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CJP एक-दो राज्यों में सत्ता में आ जाए तो हैरानी नहीं: पी. चिदंबरम

राजनीति/राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 28 अगस्त 2026

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त एवं गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने Cockroach Janta Party (CJP) के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को लेकर बड़ा आकलन किया है। उन्होंने कहा कि अगर CJP एक या दो राज्यों में सत्ता हासिल कर लेती है तो उन्हें इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि CJP राष्ट्रीय स्तर पर तीसरी राजनीतिक ताकत के रूप में उभर पाएगी या नहीं। चिदंबरम ने यह टिप्पणी The Hindu 360 के साथ बातचीत में की।

चेन्नई स्थित अपने आवास पर 26 अगस्त 2026 को दिए गए साक्षात्कार में चिदंबरम ने कहा कि CJP के एक-दो राज्यों में सत्ता तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के भविष्य को लेकर उन्होंने कोई निश्चित अनुमान नहीं लगाया।

NEET विवाद से उभरा युवा असंतोष

चिदंबरम की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब CJP के नेतृत्व में छात्र और युवा आंदोलन ने NEET और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन परीक्षा में कथित अनियमितताओं से आगे बढ़कर पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंचा।

युवा आंदोलन की बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी ने CJP को केवल एक आंदोलनकारी संगठन के बजाय संभावित राजनीतिक ताकत के रूप में चर्चा में ला दिया है।

NTA और NEET पेपर लीक पर चिदंबरम का सवाल

NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर चिदंबरम ने कहा कि ऐसी स्थिति को अप्रत्याशित नहीं माना जा सकता था। उन्होंने NTA में स्थायी कर्मचारियों की कम संख्या और देशभर में हजारों परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा आयोजित कराने की चुनौती का उल्लेख किया।

उनके मुताबिक, इतने बड़े स्तर की परीक्षा व्यवस्था के लिए जिस संस्थागत क्षमता और स्थायी मानव संसाधन की आवश्यकता होती है, उसके मुकाबले NTA की संरचना पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका को नजरअंदाज करना मुश्किल है।

CJP आंदोलन ने बदली युवा राजनीति की चर्चा

CJP का आंदोलन केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहा। आंदोलन के दौरान छात्रों और युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, बेरोजगारी और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी और सोशल मीडिया पर आंदोलन की व्यापक पहुंच ने इसे राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया। यही वह बदलाव है जिसने CJP के संभावित चुनावी प्रभाव को लेकर चर्चा तेज की है।

चिदंबरम का बयान इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता का यह कहना कि CJP एक-दो राज्यों में सत्ता में आ सकती है, इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मुख्यधारा की राजनीति भी इस नए युवा राजनीतिक उभार को गंभीरता से देख रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर तीसरी ताकत बनने की चुनौती

हालांकि चिदंबरम ने CJP को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरी ताकत के रूप में स्थापित होने को लेकर कोई भविष्यवाणी नहीं की। उन्होंने साफ कहा कि वह यह नहीं कह सकते कि पार्टी देशभर में ऐसा स्थान बना पाएगी।

किसी नए राजनीतिक संगठन के लिए एक या दो राज्यों में प्रभाव बनाना और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत राजनीतिक विकल्प बनना अलग-अलग चुनौतियां हैं। इसके लिए मजबूत संगठन, व्यापक सामाजिक आधार, स्थानीय नेतृत्व, स्पष्ट राजनीतिक एजेंडा और अलग-अलग राज्यों में लगातार चुनावी मौजूदगी की जरूरत होगी।

फिलहाल CJP का राजनीतिक प्रभाव मुख्य रूप से युवा, छात्र, परीक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द दिखाई देता है। आने वाले समय में यदि यह प्रभाव शिक्षा और रोजगार से आगे बढ़कर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों तक पहुंचता है, तो इसका चुनावी असर भी बढ़ सकता है।

क्या युवा आंदोलन बनेगा राजनीतिक ताकत?

CJP के उभार ने भारतीय राजनीति के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या परीक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरा युवा असंतोष एक स्थायी राजनीतिक ताकत में बदल सकता है?

सोशल मीडिया ने इस बदलाव की रफ्तार और बढ़ा दी है। आंदोलन से जुड़े वीडियो, भाषण, पोस्ट और अभियान तेजी से लाखों लोगों तक पहुंच सकते हैं। इससे स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय बहस में जगह मिलना पहले की तुलना में कहीं आसान हो गया है।

यही वजह है कि CJP का मौजूदा आंदोलन केवल एक छात्र आंदोलन के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इसके संभावित राजनीतिक विस्तार को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

आने वाले चुनाव होंगे असली परीक्षा

हालांकि, CJP वास्तव में कितनी बड़ी राजनीतिक ताकत बन सकती है, इसका अंतिम जवाब चुनावी मैदान में ही मिलेगा। आंदोलन में युवाओं की भागीदारी और सोशल मीडिया पर समर्थन को सीधे चुनावी वोट में बदलना किसी भी नए संगठन के लिए आसान नहीं होता।

फिर भी पी. चिदंबरम का बयान यह बताने के लिए पर्याप्त है कि CJP अब राजनीतिक चर्चा के हाशिये पर रहने वाला नाम नहीं रह गया है।

NEET और रोजगार जैसे मुद्दों से शुरू हुआ युवा असंतोष अब संभावित चुनावी ताकत की चर्चा तक पहुंच चुका है। अगर यह असंतोष संगठन, नेतृत्व और वोट में बदलता है, तो आने वाले चुनाव भारतीय राजनीति में एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत कर सकते हैं।

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