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पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में बड़ी सफलता, नई दवा से जीवन अवधि लगभग दोगुनी

राष्ट्रीय/स्वास्थ्य | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 अगस्त 2026

अग्न्याशय यानी पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने उन्नत पैंक्रियाटिक कैंसर के कुछ मरीजों के लिए दाराक्सोनरासिब (Daraxonrasib) नाम की दिन में एक बार ली जाने वाली मौखिक दवा को मंजूरी दी है। यह दवा उन मरीजों के लिए है जिनका कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका है और पहले किए गए उपचार के बावजूद बीमारी आगे बढ़ गई है।

इस दवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कैंसर को बढ़ावा देने वाले RAS प्रोटीन को निशाना बनाती है। पैंक्रियाटिक कैंसर में RAS लंबे समय से बीमारी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला कारक माना जाता रहा है। इस प्रोटीन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना कैंसर अनुसंधान की बड़ी चुनौतियों में शामिल रहा है।

दवा के क्लिनिकल ट्रायल में सामने आए परिणामों ने उम्मीद बढ़ाई है। अध्ययन में दाराक्सोनरासिब लेने वाले मरीजों की मध्य जीवन अवधि 13.2 महीने रही, जबकि कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों में यह 6.7 महीने थी। यानी अध्ययन में नई दवा लेने वाले मरीजों की मध्य जीवन अवधि लगभग दोगुनी रही।

अध्ययन में मृत्यु के जोखिम का hazard ratio करीब 0.40 रहा। आसान भाषा में इसका अर्थ है कि अध्ययन के दौरान दवा लेने वाले समूह में मृत्यु का जोखिम कीमोथेरेपी समूह की तुलना में काफी कम पाया गया। हालांकि इन आंकड़ों का यह मतलब नहीं है कि हर मरीज की जिंदगी निश्चित रूप से इतने समय तक बढ़ेगी। किसी भी कैंसर उपचार का असर मरीज की बीमारी, शरीर की स्थिति और पिछले उपचार समेत कई कारकों पर निर्भर करता है।

पैंक्रियाटिक कैंसर को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण कैंसरों में माना जाता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण कई बार स्पष्ट नहीं होते और बीमारी का पता देर से चलता है। जब तक इसका निदान होता है, कई मरीजों में कैंसर आसपास के ऊतकों या शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका होता है। ऐसे मामलों में उपचार के विकल्प भी सीमित हो सकते हैं।

दाराक्सोनरासिब का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका मौखिक रूप में उपलब्ध होना है। यह दिन में एक बार ली जाने वाली गोली है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज इसे अपने स्तर पर लेना शुरू कर सकते हैं। दवा की उपयुक्तता का फैसला कैंसर विशेषज्ञ मरीज की बीमारी की स्थिति, पहले दिए गए उपचार और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करते हैं।

इस मंजूरी को केवल एक दवा की सफलता के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह उस उपचार रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण कदम है जिसमें कैंसर कोशिकाओं के विकास में भूमिका निभाने वाले RAS जैसे प्रोटीन को सीधे निशाना बनाया जाता है। यदि यह रणनीति आगे दूसरे कैंसरों में भी प्रभावी साबित होती है, तो इसके इस्तेमाल का दायरा काफी बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ता अब यह भी जांच रहे हैं कि RAS को निशाना बनाने वाली इसी तरह की उपचार रणनीति का इस्तेमाल फेफड़ों और कोलोरेक्टल कैंसर जैसे अन्य कैंसरों में किस हद तक किया जा सकता है। इसके लिए आगे के क्लिनिकल परीक्षणों के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।

हालांकि इस उपलब्धि को पैंक्रियाटिक कैंसर का पूर्ण इलाज मानना जल्दबाजी होगी। FDA की मंजूरी विशिष्ट मरीजों और बीमारी की परिस्थितियों के लिए है। इसके अलावा किसी भी कैंसर की दवा के साथ संभावित दुष्प्रभाव और सीमाएं होती हैं, जिनका आकलन डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार करते हैं।

फिलहाल इस खबर की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि एक ऐसे कैंसर में, जहां लंबे समय से प्रभावी उपचार विकसित करना मुश्किल रहा है, वैज्ञानिकों को एक नया और लक्षित उपचार विकल्प मिला है। क्लिनिकल ट्रायल में जीवन अवधि के आंकड़ों में दिखाई दिया अंतर निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है और आगे के शोध के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।

दाराक्सोनरासिब पैंक्रियाटिक कैंसर का अंतिम समाधान नहीं है, लेकिन RAS को निशाना बनाने वाली इस नई उपचार रणनीति ने उन मरीजों के लिए उम्मीद की एक नई खिड़की जरूर खोली है, जिनके लिए पहले विकल्प सीमित थे।

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