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जेनेवा में गूंजेगा भारत का मोर: UN कार्यालय को दिए पांच मोर, सफेद पंखों वाला नर बना खास आकर्षण

भारत ने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को भेंट किए पांच युवा मोर—चार नीले और एक दुर्लभ सफेद पंखों वाला; UN के नीले-सफेद रंगों से जुड़ा प्रतीकात्मक संदेश

अंतरराष्ट्रीय/ पर्यावरण/ वन्यजीव | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/जेनेवा | 11 अगस्त 2026

भारत ने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय, जेनेवा को पांच युवा मोर भेंट किए हैं। इनमें चार नीले मोर और एक सफेद पंखों वाला नर मोर शामिल है। इस पहल के जरिए भारत ने न केवल संयुक्त राष्ट्र परिसर में भारतीय राष्ट्रीय पक्षी की मौजूदगी दर्ज कराई है, बल्कि दशकों पुरानी एक परंपरा को भी फिर से जीवित किया है। खास बात यह है कि इन पांच मोरों के रंगों को संयुक्त राष्ट्र से जुड़े नीले और सफेद रंगों के साथ भी जोड़ा गया है, जिससे यह भेंट महज वन्यजीवों के आदान-प्रदान से आगे बढ़कर एक प्रतीकात्मक कूटनीतिक संदेश बन गई है।

मोरों के जरिए भारत की संस्कृति और प्रकृति का संदेश

मोर भारत की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और देश का राष्ट्रीय पक्षी भी है। भारतीय परंपरा, कला, लोक-संस्कृति और प्रकृति में मोर का विशेष स्थान रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को मोर भेंट करना भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का एक अनोखा तरीका माना जा सकता है। पांचों मोरों में चार सामान्य नीले पंखों वाले हैं, जबकि एक नर मोर सफेद पंखों वाला है। यही सफेद मोर इस पूरी पहल को और खास बनाता है।

इस पहल का एक और दिलचस्प पहलू संयुक्त राष्ट्र के प्रतीकात्मक रंगों से इसका जुड़ाव है। संयुक्त राष्ट्र की पहचान में नीला और सफेद रंग प्रमुख हैं और भारत की ओर से दिए गए मोरों में भी यही रंग दिखाई देते हैं। चार नीले मोर और एक सफेद पंखों वाला नर इस तरह भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग, शांति और साझा वैश्विक मूल्यों के प्रतीक के तौर पर देखे जा सकते हैं।

दशकों पुरानी परंपरा को मिला नया जीवन

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के अनुसार, मोरों को भेंट किए जाने के साथ एक पुरानी परंपरा को दोबारा शुरू किया गया है। यह पहल भारत और संयुक्त राष्ट्र के लंबे संबंधों की सांस्कृतिक परत को भी सामने लाती है। सामान्य तौर पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में समझौते, बैठकें, घोषणाएं और औपचारिक उपहार देखने को मिलते हैं, लेकिन किसी देश के राष्ट्रीय पक्षी को अंतरराष्ट्रीय संस्था के परिसर में स्थान मिलना अपने आप में अलग तरह का सांस्कृतिक संदेश देता है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षवाद, शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की वकालत करता रहा है। ऐसे में मोरों की यह भेंट भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को भी दर्शाती है—यानी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और प्रतीकों के जरिए दुनिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना।

सिर्फ खूबसूरती नहीं, जिम्मेदारी भी बड़ी

हालांकि इस पहल का आकर्षक पक्ष स्पष्ट है, लेकिन मोरों को किसी अंतरराष्ट्रीय परिसर में रखना अपने साथ जिम्मेदारियां भी लाता है। पक्षियों की देखभाल, उनके लिए उपयुक्त वातावरण, भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी होगा। खास तौर पर सफेद पंखों वाले मोर की देखभाल और उसके अनुकूल वातावरण पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

इसलिए यह पहल तभी पूरी तरह सफल मानी जाएगी जब इन पक्षियों के लिए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक देखभाल की व्यवस्था भी उतनी ही गंभीरता से की जाए। राष्ट्रीय प्रतीक को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना गौरव की बात है, लेकिन उसके संरक्षण और कल्याण की जिम्मेदारी उससे भी बड़ी है।

भारत की पहचान अब UN परिसर में भी

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के परिसर में इन पांच मोरों की मौजूदगी भारत की संस्कृति और प्रकृति को एक नए तरीके से दुनिया के सामने रखेगी। चार नीले मोर और एक सफेद पंखों वाला नर मोर वहां आने वाले राजनयिकों, अधिकारियों और आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

यह पहल एक सरल लेकिन प्रभावशाली संदेश देती है—कूटनीति केवल बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं होती; संस्कृति, प्रकृति और प्रतीक भी देशों को करीब लाने की ताकत रखते हैं। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र को दी गई यह अनोखी भेंट इसी सोच का एक खूबसूरत उदाहरण है।

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