बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 अक्टूबर 2026
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता लागू
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड को भारत से होने वाले निर्यात पर 100 प्रतिशत टैरिफ समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही समझौते में भारत में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रावधान भी शामिल है।
इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि न्यूजीलैंड से भारत आने वाले उत्पादों के लिए भी शुल्क में राहत का रास्ता खुलेगा।
समझौते के तहत न्यूजीलैंड के भारत को होने वाले निर्यात का 95 प्रतिशत हिस्सा या तो बिना शुल्क के आएगा या उस पर पहले की तुलना में काफी कम शुल्क लगेगा।
अप्रैल में हुआ था समझौते पर हस्ताक्षर
भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद भारत ने 21 सितंबर को समझौते का अनुमोदन किया। न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर को इसे लागू करने के लिए जरूरी कानून पारित किया था।
दोनों देशों की आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह समझौता 20 अक्टूबर से प्रभावी हो गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 19 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में अधिकारियों के बीच दस्तावेजों के आदान-प्रदान के दौरान मौजूदगी दर्ज कराई थी।
भारतीय निर्यातकों को क्या होगा फायदा?
न्यूजीलैंड में भारतीय निर्यात पर सभी टैरिफ समाप्त होने से भारतीय कंपनियों को वहां अपने उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेचने का अवसर मिलेगा। शुल्क में कमी से उत्पादों की लागत घट सकती है और भारतीय कारोबारियों के लिए बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावनाएं बन सकती हैं।
हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि भारतीय कंपनियां न्यूजीलैंड में मांग, गुणवत्ता मानकों और प्रतिस्पर्धा के अनुरूप कितनी प्रभावी ढंग से कारोबार बढ़ा पाती हैं।
दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भी भारतीय बाजार में शुल्क संबंधी राहत मिलेगी। समझौते के अनुसार, न्यूजीलैंड के निर्यात का 95 प्रतिशत हिस्सा भारत में शुल्क-मुक्त या काफी कम शुल्क पर प्रवेश कर सकेगा।
भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का प्रावधान
समझौते में भारत में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रावधान शामिल है। इससे भारत में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में निवेश की क्षेत्रवार हिस्सेदारी, परियोजनाओं की समय-सीमा या वास्तविक निवेश प्रवाह का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस राशि को समझौते के तहत किए गए प्रावधान के रूप में देखना चाहिए, न कि पूरी रकम के तत्काल भारत पहुंचने की पुष्टि के रूप में।
यदि निवेश योजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो इससे विभिन्न क्षेत्रों में कारोबारी सहयोग और आर्थिक साझेदारी के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
भारतीयों के लिए वीजा की दो नई श्रेणियां
इस मुक्त व्यापार समझौते में भारतीय नागरिकों के लिए अस्थायी रोजगार प्रवेश यानी टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट एंट्री (TEE) वीजा की दो नई श्रेणियां भी शामिल की गई हैं।
इन नई श्रेणियों का उद्देश्य निर्धारित शर्तों के तहत भारतीय नागरिकों के लिए न्यूजीलैंड में अस्थायी रोजगार से जुड़े अवसरों का रास्ता उपलब्ध कराना है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इन दोनों श्रेणियों के लिए पात्रता, वीजा की अवधि और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं दी गई है।
वीजा संबंधी विस्तृत नियम सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन पेशेवरों और श्रमिकों को इन व्यवस्थाओं का लाभ मिलेगा।
द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई दिशा
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते का लागू होना दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय निर्यात पर शुल्क समाप्त होना, न्यूजीलैंड के उत्पादों को भारतीय बाजार में राहत मिलना, निवेश का प्रावधान और वीजा की नई श्रेणियां इस समझौते के प्रमुख हिस्से हैं।
अब समझौते का वास्तविक असर उसके क्रियान्वयन, व्यापार में होने वाली वृद्धि और निवेश योजनाओं की प्रगति से आंका जाएगा। भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों के लिए यह न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर है, जबकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की संभावनाएं भी खुली हैं।



