राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 अगस्त 2026
भारत में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच अब पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार शुरू हो गया है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के चेयरमैन संजय खन्ना ने गुरुवार को कहा कि कंपनी E20 के साथ-साथ 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E10 उपलब्ध कराने के विकल्प की तलाश कर रही है। हालांकि, अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
E20 पेट्रोल में 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल होता है। भारत ने पिछले साल पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर लिया था। सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाना, विदेशी मुद्रा की बचत करना, किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करना और अपेक्षाकृत कम कार्बन उत्सर्जन वाले ईंधन को बढ़ावा देना है।
लेकिन E20 के व्यापक इस्तेमाल के बाद खासकर पुराने वाहनों को लेकर सवाल भी उठे हैं। वाहन मालिकों और कुछ विशेषज्ञों की ओर से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि पुराने इंजन, जिन्हें अधिक मात्रा में इथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन नहीं किया गया था, उनमें माइलेज कम होने और कुछ इंजन या ईंधन प्रणाली के पुर्जों पर अतिरिक्त असर पड़ने की आशंका हो सकती है।
इसी पृष्ठभूमि में BPCL का E10 को विकल्प के रूप में उपलब्ध कराने पर विचार महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संजय खन्ना के अनुसार, यह व्यवस्था खास तौर पर पुराने वाहनों के मालिकों को ध्यान में रखकर सोची जा रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि E20 को पूरी तरह हटाकर उसकी जगह E10 लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यानी संभावित व्यवस्था में दोनों प्रकार के ईंधन अलग-अलग जरूरतों के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।
पुराने वाहनों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है E10?
देश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन अभी सड़कों पर चल रहे हैं जो पुराने इंजन और पुराने ईंधन मानकों के दौर में बनाए गए थे। नए वाहनों के मुकाबले इनकी इथेनॉल सहनशीलता अलग हो सकती है। ऐसे में अगर E10 उपलब्ध होता है तो पुराने वाहनों के मालिकों के पास अपने वाहन की जरूरत और निर्माता की अनुशंसा के अनुसार ईंधन चुनने का विकल्प हो सकता है।
हालांकि, यहां यह समझना भी जरूरी है कि E20 से हर पुराने वाहन में नुकसान होना तय नहीं है। वाहन की उम्र, इंजन डिजाइन, निर्माता के निर्देश और ईंधन प्रणाली जैसे कई कारक इसका असर निर्धारित करते हैं। इसलिए E20 को लेकर सामने आने वाली हर शिकायत को सीधे इथेनॉल से जोड़ना भी सही नहीं होगा।
सबसे बड़ी चुनौती होगी सप्लाई और लॉजिस्टिक्स
BPCL के सामने सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती केवल E10 और E20 का उत्पादन नहीं, बल्कि दोनों को देशभर में अलग-अलग उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। फिलहाल पेट्रोल की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था बड़े पैमाने पर एकीकृत है। अगर दो अलग-अलग ब्लेंड वाले पेट्रोल को समानांतर रूप से बेचना है तो तेल कंपनियों को भंडारण, परिवहन, पाइपलाइन, टैंकर और पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग प्रबंधन की जरूरत पड़ सकती है।
यही कारण है कि BPCL ने अभी केवल संभावना तलाशने की बात कही है। दो अलग-अलग बेस फ्यूल को सप्लाई करने की व्यवस्था में अतिरिक्त लागत और परिचालन संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इन पहलुओं पर चर्चा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इथेनॉल नीति पर भी जारी है बहस
भारत के लिए इथेनॉल मिश्रण केवल वाहन ईंधन का मामला नहीं है। इसका संबंध ऊर्जा सुरक्षा, कृषि और आयात बिल से भी है। पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से कच्चे तेल पर कुछ हद तक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। गन्ना और अन्य फीडस्टॉक से उत्पादित इथेनॉल किसानों और संबंधित उद्योगों के लिए बाजार भी पैदा करता है।
लेकिन दूसरी ओर, उपभोक्ताओं के लिए माइलेज, वाहन की अनुकूलता और ईंधन की कीमत जैसे सवाल महत्वपूर्ण हैं। इसलिए आगे की नीति में ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ वाहन मालिकों की वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा।
फिलहाल BPCL का संकेत यह है कि E20 व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन पुराने वाहनों के लिए E10 का विकल्प देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो वाहन मालिकों को ईंधन चुनने में अधिक विकल्प मिलेगा, लेकिन इसके लिए देशभर में अलग सप्लाई और वितरण व्यवस्था तैयार करना तेल कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती होगी। अंतिम फैसला इसी संतुलन पर निर्भर करेगा।




