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चीन, भारत और दक्षिण कोरिया कैसे बचाते हैं अपनी प्रवेश परीक्षाओं की साख?

शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 जून 2026

विश्वभर में विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाएं केवल शैक्षणिक मूल्यांकन नहीं बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और सामाजिक उन्नति का आधार बन चुकी हैं। जैसे-जैसे इन परीक्षाओं का महत्व बढ़ा है, वैसे-वैसे नकल, पेपर लीक और तकनीकी धोखाधड़ी जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। यही कारण है कि चीन, भारत और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने अपनी परीक्षा प्रणालियों की सुरक्षा के लिए व्यापक और कठोर व्यवस्थाएं विकसित की हैं।

चीन की ‘गाओकाओ’ परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन और संवेदनशील प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है। यहां परीक्षा केंद्रों पर फेस रिकग्निशन, बायोमेट्रिक सत्यापन, मेटल डिटेक्टर और एंटी-चीटिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। कई स्थानों पर ड्रोन और सिग्नल जैमर भी तैनात किए जाते हैं ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो सके।

भारत में जेईई, नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल निगरानी, सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक सत्यापन और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। हालांकि हाल के वर्षों में पेपर लीक और तकनीकी खामियों की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं, जिसके बाद सरकार और परीक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा मानकों को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

दक्षिण कोरिया की ‘सुनुंग’ परीक्षा को राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाता है। परीक्षा के दिन पूरे देश की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। हवाई जहाजों की उड़ानों तक का समय बदला जाता है ताकि छात्रों को किसी प्रकार का शोर न हो। पुलिस और प्रशासन परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष प्रबंधन करते हैं तथा परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम लागू किए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों देशों की व्यवस्थाएं अलग-अलग राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचों को दर्शाती हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक ही है—परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों के विश्वास को बनाए रखना। आज जब तकनीक के माध्यम से धोखाधड़ी के नए तरीके सामने आ रहे हैं, तब परीक्षा सुरक्षा केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बन चुकी है।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उन्नत निगरानी तकनीकों और मजबूत कानूनी ढांचे का उपयोग परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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