खेल | ABC NATIONAL NEWS | ग्लासगो | 2 अगस्त 2026
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने इतिहास रच दिया। ग्लासगो में भारतीय बॉक्सिंग दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण और तीन रजत पदक अपने नाम किए। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया गया है। शनिवार का दिन खास तौर पर भारत के नाम रहा, जब एक के बाद एक भारतीय मुक्केबाज फाइनल में उतरे और सोने पर पंच लगाते चले गए। अंकुश पंघाल, सचिन सिवाच, प्रीति पवार, जैस्मिन लैंबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे की शान बढ़ाई।
अंकुश पंघाल का दमदार पंच, विश्व स्तर के प्रतिद्वंद्वी को हराकर गोल्ड
पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में अंकुश पंघाल ने इंग्लैंड के डी. शिट्टू को 4-1 के स्प्लिट फैसले से हराकर स्वर्ण पदक जीता। मुकाबला आसान नहीं था क्योंकि सामने 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप का गोल्ड मेडलिस्ट था। लेकिन अंकुश ने दबाव में शानदार खेल दिखाया और निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए भारत की झोली में स्वर्ण डाल दिया।
सचिन सिवाच ने 3-2 से जीता रोमांचक फाइनल
पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में सचिन सिवाच का मुकाबला नामीबिया के टी.एम. एनडेवेलो से हुआ। मुकाबला इतना करीबी रहा कि फैसला 3-2 के स्प्लिट निर्णय से हुआ। आखिरकार सचिन के आक्रामक खेल और सटीक पंचों ने उन्हें जीत दिलाई और वह कॉमनवेल्थ चैंपियन बन गए।
प्रीति पवार ने दिलाया दिन का पहला बॉक्सिंग गोल्ड
महिलाओं के 54 किग्रा फाइनल में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट सवाना डेलगाडो को एकतरफा अंदाज में 5-0 से हराया। शुरुआती हमलों के बावजूद प्रीति ने तेजी से मुकाबले पर नियंत्रण बनाया। आखिरी राउंड में उनके शानदार फुटवर्क ने कनाडाई मुक्केबाज को खुलकर हमला करने का मौका नहीं दिया और सभी पांच जजों ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में फैसला सुनाया।
जैस्मिन लैंबोरिया ने मौजूदा चैंपियन को 5-0 से हराया
प्रीति की जीत के कुछ ही देर बाद जैस्मिन लैंबोरिया ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में भारत को एक और स्वर्ण दिला दिया। जैस्मिन ने उत्तरी आयरलैंड की अनुभवी और मौजूदा चैंपियन माइकेला वॉल्श को 5-0 से मात दी। चार बार की कॉमनवेल्थ पदक विजेता वॉल्श के खिलाफ इतनी बड़ी जीत ने जैस्मिन के प्रदर्शन को और खास बना दिया।
साक्षी, प्रिया और अरुंधति ने भी लगाया ‘गोल्डन पंच’
महिलाओं के मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा लगातार जारी रहा। साक्षी चौधरी ने 51 किग्रा वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को सर्वसम्मत फैसले से हराकर स्वर्ण जीता। इसके बाद प्रिया घंघास ने 60 किग्रा वर्ग में कनाडा की मैरी-बाथौल अल-अहमदियेह को बेहद कड़े मुकाबले में 4-1 के स्प्लिट फैसले से मात दी। वहीं 70 किग्रा वर्ग में अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की शैंटेल रीड को 5-0 से हराकर भारत की स्वर्णिम सफलता को और बड़ा कर दिया।
जदुमणि, लवलीना और नरेंद्र ने जीते रजत
हर फाइनल भारत के पक्ष में नहीं गया। पुरुषों के 55 किग्रा फाइनल में जदुमणि सिंह को ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन के खिलाफ हार के बाद रजत से संतोष करना पड़ा। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन महिलाओं के 75 किग्रा फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की एमा-सू ग्रीनट्री से हार गईं, जबकि पुरुषों के 90 किग्रा वर्ग में नरेंद्र बेरवाल को इंग्लैंड के डामर थॉमस ने मात दी। तीनों भारतीय मुक्केबाजों ने रजत पदक जीतकर देश की पदक संख्या बढ़ाई।
सात गोल्ड, तीन सिल्वर—भारतीय बॉक्सिंग का ऐतिहासिक प्रदर्शन
सात स्वर्ण और तीन रजत पदकों के साथ CWG 2026 भारतीय मुक्केबाजी के लिए यादगार बन गया। खास बात यह रही कि सफलता केवल एक-दो बड़े नामों तक सीमित नहीं रही। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में अलग-अलग वजन श्रेणियों के भारतीय मुक्केबाज पोडियम तक पहुंचे। युवा खिलाड़ियों ने अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित प्रतिद्वंद्वियों को हराकर दिखाया कि भारतीय बॉक्सिंग की अगली पीढ़ी बड़े मंच के दबाव को संभालने के लिए तैयार है।
ग्लासगो की रिंग से भारत के लिए संदेश साफ है—इस बार पंच सिर्फ पदकों पर नहीं लगा, भारतीय मुक्केबाजी ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास पर अपनी सुनहरी मुहर लगा दी।




