अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | एवियन, फ्रांस | 18 जून 2026
फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और ब्रिटेन ने अपने आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला एक बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संयुक्त रूप से घोषणा की कि भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) 15 जुलाई 2026 से लागू हो जाएगा। लंबे समय से चल रही बातचीत और कई दौर की वार्ताओं के बाद यह समझौता अब जमीन पर उतरने जा रहा है। इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। ब्रिटेन भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता है। लेकिन कई क्षेत्रों में ऊंचे शुल्क, जटिल नियमों और व्यापारिक बाधाओं के कारण व्यापार की पूरी संभावनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। यही कारण था कि दोनों देश पिछले कई वर्षों से एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर काम कर रहे थे। अब इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान आसान होगा तथा व्यापारिक लागत में कमी आएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत और ब्रिटेन की साझेदारी के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझा विकास की नई संभावनाओं का मार्ग भी खोलेगा। वहीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के उद्योगों, निवेशकों, उद्यमियों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगा तथा आर्थिक विकास को गति देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का सबसे अधिक लाभ भारतीय निर्यातकों को मिल सकता है। भारत के वस्त्र उद्योग, चमड़ा उद्योग, कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं को ब्रिटेन के बाजार में अधिक अवसर मिलेंगे। कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त होने से भारतीय कंपनियां ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। इससे भारत के निर्यात में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
दूसरी ओर ब्रिटेन की कंपनियों को भी भारत के विशाल बाजार तक अधिक आसान पहुंच मिलेगी। वित्तीय सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा, उन्नत तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र में ब्रिटिश निवेश बढ़ने की उम्मीद है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ब्रिटेन की कंपनियां इस विकास का लाभ उठाने के लिए लंबे समय से उत्सुक रही हैं। यह समझौता उनके लिए नए निवेश और साझेदारी के द्वार खोलेगा।
G7 सम्मेलन के दौरान हुई बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार के अलावा रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी सहमति जताई। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जब दुनिया कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, तब भारत और ब्रिटेन की यह साझेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
यह समझौता ऐसे समय लागू होने जा रहा है जब दुनिया की अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के तनाव, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं से प्रभावित है। ऐसे माहौल में भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक सहयोग का विस्तार दोनों देशों के लिए स्थिरता और विकास का नया आधार बन सकता है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक संदेश जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत और ब्रिटेन के बदलते रणनीतिक रिश्तों का प्रतीक भी है। ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन नए वैश्विक साझेदारों की तलाश में है, जबकि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक व्यापार से और अधिक जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में यह समझौता दोनों देशों के हितों को एक साझा मंच पर लाता है।
15 जुलाई से लागू होने वाला यह मुक्त व्यापार समझौता आने वाले वर्षों में भारत-ब्रिटेन संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला साबित हो सकता है। व्यापार, निवेश, तकनीक, रोजगार और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। यही कारण है कि दोनों देशों की सरकारें इसे 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय आर्थिक पहलों में से एक मान रही हैं।




