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जम्मू-कश्मीर पर चीन-पाकिस्तान को भारत का करारा जवाब! MEA बोला- J&K भारत का अभिन्न हिस्सा, CPEC का फिर किया विरोध

राष्ट्रीय | आलोक रंजन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 मई 2026

भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उसे पूरी तरह “अनुचित और अस्वीकार्य” करार दिया है। Ministry of External Affairs ने साफ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और इस मुद्दे पर किसी भी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी China-Pakistan Economic Corridor का विरोध दोहराते हुए कहा कि यह परियोजना भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती है क्योंकि इसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK से होकर गुजरता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने स्पष्ट कहा कि भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और लगातार एक जैसा रहा है। उन्होंने कहा कि “जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे।” भारत ने यह भी दोहराया कि कश्मीर मुद्दा पूरी तरह द्विपक्षीय मामला है और इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की पाकिस्तान की कोशिशें सफल नहीं होंगी।

दरअसल यह विवाद उस समय बढ़ा जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने चीन को जम्मू-कश्मीर के हालात की जानकारी दी। बयान में चीन ने कश्मीर को “इतिहास से जुड़ा लंबित मुद्दा” बताते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत “शांतिपूर्ण समाधान” की बात कही। यह वही भाषा है जिसका इस्तेमाल 2024 के चीन-पाकिस्तान संयुक्त बयान में भी किया गया था और उस समय भी भारत ने इसे सख्ती से खारिज किया था।

भारत ने इस संयुक्त बयान में शामिल तथाकथित “सीमा-पार जल संसाधन सहयोग” यानी Trans-boundary Water Resources Cooperation के उल्लेख को भी खारिज कर दिया। MEA ने कहा कि चीन और पाकिस्तान की आपस में कोई वैध सीमा ही नहीं लगती, इसलिए ऐसे सहयोग का सवाल ही नहीं उठता। भारत ने यह भी दोहराया कि वह पाकिस्तान और चीन के बीच हुए 1963 सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं देता, क्योंकि वह समझौता भारतीय क्षेत्र से संबंधित अवैध कब्जे वाले हिस्सों पर आधारित था।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान लगातार रणनीतिक साझेदारी के तहत भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर CPEC परियोजना चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का अहम हिस्सा है, जिसे लेकर भारत शुरू से ही विरोध दर्ज करता रहा है। भारत का कहना है कि कोई भी परियोजना उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की अनदेखी कर आगे नहीं बढ़ सकती।

राजनीतिक और सामरिक विश्लेषकों के मुताबिक भारत का यह सख्त बयान केवल कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि स्पष्ट रणनीतिक संदेश भी है कि नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर किसी भी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं करेगी। भारत ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि कश्मीर मुद्दा उसका आंतरिक मामला है और इस पर तीसरे पक्ष की कोई भूमिका स्वीकार नहीं की जाएगी।

चीन-पाकिस्तान के बढ़ते सामरिक सहयोग, CPEC और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत का यह रुख आने वाले समय में दक्षिण एशिया की कूटनीतिक राजनीति को और अधिक गर्मा सकता है। फिलहाल नई दिल्ली ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि राष्ट्रीय संप्रभुता और सीमाई अखंडता के मुद्दे पर उसकी नीति में किसी प्रकार की नरमी की कोई संभावना नहीं है।

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