयारी कर दी है। बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार उपभोक्ताओं को E20 और शुद्ध पेट्रोल के बीच विकल्प देने पर विचार करेगी, या मौजूदा नीति बिना बदलाव जारी रहेगी?




