राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 अगस्त 2026
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र को लेकर सरकार की मंशा पर स्पष्टीकरण मांगा है। खड़गे ने पूछा है कि क्या केंद्र सरकार परिसीमन से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। उनका यह पत्र ऐसे समय आया है जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में विशेष सत्र की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि वह पहले भी सरकार से इस संबंध में जानकारी मांग चुके हैं और संसदीय कार्य मंत्री के हालिया बयान के बाद उन्होंने यह मांग दोहराई है। उनके मुताबिक, रिजिजू ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि संसद की एक और बैठक बुलाई जा सकती है। खड़गे ने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि क्या यही वजह है कि मानसून सत्र के समाप्त होने के बावजूद संसद को अभी तक औपचारिक रूप से prorogue यानी सत्रावसान नहीं किया गया है।
परिसीमन को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
संसद के विशेष सत्र की चर्चा का मुख्य केंद्र परिसीमन से जुड़े संभावित संवैधानिक बदलाव हैं। परिसीमन का अर्थ लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा प्रतिनिधित्व के पुनर्निर्धारण से है। भारत में परिसीमन का मुद्दा केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व और भविष्य के राजनीतिक संतुलन से भी जुड़ा है।
इसी कारण परिसीमन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से बहस होती रही है। दक्षिणी राज्यों की ओर से यह चिंता जताई जाती रही है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व बढ़ाने के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मौजूदा जनसंख्या के अनुरूप होना चाहिए।
कांग्रेस ने पहले भी उठाया था सवाल
विशेष सत्र की संभावना को लेकर कांग्रेस पहले भी सरकार पर सवाल उठा चुकी है। पार्टी ने लोकसभा के सत्रावसान में हो रही देरी को लेकर आशंका जताई थी कि क्या सरकार परिसीमन से संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस की चिंता का एक बड़ा कारण यह है कि संविधान संशोधन विधेयक के लिए संसद में सामान्य विधेयकों की तुलना में अधिक व्यापक समर्थन की जरूरत होती है। ऐसे में किसी संभावित परिसीमन विधेयक पर सरकार को विपक्षी दलों के रुख का भी सामना करना पड़ सकता है।
खड़गे ने अपने ताजा पत्र के जरिए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने विशेष सत्र को लेकर किसी भी संभावित निर्णय की जानकारी विपक्ष के साथ साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘बुलडोज’ करने की कोशिश न हो
कांग्रेस की ओर से सरकार को यह संदेश भी दिया गया है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक और चुनावी मुद्दे पर संसद में व्यापक चर्चा और सहमति की प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ‘बुलडोज मत कीजिए’ वाला संदेश इसी राजनीतिक टकराव की ओर संकेत करता है।
परिसीमन का असर आने वाले वर्षों में लोकसभा की राजनीतिक संरचना पर पड़ सकता है। इसलिए विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सभी राजनीतिक दलों, राज्यों और संबंधित पक्षों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श किया जाए।
अभी सरकार की ओर से स्पष्ट घोषणा नहीं
फिलहाल सरकार ने संसद के विशेष सत्र को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। संसदीय कार्य मंत्री के बयान ने जरूर इसकी संभावना को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान अभी लंबित होने को भी विपक्ष इसी संदर्भ में देख रहा है।
यदि सरकार वास्तव में परिसीमन पर विशेष सत्र बुलाने का फैसला करती है, तो यह संसद और देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। इसके साथ ही दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के प्रतिनिधित्व, लोकसभा सीटों के संभावित पुनर्वितरण और संविधान में आवश्यक बदलावों पर व्यापक राजनीतिक बहस तेज होना तय है।
फिलहाल खड़गे का पत्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगने की दिशा में विपक्ष का बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विशेष सत्र की चर्चा केवल राजनीतिक अटकल है या केंद्र सरकार वास्तव में परिसीमन पर संसद की विशेष बैठक बुलाने की तैयारी कर रही है।




