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बिहार में कानून-व्यवस्था पर बढ़ा दबाव, अब BJP सांसद ने भी उठाए सवाल; बोले—‘पुलिसिंग चरमरा गई है’

राष्ट्रीय/ बिहार | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 27 सितंबर 2026

 

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच अब सत्तारूढ़ BJP के भीतर से भी सरकार के कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं। BJP के राज्यसभा सांसद शंभू शरण पटेल ने शनिवार को बिहार की पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को लेकर खुलकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में पुलिसिंग चरमरा गई है और अपराधियों में कानून का डर खत्म होता दिखाई दे रहा है। पटेल ने कानून-व्यवस्था को सुधारने के लिए राज्य के मुख्य सचिव और DGP को बदलने की मांग भी की।

शंभू शरण पटेल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बिहार में हाल के दिनों में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े कई गंभीर मामलों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा है। इन घटनाओं को लेकर विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार को घेर रहा है और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। अब उसी समय BJP के एक सांसद की सार्वजनिक टिप्पणी ने इस बहस को सत्ता पक्ष के भीतर भी पहुंचा दिया है।

पटेल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बिहार में पुलिसिंग की स्थिति खराब हो गई है और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह सुधारने की जरूरत है। उन्होंने राज्य में नया मुख्य सचिव और नया DGP नियुक्त करने की मांग की। उनका कहना था कि प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत है और अपराधियों के बीच कानून का डर फिर से कायम करना जरूरी है।

BJP सांसद का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आम तौर पर सत्तारूढ़ दल के नेता सरकार की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था का बचाव करते दिखाई देते हैं। लेकिन पटेल ने सीधे पुलिसिंग की स्थिति पर सवाल उठाते हुए प्रशासनिक स्तर पर बदलाव की मांग की है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में कानून-व्यवस्था राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

हाल के दिनों में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े मामलों ने इस बहस को और तेज किया है। इन घटनाओं को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराध रोकने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। सरकार के सामने चुनौती यह है कि अलग-अलग घटनाओं पर कार्रवाई के साथ-साथ लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर भरोसा भी कायम रहे।

बिहार में कानून-व्यवस्था का सवाल केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि अपराध की सूचना मिलने के बाद तेजी से कार्रवाई हो, पीड़ितों की शिकायत दर्ज की जाए और जांच समय पर आगे बढ़े। किसी भी मामले में शुरुआती कार्रवाई जितनी स्पष्ट और तेज होती है, उतना ही लोगों का भरोसा मजबूत होता है। इसी वजह से पुलिस नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

शंभू शरण पटेल की मांग के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बिहार सरकार पुलिस और प्रशासन के स्तर पर बड़े बदलाव करने पर विचार करेगी। हालांकि पटेल की ओर से की गई मांग उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक राय है और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सरकार ने किसी अधिकारी को बदलने का फैसला कर लिया है।

फिलहाल बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्ष पहले से ही सरकार को घेर रहा है और अब BJP के भीतर से भी पुलिसिंग की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। पटेल का बयान इसलिए अहम है क्योंकि उन्होंने केवल किसी एक घटना पर प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि पूरी पुलिसिंग व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई है। अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार इस मांग और बढ़ती सार्वजनिक बहस के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाती है।

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