शिक्षा/बिहार | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 27 अगस्त 2026
बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर पिछले 10 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार सरकार के आश्वासन के बाद समाप्त होने जा रहा है। बिहार सरकार ने अभ्यर्थियों की सिंगल-स्टेज परीक्षा की प्रमुख मांग स्वीकार कर ली है। इसके बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपना आंदोलन वापस लेने पर सहमति जताई है।
गुरुवार को शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में 13 छात्र प्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन खत्म करने पर सर्वसम्मति से सहमति जताई। बैठक की अध्यक्षता बिहार शिक्षा विभाग के सचिव ने की। सरकार की ओर से TRE-4 में एक ही चरण में परीक्षा कराने की मांग पर सहमति दिए जाने के बाद छात्रों ने यह फैसला लिया।
‘एक अभ्यर्थी, एक परिणाम’ की मांग भी उठी
TRE-4 को लेकर छात्रों के आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा ‘One Candidate, One Result’ यानी एक अभ्यर्थी, एक परिणाम की व्यवस्था लागू करना भी था। अभ्यर्थियों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में एक ही उम्मीदवार अलग-अलग स्तरों—प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक—कई पदों पर चयन की स्थिति में आ सकता है। लेकिन नौकरी अंततः एक ही पद पर मिलने के कारण बाकी पद खाली रह जाते हैं।
छात्र इसे ‘सीटों की बर्बादी’ मानते हैं। उनका कहना है कि यदि एक उम्मीदवार को केवल एक परिणाम और एक नियुक्ति का अवसर मिले, तो बची हुई सीटों पर दूसरे योग्य अभ्यर्थियों को मौका दिया जा सकता है।
सरकार ने इस मुद्दे पर भी नियमों के अनुसार आगे कार्रवाई करने का भरोसा दिया है। हालांकि, इस व्यवस्था को किस तरीके से लागू किया जाएगा और इसके लिए क्या नियम बनाए जाएंगे, यह आगे स्पष्ट किया जाना है।
10 दिन से जारी था आंदोलन
TRE-4 परीक्षा के प्रारूप को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध पिछले 10 दिनों से जारी था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि शिक्षक भर्ती परीक्षा को दो या अधिक चरणों में कराने के बजाय एक ही परीक्षा के माध्यम से आयोजित किया जाए।
अभ्यर्थियों का मानना था कि एकल परीक्षा से भर्ती प्रक्रिया अधिक सरल और स्पष्ट होगी तथा अलग-अलग चरणों के कारण पैदा होने वाली अनिश्चितता कम होगी। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थी पटना में जुटे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
मामला उस समय और चर्चा में आया जब प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। इससे पहले प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वॉटर कैनन और लाठीचार्ज के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं। इसके बावजूद अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन जारी रखा और सरकार पर मांगों पर निर्णय लेने का दबाव बनाया।
सरकार और छात्रों के बीच बनी सहमति
गुरुवार की बैठक को इस पूरे विवाद में अहम मोड़ माना जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद सिंगल परीक्षा की मांग पर सरकार की सहमति बनी। इसके साथ ही छात्रों को ‘एक अभ्यर्थी, एक परिणाम’ के मुद्दे पर नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
13 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन वापस लेने का फैसला हुआ। इससे TRE-4 को लेकर कई दिनों से चला आ रहा गतिरोध फिलहाल समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
हालांकि, अभ्यर्थियों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि सरकार द्वारा घोषित सिंगल परीक्षा की व्यवस्था का विस्तृत प्रारूप क्या होगा। परीक्षा की तारीख, पाठ्यक्रम, चयन प्रक्रिया और ‘एक अभ्यर्थी, एक परिणाम’ व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नियम सामने आने का इंतजार रहेगा।
हजारों अभ्यर्थियों पर असर
बिहार में सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए TRE-4 बेहद महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा है। ऐसे में परीक्षा का प्रारूप सीधे तौर पर उनकी तैयारी और चयन की संभावनाओं को प्रभावित करता है।
छात्रों के आंदोलन ने यह भी दिखाया कि भर्ती परीक्षाओं में केवल परीक्षा आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है। अभ्यर्थी अब पारदर्शिता, स्पष्ट नियम, सीटों के प्रभावी इस्तेमाल और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की भी मांग कर रहे हैं।
TRE-4 को लेकर सरकार के ताजा फैसले के बाद आंदोलन तो खत्म होने जा रहा है, लेकिन अब असली परीक्षा सरकार की अगली कार्रवाई की होगी। सिंगल परीक्षा को लेकर औपचारिक अधिसूचना और ‘एक अभ्यर्थी, एक परिणाम’ पर स्पष्ट नियम जारी होने के बाद ही यह तय होगा कि छात्रों की मांग वास्तव में किस सीमा तक लागू होती है।
फिलहाल, 10 दिन के आंदोलन के बाद बिहार सरकार का सिंगल परीक्षा पर झुकना अभ्यर्थियों के लिए बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।




