बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/होसुर | 17 जून 2026
एप्पल के लिए आईफोन कंपोनेंट्स बनाने वाली टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की तमिलनाडु स्थित फैक्ट्री को बड़ी राहत मिली है। कंपनी ने बताया है कि तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने फैक्ट्री के खिलाफ चल रही जांच और निगरानी प्रक्रिया समाप्त कर दी है। इसके साथ ही संयंत्र पर मंडरा रहा संभावित बंदी का खतरा भी फिलहाल टल गया है।
कुछ दिन पहले तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी कि यदि कंपनी अपशिष्ट जल (वेस्टवॉटर) के निस्तारण और प्रदूषण संबंधी शिकायतों पर संतोषजनक जवाब नहीं देती, तो फैक्ट्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। सरकारी निरीक्षण में यह आरोप सामने आया था कि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट जल के कारण आसपास के कृषि क्षेत्रों में स्थित खुले कुओं का पानी प्रभावित हुआ है।
मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया था जब स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने जल प्रदूषण को लेकर चिंता जताई थी। जांच रिपोर्ट में आसपास के क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा था।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अब कहा है कि उसने बोर्ड द्वारा उठाई गई सभी चिंताओं का समाधान कर दिया है और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए हैं। कंपनी के अनुसार संबंधित अधिकारियों को सभी तकनीकी और पर्यावरणीय अनुपालन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई, जिसके बाद जांच प्रक्रिया बंद कर दी गई।
होसुर स्थित यह संयंत्र एप्पल की वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। भारत में आईफोन निर्माण और कंपोनेंट उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति के तहत टाटा समूह ने हाल के वर्षों में एप्पल के साथ अपनी साझेदारी को तेजी से विस्तार दिया है। ऐसे में फैक्ट्री के संभावित बंद होने की आशंका ने उद्योग जगत और निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए पर्यावरणीय मानकों और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। एक ओर बड़े निवेश और रोजगार के अवसर महत्वपूर्ण हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पर्यावरण और जल संसाधनों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जांच बंद किए जाने के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए तत्काल राहत की स्थिति बनी है। हालांकि पर्यावरणीय अनुपालन और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को लेकर भविष्य में भी कंपनी की गतिविधियों पर नजर बनी रह सकती है। फिलहाल इस फैसले से भारत में एप्पल की सप्लाई चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को स्थिरता का सकारात्मक संदेश मिला है।




